Pawan Jury BhilwaraRj

"राइट टू रिकॉल आंदोलन" का लक्ष्य :

देश में व्याप्त समस्याओं जैसे गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार आदि समस्याओं को हल करने के लिए आवष्यक राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी आदि कानूनों को देश में लागू करवाना, ताकि भारत की सेना को अमेरिका की सेना के बराबर ताकतवर बनाया जा सके।
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लक्ष्य हासिल करने के चरण :

1) देश के कार्यकर्ताओ तक यह जानकारी पहुंचाना कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए उन्हें आवष्यक कानून ड्राफ्ट्स पर विचार विमर्श करना चाहिए। देश को कानून चलाते है। अच्छे कानून अच्छा और बुरे कानून बुरा देश बनाते है। बेहतर कानून ड्राफ्ट्स आने से ही समस्याओ का समाधान किया जा सकता है।
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2) देश के 2 से 5 लाख कार्यकर्ताओ को समाधान के ड्राफ्ट पढ़ने के लिए तैयार करना, ताकि वे 70 करोड़ नागरिकों तक इन कानून ड्राफ्ट्स की जानकारी पहुंचा सके।
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3) सभी राजनीतिक पार्टियों और राजनैतिक गतिविधियाँ करने वाले समूहों को समस्या के समाधान के ड्राफ्ट्स देने के लिए बाध्य करना।
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4) उन राजनैतिक व्यक्तियों का विरोध करना जो समाधान के कानून ड्राफ्ट की चर्चा की जानबूझकर अवहेलना करके दार्शनिक, नैतिक, सैद्धांतिक और उपदेशात्मक समाधान सुझा कर कार्यकर्ताओ का समय और ऊर्जा नष्ट करते है।
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5) देश के 70 करोड़ नागरिकों को तैयार करना ताकि वे अपने सांसदों को एसएमएस द्वारा आवश्यक कानून ड्राफ्ट्स को गैजेट में छापने का आदेश भेजे।
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6) बहुमत द्वारा मांग किए जाने के बावजूद अगर पीएम अमुक कानून ड्राफ्ट्स को गैजेट में प्रकाशित करने से इंकार करे तो 'अहिंसा मूर्ति महात्मा उधम सिंह जी' को पीएम से मिलने की विनती करना।
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मोटे तौर पर यही योजना है। बारीक योजना बनाने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओ की है। इन बिंदुओं को आदर्श मानते हुए कोई भी कार्यकर्ता स्वतंत्र रूप से अपनी विस्तृत योजना बनाकर लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्य कर सकता है।
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