Pawan Jury BhilwaraRj

क्या भारत में जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू होने से कश्मीर की समस्या और भी बदतर हो सकती है ? नहीं। क्योंकि हमने सभी स्तरों पर जनमत प्रक्रियाओं के लिए प्रस्ताव किया है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रीय स्तर का जनमत संग्रह किसी राज्य के जनमत संग्रह को और राज्य स्तरीय जनमत संग्रह किसी जिले में किए गए जनमत संग्रह को रद्द कर सकता है।
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राइट टू रिकॉल पार्टी ने जनमत संग्रह के लिए जिस टीसीपी प्रक्रिया का प्रस्ताव किया है, वह कई मायनो में जनमत संग्रह की तरह ही है। इस प्रक्रिया में नागरिकों को अपन मत रखने के लिए कुछ शुल्क देना होगा, तथा नागरिक अपना अनुमोदन एसएमएस के माध्यम से भी रख सकेंगे। इस तरह टीसीपी प्रक्रिया कई मायनो में अमेरिका-यूरोप में प्रयोग की जा रही जनमत प्रक्रियाओं से बेहतर है।
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इसके अलावा टीसीपी में जनमत संग्रह के फैसलों को सरकार पर बाध्य नहीं किया गया है। (जनमत संग्रह की अन्य प्रक्रियाओं में भी यह बाध्य नहीं होता )
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पर, क्या फिर भी जनमत संग्रह की ऐसी कोई प्रक्रिया कश्मीर जैसे राज्यों की समस्या को और भी बदतर बना सकती है ? या उन जिलों में जहां बांग्लादेशी घुसपैठिए बहुमत में है ?
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नहीं
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क्योंकि राइट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित "टीसीपी" प्रक्रिया में यह प्रावधान है कि जिले के नागरिकों के फैसले को उस राज्य के नागरिक बहुमत द्वारा अप्रभावी बना सकते है, और किसी राज्य में किए गए जनमत संग्रह के फैसले को राष्ट्रीय स्तर पर जनमत संग्रह करके देश के करोड़ो नागरिकों के बहुमत द्वारा पलटा जा सकता है।
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इसलिए यदि कश्मीर के नागरिक जनमत संग्रह में भारत से अलग होने का प्रस्ताव पास करते है तो, शेष भारत के नागरिक बहुमत से इस फैसले को रद्द कर सकते है तथा यह भी निर्धारित कर सकते है कि, कश्मीर में लागू धारा 370 को रद्द किया जाए, कश्मीर हिमाचल और उत्तराखंड को मिलाकर एक राज्य की स्थापना की जाए तथा शेष भारत के नागरिकों को इस राज्य में जमीन आदि खरीदने की अनुमति मिले। इससे शेष भारत के नागरिक आसानी से कश्मीर में बस कर वहां के मतदाता बन सकेंगे, जिससे अगले चरण में वहां के नागरिकों को बंदूक रखने की छूट देने का कानून भी लागू किया जा सकेगा।
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दूसरे शब्दों में टीसीपी कश्मीर की समस्या को सिर्फ एक दिन में ही निपटा सकता है। और यह समाधान पूरी तरह से कानूनी और शांतिपूर्ण है। कश्मीर की समस्या के स्थायी समाधान के लिए यह भी जरूरी है कि रक्षा में एफडीआई पर रोक लगाते हुए हम भारत में बड़े पैमाने पर स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करें। क्योंकि पाकिस्तान और अरब कश्मीर को पाकिस्तान का अंग बनाना चाहते, जबकि अमेरिका चाहता है कि कश्मीर एक स्वतंत्र देश बने ताकि अमेरिकी सेना कश्मीर को नियंत्रण में लेकर वहां अपने सैन्य अड्डे बना सके और कश्मीरीयो का धर्मांतरण कर सके।
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इस तरह जनमत संग्रह प्रक्रिया कश्मीर की समस्या को बढ़ाने की जगह उसे हल कर देगी। इसी तरह जनमत संग्रह बांग्लादेशी घुसपेठियो की समस्या को बढ़ाएगा नहीं बल्कि उसे खत्म कर देगा।
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भारत में बीजेपी-कांग्रेस और आरएसएस 1925 से जनमत संग्रह प्रक्रियाओ का विरोध कर रहे है !!! और आम आदमी पार्टी का कहना है कि जनमत संग्रह सिर्फ गांव-तहसील-जिला और राज्य स्तर पर ही किया जाना चाहिए, राष्ट्रीय स्तर पर नहीं। आम आदमी पार्टी का यह प्रस्ताव भारत को बहुत नुकसान पहुंचाएगा।
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टीसीपी की प्रक्रिया अमेरिका-ब्रिटेन में लागू जनमत प्रक्रियाओं से कई गुना बेहतर और सस्ती है। इस प्रक्रिया में लागत लगभग शून्य है। टीसीपी की प्रक्रिया और अन्य विवरण के लिए कृपया यह नोट देखें :
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301.H.001 - सिर्फ तीन लाइन का यह प्रस्तावित क़ानून गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी आदि समस्याओं को सिर्फ चार महीनें में ख़त्म कर देगा --- https://web.facebook.com/notes/pawan-jury/828231683961736
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