Pawan Jury BhilwaraRj
पाकिस्तान की सीमा पर सोनिया-मोदी-केजरीवाल दीवार बना रहे है --- अमेरिका और मेक्सिको की सीमा पर न तो कोई दीवार है और न ही कोई बाड़। तब अमेरिका मेक्सिको की सीमा से आतंकियों को घुसने से कैसे रोकता है ?
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और अमेरिका को मेक्सिको-अमेरिका के बीच बिछी सुरंगों से आतंकियों को आने से रोकने के लिए गहन निगरानी के उपकरणों की आवश्यकता भी क्यों नहीं है ?
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(टिपण्णी --- मेक्सिको की सीमा से अवैध रूप से श्रमिक बड़ी तादाद में अमेरिकी सीमा में प्रवेश करते है, क्योंकि अमेरिका के धनिक श्रमिक दर को कम रखना चाहते है। और अमेरिकी नागरिकों के पास संघीय सरकार को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक क़ानून प्रक्रियाएं नहीं है। )
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सवाल यह है कि -- सोनिया-मोदी-केजरीवाल भारत पाक की सीमा पर बेहद भारी भरकम पैसा खर्च करके दीवार बनाने का समर्थन कर रहे है, और साथ ही यह दावा भी कर रहे है कि इससे सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ में कमी आएगी। "मैं इस दीवार के निर्माण का विरोध नहीं करता हूँ"। कृपया इस बात को नोट कीजिये कि --- "मैं इस दीवार के निर्माण का विरोध नहीं करता हूँ"।
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पर सवाल यह है कि -- क्या दीवार खड़ी किये जाने से आतंकवाद में कमी आएगी ? क्या पाकिस्तान के पास दीवार में छेद करने के लिए गोला-बारूद नहीं है ? और क्या आतंकियों को यह जानकारी नहीं है कि दीवार के नीचे से सुरंग निकाली जा सकती है ? इसके अलावा भौगोलिक परिस्थितियों जैसे जंगल, पहाड़ आदि पर विचार कीजिये। क्या ऐसे क्षेत्र में दीवार खड़ी करना आसान और कम खर्चीला होगा ?
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और फेसबुक/व्हाट्स ऐप/अमेरिका के सहयोग से बड़े पैमाने पर कश्मीर के जो युवा आतंक का समर्थन करने के लिए प्रेरित हो रहे है ? ( कृपया इन आतंकियों की शवयात्राओं में उमड़ी भीड़ को देखें )
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समाधान ?
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हमें इस दीवार से कोई उल्लेखनीय लाभ नहीं होगा। मैं इस दीवार का विरोध नहीं करता। क्योंकि इससे हम पर सिर्फ मौद्रिक भार पड़ेगा। लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में पहले से ही इतने सारे और इतने बड़े छेद है और जिनसे इतना पैसा रिस रहा है कि इस दीवार पर किये जाने वाले कुछ हजार करोड़ के खर्चे पर हाय तौबा मचाने की कोई तुक नहीं।
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समस्या का समाधान यह है कि हम अमेरिका का अनुसरण करे। अमेरिका को मेक्सिको सीमा पर ऐसी किसी दीवार की जरूरत इसीलिए नहीं है क्योंकि मैक्सिको में कोई आतंकी नेटवर्क नहीं है !!! और मेक्सिको में आतंकी नेटवर्क इसीलिए नहीं है क्योंकि ऐसे नेटवर्क को पनपाने के लिए राजनैतिक सरंक्षण की जरूरत होती है। और अगर मैक्सिको का कोई नेता मेक्सिको में ऐसे किसी आतंकी समूह को सरंक्षण देता जो कि अमेरिका में घुसपैठ करे, तो इस बात की गारंटी है कि अमेरिका की सेना अमुक नेता को मेक्सिको के शहर में ही सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका देती।
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दूसरे शब्दों में पाकिस्तान की सीमा से आतंकियों की घुसपैठ रोकने का उपाय दीवार बनाना नहीं है, बल्कि भारत की सेना को उस हद तक मजबूत करना है कि भारत की सेना आतंक का समर्थन करने वाले नेताओ को लाहौर, इस्लामाबाद और कराची में जाकर सार्वजनिक फांसी दे सके। इतनी ताकतवर सेना का गठन हम कैसे कर सकते है ? "मेड इन इण्डिया, मेड बॉय इन्डियन" की नीति को लागू करते हुए स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन करके। कैसे हम ऐसे जटिल स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन कर पाएंगे ? भारत की निर्माण इकाइयों की क्षमता को बेहतर बनाकर। कैसे ? -- वेल्थ टैक्स, ज्यूरी सिस्टम, एमआरसीएम, जनमत संग्रह, राईट टू रिकॉल कानूनों को लागू करके।
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और कैसे हम इन कानूनों को देश में लागू करवा सकते है ? उपाय सरल है -- कार्यकर्ताओ को कांग्रेस-बीजेपी-आप-संघ-सीपीएम आदि राजनैतिक समूहों को भाड़ में झोंक देना चाहिए। क्योंकि ये समूह 1920 से ही इन कानूनों का विरोध कर रहे है। असल में ये समूह उन सभी कानूनों के पैदाइशी विरोधी है जिससे भारत में तकनिकी विकास हो और भारत स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करके आत्मनिर्भर हो सके। देश में सिर्फ "राईट टू रिकॉल पार्टी" ही एक मात्र पार्टी है जो इन कानूनों का समर्थन करती है। अत: कार्यकर्ताओ को राइट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ताओ के साथ काम करना चाहिए।
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इसीलिए यदि सोनिया-मोदी-केजरीवाल दीवार बनाकर कुछ हजार करोड़ रूपये फूंकना चाहते है तो उन्हें फूंकने दो। मैं इस दीवार का विरोध नहीं करता। लेकिन मेरे विचार में यह पूरी तरह अनुपयोगी है। समाधान यह है कि हम भारत की सेना को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आवश्यक कानूनों को गैजेट में प्रकाशित करे।
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