Pawan Jury BhilwaraRj

"एक महोदय आये और बोले विदेशी वस्तुएं सस्ती और बेहतर हैं औए स्वदेशी खरीदने से वे महंगी और घटिया क्वालिटी की आती हैं. जिससे उनका नुक्सान होता हैं . उनका नुक्सान यानि देश के हर इंसान का नुक्सान यानि पुरे देश का नुक्सान तो विदेशी वस्तुएं ही लेनी चाहिये"।
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जवाब
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यह बात ठीक है की यदि किसी व्यक्ति को विदेशी वस्तु कम दामों में मिले और उसकी गुणवत्ता भी स्वदेशी से बेहतर हो तो व्यक्ति अपने लाभ हानि पर ही विचार करेगा। वह स्वदेशी विदेशी के चक्कर में पड़कर घटिया क्वालिटी की वस्तु नहीं लेगा। तो मेरा कहना है कि हमें अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तु ही लेनी चाहिए। लेकिन हमें साथ ही उन कानूनों को लागू करने के लिए भी प्रयास करना चाहिए जिससे भारत सस्ती और अधिक गुणवत्ता वाली स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन कर सके। क्योंकि विदेशी वस्तुओं की खरीद करने से हम पर विदेशी मुद्रा चुकाने का भार बढ़ता जाएगा और एक दिन हम दिवालिये होकर सिर्फ विदेशी कम्पनियों पर ही निर्भर रह जाएंगे। और जब ऐसा होगा तो हमें इन्ही वस्तुओं के दोगुने दाम चुकाने होंगे।
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विदेशी वस्तुएं ज्यादा बेहतर इसीलिए है क्योंकि उनके पास भारत की तुलना में बेहतर निर्माण प्रौद्योगिकी और स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा है। वे ये प्रौद्योगिकी इसीलिए जुटा सके क्योंकि उनके देश में निर्माण इकाइयों को सरंक्षण देने वाले कानून लागू है। इसीलिए हमें भारत में भी ऐसे कानूनों को लागू करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे भारत में स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा बने और हम भी निर्माण प्रौद्योगिकी जुटा सके।
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ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स, टीसीपी, राइट टू रिकॉल आदि कानूनों के आने से भारत में स्वतंत्र प्रतिस्पर्धा पनपेगी, निर्माण इकाइयां लगाना सस्ता हो जाएगा और हम विदेशीयों से बेहतर वस्तुएं बनाने में सक्षम हो जाएंगे।
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किन्तु भारत भर में 'स्वदेशी अपनाओ' का नारा बुलंद करने वाले ज्यादातर स्वदेशी कार्यकर्ता समूह यह बात जानते है कि, इन कानूनों के आने से भारतीय कम्पनियां विदेशीयों से ज्यादा बेहतर वस्तुओं का उत्पादन करने लगेगी जिससे नागरिक स्वत: ही स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करने लगेंगे, और विदेशी कम्पनियां बाजार से बाहर हो जाएगी। और यदि ऐसा हुआ तो फिर वे 'स्वदेशी अपनाओ' के प्रचार अभियान कहां चलाएंगे !!
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अत: मेरे विचार में "सच्चे स्वदेशी कार्यकर्ताओ" को चाहिए कि वे नागरिकों को स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की प्रेरणा देने के अलावा उन कानूनों का भी नागरिकों में प्रचार करें जिससे भारत की स्वदेशी इकाइयां विदेशी कम्पनियो के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर सके।
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