Pawan Jury BhilwaraRj
आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता गुजरात में भी बढ़ रही है --- कांग्रेस-बीजेपी में बढ़ते भ्रष्टाचार और छद्म भ्रष्टाचार विरोधी नेताओ व छद्म हिंदुवादियो के कारण मतदाताओं का झुकाव अरविन्द गांधी और आम आदमी पार्टी की तरफ बढ़ रहा है। समाधान ? कृपया अंतिम पेराग्राफ देखें।
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अरविन्द गांधी ने सोमनाथ मंदिर का दौरा कर एक सभा को सम्बोधित किया। और उन्हें मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिला।
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कुल मिलाकर भारत में भ्रष्टाचार विरोधी नागरिकों का एक बड़ा तबका है। भ्रष्टाचार विरोधी मतदाताओं ने मोदी साहेब को इस उम्मीद में वोट दिए थे कि वे उन्हें भ्रष्टाचार मुक्त शासन देंगे। मोदी साहेब हमेशा से ही भ्रष्टाचार के समर्थक रहे है और इसी कारण उन्होंने गुजरात में अपने 12 वर्ष के शासन और 52% मतों के बावजूद गुजरात के पुलिस और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के स्तर को कम करने के लिए आवश्यक कानूनों को लागू करने से मना कर दिया। लेकिन संघ के अंधसेवको और मोदी-अंधभगतो ने मतदाताओं को चकमा देने के लिए यह बहाना बनाया कि, "मोदी साहेब गुजरात पुलिस और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार को इसीलिए समाप्त नहीं कर सके क्योंकि उनके पास लोकसभा से समर्थन नहीं था" !!! हालांकि यह बेहद कमजोर बहाना था क्योंकि, 2002 से 2004 के बीच केंद्र में लोकसभा वाजपेयी चला रहे थे, और किसी समय वाजपेयी भी भ्रष्टाचार विरोधी नेता के रूप में जाने जाते थे !! लेकिन तब बीजेपी के पास लोकसभा में बहुमत नहीं था !! तो इस कारण से यह बहाना काम कर गया कि "मोदी साहेब भ्रष्टाचार विरोधी नेता है और वे गुजरात में शिक्षा और पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार के स्तर को घटाकर अमेरिका के स्तर तक इसीलिए नहीं ला पा रहे है क्योंकि बीजेपी के पास लोकसभा में बहुमत नहीं है" !!! और बाद में संघ के अंधसेवको और मोदी-अंधभगतो ने पूरे देश में यह झूठ फैलाया कि, "मोदी साहेब गुजरात में भ्रष्टाचार इसीलिए कम नहीं कर सके क्योंकि उनके पास लोकसभा में बहुमत नहीं था, अत: जैसे ही मोदी साहेब भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे वैसे ही सिर्फ 100 दिनों के भीतर भारत की पुलिस और शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार का सफाया हो जाएगा" !!!
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मोदी साहेब को पीएम बने अब तक 700 दिन बीत चुके है। अब संघ के अंधसेवक और मोदी अंध भगत नया फार्मूला निकाल लाये है। उनका कहना है कि, "चूंकि मोदी साहेब के पास राज्य सभा में बहुमत नहीं है, अत: उनके हाथ में कुछ नहीं है" !! लेकिन ज्यादातर नागिरक इस तथ्य से परिचित है कि यह लचर दलील है।
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इसी कारण भ्रष्टाचार विरोधी मतदाताओं का भरोसा मोदी साहेब से उठ चुका है।
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और इसी दौरान पेड मिडिया ने महात्मा अरविदं गांधी को उभारना शुरू किया। जबकि अरविन्द गांधी खुले आम एंटी-इण्डिया और एंटी-हिन्दू है। लेकिन साथ ही वे छद्म भ्रष्टाचार विरोधी नायक भी है !!! उनकी भ्रष्टाचार विरोधी छवि के कारण ही मतदाताओं का रुझान आम आदमी पार्टी की और बढ़ रहा है। और इस तरह महात्मा अरविदं गांधी और आम आदमी पार्टी की ताकत गुजरात में लगातार बढ़ रही है।
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आम आदमी पार्टी के उभार से देश के समय संसाधन की ठीक उसी तरह से असीमित हानि होगी जैसे कि बीजेपी/संघ/विहिप के उभार से हुयी है। आम आदमी पार्टी दिल्ली और पुरे देश में बांग्लादेशी घुसपेठियो का समर्थन कर रही है। आम आदमी पार्टी कश्मीर में धारा 370 हटाने के भी खिलाफ है, जबकि कश्मीर को भारत का अविभाज्य अंग बनाने के लिए इस धारा को समाप्त किया जाना बेहद जरुरी है। साथ ही आम पार्टी भारत में भ्रष्टाचार को काम करने और निर्माण इकाइयों की क्षमता बढ़ाने के लिये आवश्यक राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम आदि कानूनी प्रक्रियाओं का भी विरोध कर रही है। आम पार्टी सिर्फ राईट टू एजुकेशन जैसे कानूनों का समर्थन करती है, ताकि भारत की शिक्षा व्यवस्था को तबाह करने के लिए सरकारी स्कूलों को तोडा जा सके। कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी भारत में उन सभी चीजों को तबाह कर देगी जो बीजेपी और कांग्रेस के हाथो तबाह होने से बच जाएगा।
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समाधान ?
