Pawan Jury BhilwaraRj
नागरिको द्वारा सूचना आयुक्त को बदलने की प्रक्रिया - राईट टू रिकाल सूचना आयुक्त
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भारत के नागरिकों,
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मौजूदा आरटीआई एक्ट में यह कमी है कि सूचना आयुक्त को नौकरी से निकालने का अधिकार भारत के नागरिकों के पास नहीं है। इससे सूचना आयुक्त नागरिकों को महत्त्वपूर्ण गोपनीय सूचनाऍ देने से इंकार कर देता है। यदि नागरिकों के पास सूचना आयुक्त को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया होगी तो सूचना आयुक्त सत्ताधारी नेताओं के हितो को नजरअंदाज करके नागरिकों के हितों के लिए काम करेगा। प्रस्तुत स्तम्भ में इस तरह की प्रस्तावित प्रक्रिया दी गयी है जिसका प्रयोग करके नागरिक किसी भी दिन सूचना आयुक्त को बदल सकेंगे। इस प्रस्तावित प्रक्रिया की धाराओं को मौजूदा एक्ट में जोड़े जाने से यह प्रक्रिया लागू हो जाएगी।
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यदि आप इस प्रक्रिया का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि इस प्रक्रिया को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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सांसद को भेजे जाने वाले एसएमएस का नमूना
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माननीय सांसद, मैं आपको आदेश करता हूँ कि, इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए --- https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/968954216556148
मतदाता संख्या : ######
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सांसद महोदय ,
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अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है न कि जिसने ये लेख लिखा है।
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राईट टू रिकॉल सूचना आयुक्त के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया :
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=====ड्राफ्ट का प्रारम्भ====
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1. [ सभी के लिए ]
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इस कानून में नागरिक शब्द का अर्थ है पंजीकृत मतदाता I यह पद्धति सूचना आयुक्त के केवल एक सदस्य पर लागू होगी, तथा इसे "नागरिको द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्त" कहा जाएगा I प्रारम्भ में इस अधिकारी की नियुक्ती सूचना आयुक्त चयन समिति द्वारा की जाएगी I इस कानून में "कर सकता है" का आशय है "कर सकता है, या करने की जरुरत नहीं है", अर्थात यह किसी प्रकार से बाध्यकारी नहीं है।
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2. [ कलेक्टर के लिए निर्देश ]
यदि कोई भारतीय नागरिक जिसकी आयु 40 वर्ष से अधिक हो और वह सूचना आयुक्त सीमिति में "नागरिकों द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्त" बनने की इच्छा रखता हो तो वह जिला कलेक्टर के कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर उम्मीदवारी के लिए शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर धनराशि लेकर इस शपथपत्र को स्वीकार करके रसीद देगा, तथा इस शपथपत्र को सीरियल नंबर देकर सूचना आयोग की वेबसाइट पर रखेगा। उम्मीदवार को कोई भी चुनाव चिन्ह नहीं दिया जाएगा।
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3. [ तलाटी या पटवारी या लेखपाल के लिए निर्देश ]
यदि किसी जिले का कोई नागरिक मतदाता पटवार कार्यालय में उपस्थित होकर 3 रुपये का शुल्क देता है, और किन्ही 5 व्यक्तियों को अपनी पसंद के क्रम में "नागरिको द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्त" के लिए अनुमोदित करता है तो पटवारी उसके अनुमोदन को कम्पुटर पर दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी रसीद में अनुमोदन का समय, दिनांक और अनुमोदित उम्मीदवारों का विवरण भी दर्ज करेगा। बीपीएल कार्ड धारीयों के लिए यह शुल्क 1 रू होगा I
(3.1) कलेक्टर यदि चाहे तो हाँ/ना की पुष्टि के लिए एसएमएस द्वारा फीडबेक देने का सिस्टम बना सकता है।
(3.2 ) प्रधानमंत्री चाहे तो नागरिकों के अनुमोदनों को ATM या SMS द्वारा दर्ज करने का सिस्टम बना सकते है।
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4. [ पटवारी के लिए निर्देश ]
पटवारी सूचना आयोग की वेबसाइट पर नागरिको की मतदाता संख्या के साथ अनुमोदनो के विवरण रखेगा।
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5. [ पटवारी को निर्देश ]
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सूचना आयुक्त चयन सीमिति 10 सूचना आयुक्तो की नियुक्त करेगी और ऊपर दिए हुए प्रावधान के अनुसार 10 में से किसी एक आयुक्त को नागरिकों द्वारा बदला जा सकेगा I और इसी प्रक्रिया के तहत नागरिक "ना" रजिस्टर करके किसी आयुक्त को "रिजेक्ट" भी कर सकेंगे।
6. [ मुख्य सूचना आयुक्त के लिए निर्देश ]
प्रत्येक महीने की 5 वीं तारीख को सूचना आयुक्त अध्यक्ष पिछले महीने के आखरी दिन तक के अनुमोदनो को सूचना आयोग की वेबसाइट पर जारी करेगा I
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7. [ सूचना आयुक्त चयन समिति के लिए निर्देश ]
यदि किसी उम्मीदवार को 24 करोड से अधिक अनुमोदन मिले है, और अनुमोदनों की यह संख्या वर्तमान "नागरिकों द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्त" के अनुमोदनो से एक करोड़ ज्यादा है ,तब सूचना आयुक्त चयन समिति वर्तमान "नागरिकों द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्त" को त्यागपत्र देने के लिए कह सकती है, और सबसे अधिक अनुमोदन प्राप्त उम्मीदवार को "नागरिकों द्वारा नियुक्त सूचना आयुक्त" के पद पर नियुक्त कर सकती है I सूचना आयुक्त चयन समिति 24 करोड की सीमा रेखा को 12 करोड और 37 करोड के बीच घटा या बढ़ा सकती है। लेकिन यह सीमा 37 करोड़ से अधिक नहीं हो सकेगी।
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8. [ राईट टू रिटेन या सूचना आयुक्त को बनाए रखने का अधिकार ]
नागरिक इस प्रक्रिया का प्रयोग किसी "नागरिको द्वारा रखे गए सूचना आयुक्त" को बनाये रखने के लिए या ऐसे आयुक्त को फिर से वापस लाने के लिए भी प्रयुक्त कर सकते है, जिसे निकाल दिया गया हो। अतः यह धारा "सूचना आयुक्त को बनाये रखने का अधिकार" या राईट टू रिटेन के लिए भी निर्दिष्ट है।
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9. [ कलेक्टर के लिए निर्देश ]
यदि कोई नागरिक मतदाता इस कानून में बदलाव करना चाहता है तो वे इस सम्बन्ध में शपथपत्र जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा कर सकेगा। जिला कलेक्टर या उसका क्लर्क इस शपथपत्र को 20 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर सूचना आयोग की वेबसाइट पर रखेगा।
10 [ तलाटी या पटवारी के लिए निर्देश ]
यदि कोई नागरिक मतदाता इस कानून या इसकी किसी धारा पर अपना विरोध दर्ज करवाना चाहे या ऊपर दी गयी धारा के तहत जमा किये हुए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ/ना दर्ज करवाना चाहे तो वह तलाटी के कार्यालय में उपस्थित होकर 3 रू शुल्क देगा। तलाटी नागरिक की हाँ/ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ सूचना आयोग की वेबसाइट पर दर्ज करेगा और बदले में उसे रसीद देगा |
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=====ड्राफ्ट का समापन ====
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