Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Ashok Jain VotevapsiCm:

~राईट टू रिकॉल पार्टी ~
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सलमान खान और काला हिरण --- जय है --- दरअसल हिरण ने आत्महत्या की थी ; सलमान खान निर्दोष है -- जय है, जय है, जय है !
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फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर भी गाड़ी सलमान ने नहीं चढ़ाई थी । उन्होंने भी सुसाइड कर लिया था -- जयहै !
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एक बार फिर हाई कोर्ट जज ने घूस खाकर सलमान खान को रिहा कर दिया ; फिर से सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अन्धभगत पूरी ताक़त से गला फाड़ कर चीख़ रहे है कि, "क्या किसी रिकालिस्ट के पास जज के घूस खाने का कोई सबूत है ?" और एक बार फिर से समाधान के लिए हमारा प्रस्ताव है कि, भारत में १) राइट टू रिकॉल जज, २) जयूरी सिस्टम और ३) सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट लिए जाने का क़ानून लागू किया जाए । और एक बार फिर से सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगत यह कहेंगे कि, "भारत के नागरिक ऊज्जड़ और मूर्ख है अतः उन्हें जजों को नौकरी से निकालने और मुक़दमों की सुनवाई कर फ़ैसला देने का अधिकार नही दिया जाना चाहिए । और जहाँ तक नार्को टेस्ट का प्रश्न है, ये टेस्ट मानवाधिकार के ख़िलाफ़ है" !! और इसी तरह और इसी तरह के बहाने ।
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जब जज नशे में धुत्त गाड़ी चलाते हुए सलमान को इंसानों को कुचल देने के मामले में रिहा कर सकते है तो हिरण की तो फिर हैसियत ही क्या है । इसीलिए हमें हिरण को श्रद्धांजली देने के लिए और भी ऊँचे स्वर में जयकारे लगाने चाहिए -- "जय जय जय, जय है" !!!
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बहरहाल हास्य, व्यंग्य को एक तरफ़ रख कर इस विषय के गम्भीर पक्ष पर ध्यान दीजिए ।
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राइट टू रिकॉल ग्रुप के कार्यकर्ता पिछले १७ वर्षों से कह रहे है कि, "हमारी अदालतो के ९०% जज भ्रष्ट है, और इनकी मुश्के कसने के लिए हमें राइट टू रिकॉल जज एवं ज्यूरी प्रक्रियाओं की आवश्यकता है" । तथा जघन्य अपराधों में आरोपियों का सार्वजनिक रूप से नार्को टेस्ट लिया जाना चाहिए । मामलों की गंभीरता के अनुसार १५ से १५०० नागरिकों की जूरी बुलायी जानी चाहिए और सलमान खान जैसे रसूख़दार लोगों के मुक़दमों के निपटान के लिए पूरे देश से १५००-१५०० नागरिकों की दो ज्यूरी का गठन किया जाना चाहिए । इन नागरिकों का चयन मतदाता सूचियों से अक्रमत: विधि से किया जाए, और ये जूरी ही मुक़दमे का फ़ैसला दे । साथ ही नशे में गाड़ी चलाते हुए किए गए अपराधो में अनिवार्य रूप से आरोपी का सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाए ।
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और पिछले १७ सालों से सोनिया-मोदी-केजरीवाल राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, नार्को टेस्ट का पूरी शक्ति से विरोध कर रहे है । (१९९० में मोदी साहेब की भूमिका वाजपेयी निभा रहे थे और केजरीवाल की जगह हमारे पास सैंकड़ों एनजीओ थे ) सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अंध भगतो और कोंग्रेस, बीजेपी, आप, संघ और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के सभी कार्यकर्ता भी सदा से राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम के विरोधी रहे है । पिछले ५००० सालों से ये लोग यही बहाना डोगरा रहे है कि ----
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१) क्या तुम्हारे पास कोई सबूत है कि, भारत के जज रिश्वत ख़ोर है ?
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२) चूँकि भारतीय नागरिक गवाँर और मूर्ख है अतः जनता के पास राइट टू रिकॉल, ज्यूरी प्रक्रियाएँ नही होनी चाहिए । साथ ही नार्को टेस्ट से आरोपियों के मनवाधिकारों का हनन होता है ।
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३) न्यायपालिकाओ को दुरुस्त करने और जजों के भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए सिर्फ़ सोनिया-मोदी-केजरीवाल जैसे सारे शक्तिमान नेताओं को चुन लेना काफ़ी है । इसके लिए राइट टू रिकॉल, ज्यूरी जैसी प्रक्रियाओं को लागू करने की कोई ज़रूरत नही । बताइए !!
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इसी तर्ज़ पर २०१३ से २०१४ के बीच मोदी साहेब के अंध भगत और संघ के अंध सेवक पूरे देश को यह कह कर भ्रमित करते रहे कि, न्यायपालिका में सुधार के लिए कोई राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम क़ानूनो की ज़रूरत नही है । एक बार मोदी साहेब पीएम बन गए तो इस काम को वे सिर्फ़ १०० दिनो में निपटा देंगे । और अब ७०० दिन बीत जाने पर उनके पास १०० तरह के बहाने है !!! जैसे -- मोदी साहेब के पास राज्य सभा में बहुमत नही है, उनके पास दोनो सदनो में दो तिहाई बहुमत नही है आदि आदि ।
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हालाँकि, एफ़डीआई और सिर्फ़ एफ़डीआई के कारण मोदी साहेब २०१९ में फिर से पीएम के लिए चुन लिए जाएँगे । उन्हें अग्रिम बधाई । लेकिन न्यायपालिका में संस्थागत भ्रष्टाचार कई गुना बढ़ जाएगा । इतने पर भी सोनिया-मोदी-केजरीवाल अगले १०० वर्षों तक सोनी सदनो में १००% बहुमत के साथ शासन करते रहेंगे किन्तु वे भारत की अदालतो का स्तर सुधारने के लिए आवश्यक कानूनो को कभी भी लागू नही करेंगे ।
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समाधान ?
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मैं देश के सभी कार्यकर्ताओं से इस तथ्य पर ध्यान देने का आग्रह करूँगा कि, सोनिया-मोदी-केजरीवाल की रूचि न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद के समाधान में बिलकुल भी नही है । इसलिए न्यायपालिका में सुधार के इच्छुक कार्यकर्ताओं को सोनिया-मोदी-केजरीवाल के अन्ध्भक्तो और बीजेपी-कोंग्रेस-आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं से किनारा कर लेना चाहिए ।
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कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे न्यायपालिका सुधार के लिए देश के नागरिकों को राइट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, नार्को टेस्ट आदि क़ानूनी ड्राफ़्ट्स के बारे में सूचित करे । इन क़ानूनो के प्रस्तावित ड्राफ़्ट्स देखने के लिए कृपया मेरी फ़ेसबुक प्रोफ़ाईल के कवर पेज को क्लिक करके दिए गए लिंक में दर्ज ड्राफ़्ट्स का अध्ययन करें । यदि आप इन कानूनो का समर्थन करते है तो कृपया अपने सांसद को sms द्वारा आदेश भेजे कि, अमुक कानूनो को गेजेट में प्रकाशित किया जाए । सांसद को भेजे जाने वाले sms का नमूना उल्लेखित लिंक में दर्ज किया गया है । और एक बार फिर से मैं दोहराऊँगा कि यदि आपकी रूचि समाधान में है तो सोनिया-मोदी-केजरीवाल का समर्थन करने की जगह कृपया राइट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ काम करें ।
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