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कार्यकर्ताओ को इस बात को समझना चाहिए कि बीजेपी-कांग्रेस-आम पार्टी कभी भी भ्रष्टाचार विरोधी मतदाताओं को अपने साथ नहीं जोड़ पाएंगे। नागरिकों का ध्यान भटकाने के लिए कोई चाहे तो दिन में 100 बार 'भारत माता की जय' के नारे चिल्ला सकता है, लेकिन इससे इस सच्चाई को ढका नहीं जा सकता कि बीजेपी खुले आम "खाद्य सामग्री आपूर्ति माफिया" के साथ मिली भगत करके मुनाफा कमा रही है, और इसी कारण दालें 200 रू प्रति किलो के भाव से बिक रही है। और न ही इससे इस बात को छुपाया जा सकता है कि, आखिर क्यों इंटरनेट के अनलिमिटेड डेटा पेक के 99 रू की जगह अब 149 से 249 रू प्रति माह चुकाने पड़ रहे है। आखिर क्यों बीएसएनएल की कनेक्टिविटी अहमदाबाद जैसे शहर में भी इतनी घटिया है जितनी अमेरिका में 1930 में भी नहीं थी !!! लब्बेलुआब यह है कि भले ही भ्रष्टाचार विरोधी मतदाता सायनाइड गटक लेंगे किन्तु बीजेपी/संघ और मोदी साहेब को वोट नहीं करेंगे।
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और यह भी तय है कि भ्रष्टाचार विरोधी मतदाता कांग्रेस से इतने आजिज आये हुए है कि वे कांग्रेस को तो खैर वोट देने की सोचेंगे भी नहीं।
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लेकिन पेड मिडिया आसानी से भ्रष्टाचार विरोधी मतदाताओं को फुसला कर यह यकीं दिलवाने में कामयाब हो जायेगा कि यदि आम आदमी पार्टी गुजरात की सत्ता में आती है तो जल्दी ही गुजरात पुलिस और शिक्षा में व्याप्त भ्रष्टाचार का स्तर गिरकर अमेरिका के बराबर आ जाएगा। इसी वजह से गुजरात, गोवा और पंजाब के ज्यादातर भ्रष्टाचार विरोधी नागरिको का समर्थन आम आदमी पार्टी को मिल रहा है। (गोवा में भी मनोहर पर्रिकर ने नाइजीरिया/इस्राएली और रूसी माफिया को पनपने दिया जिससे गोवा स्थानीय निवासियों की स्थिति नारकीय हो गयी)
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समाधान ??
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भारत के कार्यकर्ताओ को विकल्प के रूप में ऐसी पार्टी के साथ काम करना चाहिए जो सच्चे अर्थो में असली-धर्म निरपेक्ष और असली भ्रष्टाचार विरोधी है। विकल्प के रूप में सिर्फ "राईट टू रिकॉल पार्टी" ही देश की एक मात्र पार्टी है जो आम आदमी पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे जहर का शमन कर सकती है।
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आम आदमी पार्टी की असलियत सामने लाने के लिए सिर्फ राइट टू रिकॉल और सिस्टम प्रक्रियाएं ही काफी है। इसके अतिरिक्त "देश के सभी भूमि अभिलेख सार्वजनिक करने और सभी भूखंडों को सिर्फ नीलामी द्वारा बेचने के प्रस्तावों से ही यह साफ़ हो जाएगा कि बीजेपी-कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक ही थैली के चट्टे बट्टे है। और इस तरह महात्मा अरविन्द गांधी और आम आदमी पार्टी का खेल खत्म हो जाएगा।
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तो राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओ को अब यह तय करना चाहिए कि --- वे बीजेपी-कांग्रेस और आम आदमी का समर्थन करना चाहते है या राइट टू रिकॉल पार्टी का। यदि राष्ट्रवादी कार्यकर्ता बीजेपी-संघ-मोदी का समर्थन करेंगे तो राइट टू रिकॉल पार्टी उभर कर देश के भ्रष्टाचार विरोधी मतदाताओं तक नहीं पहुँच पाएगी जिससे पेड मिडिया भ्रष्टाचार विरोधी मतदाताओं को आम आदमी पार्टी की और मोड़ देगी और आम आदमी पार्टी के पनपने पर अरविदं गांधी देश को तबाह कर देंगे।
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चयन आपको करना है। और आपका चयन ही देश का भविष्य निर्धारित करेगा।
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