Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब और प्रवीण भाई तोगडिया अंदर से मिले हुए है --- मोदी साहेब और प्रवीण भाई दोनो ही फ़र्ज़ी हिंदुवादी, फ़र्ज़ी गाय वादी, और फ़र्ज़ी राम मंदिर वादी है ।
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तोगडिया मोदी विरोध का सिर्फ़ दिखावा कर रहे है --- असल में, प्रवीण भाई मोदी विरोध का बयान देकर गौ रक्षको के सामने यह "भ्रम" खड़ा करना चाहते है कि वे सच्चे गौ रक्षक है ।
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यदि तोगडिया वाक़यी मोदी साहेब के बयान से नाराज़ होते थे तो उन्हें मोदी साहेब पर मानहानि का मुक़दमा दर्ज करवा देना चाहिए था । इसके अलावा तोगडिया ने पूरी ज़िंदगी गौ हत्या रोकने के लिए आवश्यक कानूनो का विरोध करने में लगायी है । गौ हत्या के आरोपियों का सार्वजनिक नार्को टेस्ट करने के क़ानून का भी तोगडिया ने हमेशा से विरोध किया है । इतना ही नही, तोगडिया ने अपना पूरा जीवन राइट टू रिकॉल गौ कल्याण अधिकारी, राइट टू रिकॉल पशु कल्याण मंत्री, राइट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख, राइट टू रिकॉल लोक अभियोजक तथा इनके स्टाफ़ पर ज्यूरी सिस्टम लागू करने के कानूनो का विरोध करने में ही बिताया है । जबकि तोगडिया अच्छी तरह से जानते है कि, राइट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख और ज्यूरी सिस्टम कानूनो के बिना गौ हत्या पर रोक लगाना मुमकिन नही है ।
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जहाँ तक आम आदमी पार्टी और कोंग्रेस का प्रश्न है, इस मामले में केजरीवाल और सोनिया का स्टेण्ड क्लीयर है --- "ये दोनो पार्टियाँ पूरे देश में गायों की कटवायी का समर्थन करती है"।
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यह मिशनरीज़ का दबाव है, जिसके कारण मोदी साहेब को सार्वजनिक रूप से गौ रक्षको का विरोध करने के लिए बाध्य होना पड़ा है । मिशनरीज़ गौ रक्षको पर कार्यवाही इसीलिए नही चाहती क्योंकि वे गायों की रक्षा कर रहे है, बल्कि मुख्य कारण यह है कि, गौ रक्षक एंटी मिशनरीज़ है और मिशनरीज़ की धर्मान्तरण नीति के आड़े आ रहे है । अब मोदी साहेब यह तो कह नही सकते कि, "यदि गौ रक्षक मिशनरीज़ का रास्ता रोकेंगे तो मैं उन्हें हवालात में पहुँचा दूँगा", इसीलिए मोदी साहेब ने दलितों और गौ रक्षको के बीच हुये झगड़े का सहारा लिया । मेरे विचार में, उक्त घटना के दोषी गौ रक्षको का ज्यूरी द्वारा सार्वजनिक नार्को टेस्ट लेकर इन्हें ५ वर्ष का कारावास दिया जाना चाहिए । लेकिन मोदी साहेब ने इस घटना को बेहद भद्दे तरीक़े से अपने अवसर में बदल दिया और यह संदेश दिया कि, "८०% गौ रक्षक गुंडे है" । क्योंकि मिशनरीज़ चाहती है कि मोदी साहेब उन गौ रक्षको के पर क़तर दे जो उनके काम में बाधा दे रहे है ।
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और अब मोदी साहेब यह सुनिश्चित करना चाहते है कि, इस प्रकार खुले आम गौ रक्षको पर हमला करने के बावजूद गौ रक्षक विहिप से चिपके रहे । अतः उनके निर्देश पर तोगडिया मोदी विरोध का राग अलाप रहे है । चुनाव का इंतज़ार करिए । यही तोगडिया फिर से मोदी के पक्ष में अभियान चलाएँगे । इसीलिए बीजेपी/मोदी के खुले आम एंटी-गौ रक्षक होने के बावजूद तोगडिया सभी गौ रक्षको को यह सलाहें देते घूम रहे है कि "हमें अलग से राजनैतिक पार्टी बनाने की कोई आवश्यकता नही है । हमें सिर्फ़ बीजेपी के साथ ही बने रहना चाहिए" !!! दूसरे शब्दों में, जब चुनाव आएँगे तो तोगडिया फिर से गौ रक्षको से कहेंगे कि, "मोदी साहेब को वोट दो, और अलग से कोई पार्टी बनाने या अन्य किसी राष्ट्रवादी पार्टी को समर्थन देने की कोई ज़रूरत नही है" !!!
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इसीलिए, मेरा देश के सभी गौ रक्षको से आग्रह है कि, उन्हें इस बात को समझना चाहिए कि तोगडिया की रूचि सिर्फ़ उनका टाइम पास करके उन्हें बीजेपी के साथ चिपकाए रखने की है । गौ रक्षा के लिए आवश्यक क़ानूनो को लागू करने में उनकी बिलकुल भी रूचि नही है । बल्कि वे तो गौ हत्या रोकने के लिए आवश्यक कानूनो का विरोध करते है । और इस मामले में यही स्थिति कोंग्रेस-बीजेपी-आम पार्टी और सोनिया-मोदी-केजरीवाल की है । इन पार्टियों और नेताओं को समर्थन देने की जगह कार्यकर्ताओं को उन कानूनो को लागू करवाने का प्रयास करना चाहिए जिससे गौ हत्या को को रोका और मंदिरो को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जा सके ।
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इन कानूनो के प्रस्तावित ड्राफ़्ट्स का विवरण देखने के लिए कृपया दिए गए लिंक को क्लिक करें -- https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1001243123327257&set=a.227009877417256.48763.100003247365514&type=3&theater
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