Pawan Jury BhilwaraRj

चीन में जो छात्र महाविद्यालय में कला संकाय में प्रवेश लेना चाहते है उन्हें भी पहले गणित की परीक्षा पास करनी होती है !!!
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https://en.wikipedia.org/wiki/National_Higher_Education_Entrance_Examination
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इसके अलावा मजिस्ट्रेट समेत अन्य राजकीय सेवाओ की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में भाग लेने वाले उम्मीदवारों को भी गणित/तर्क शक्ति परीक्षाओं को पास करना होता है।
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इस तरह चीनियों की गणित समझने की क्षमता भारतीयों के मुकाबले बेहतर होगी।
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भारत में आईएएस की परीक्षाओं के उम्मीदवार सिर्फ राजनीति विज्ञान पढ़कर चुने जाते है, और उन्हें गणित के साधारण प्रश्नों को भी हल नहीं करना होता। और हमारे मजिस्ट्रेट और जज इतने बौड़म है कि उन्हें कक्षा 7 के स्तर के गणितीय सवालों को भी हल करने में दिक्कत आ जाती है। इस प्रकार चीन के अधिकारियों/जजों की गणित और तर्क शक्ति भारत के मुकाबले बेहतर होने से चीन और भारत बीच शक्ति अनुपात बिगड़ रहा है।
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अमेरिका के छात्रों का गणित/विज्ञान का औसत स्तर चीन की तुलना में कमतर हो सकता है, किन्तु अमेरिका के शीर्ष 20% की तुलना करने पर अमेरिकी छात्र चीन की तुलना में बढ़े हुए है। अमेरिका के कई वित्तीय रूप से सुदृढ़ विद्यालयों में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जिससे उनका गणित/विज्ञान का स्तर ज्यादा बेहतर है। इसके अलावा अमेरिका में बड़े पैमाने पर कुमन सिस्टम (kuman system) का प्रयोग होता है, जो कि गणित के अध्यापन के लिए सबसे बेहतर ज्ञात प्रणाली है। लेकिन अमेरिका के औसत स्कूलों के गणित/विज्ञान का स्तर चीन की तुलना में कमतर है। हालांकि अमेरिकी स्कूलों के विज्ञान/गणित का औसत स्तर भारत की तुलना में कई गुना बेहतर है।
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लेकिन ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल, मल्टी इलेक्शन और जनमत संग्रह प्रक्रियाओं के कारण अमेरिकी बाजार चीन की तुलना में ज्यादा स्वस्थ और कठोर प्रतिस्पर्धा की रचना करता है। हुनर और बाजार में टिके रहना ऐसे गुण है जो प्रतिस्पर्धा से ही अर्जित किए जा सकते है, स्कूलो में इनका विकास नहीं किया जा सकता। चूंकि अमेरिका में चीन की तुलना में ज्यादा मुक्त बाजार प्रतिस्पर्धा है, अत: तकनीक के क्षेत्र में अमेरिका चीन से बढ़ा हुआ है।
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लेकिन प्रशासनिक/पुलिस अधिकारियों, नेताओं और अदालतों में व्याप्त भ्रष्टाचार/भाई भतीजावाद के कारण भारत का बाजार अमेरिका और यहां तक कि चीन के मुकाबले भी प्रतिस्पर्धी नहीं है, तथा गणित/विज्ञान का स्तर भी बेहद कमजोर है। दूसरे शब्दों में इन दोनों आयामों के तहत भारत चीन और अमेरिका की तुलना में बेहद पिछड़ा हुआ है।
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समाधान बेहद सरल है -- राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स आदि कानूनो को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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