Pawan Jury BhilwaraRj

आरटीआई एक्ट में आवेदन को पारदर्शी बनाने के लिए जोड़ी जाने वाली प्रस्तावित प्रक्रिया का कानूनी ड्राफ्ट :
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भारत के नागरिकों,
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मौजूदा सूचना के अधिकार में यह कमी है कि आवेदन कर्ता का आवेदन पारदर्शी नहीं रहता। अत: उसके द्वारा मांगी गई सूचना से प्रभावित होने वाले पक्ष द्वारा उसे धमकाने व आवेदन वापिस लेने के लिए दबाव बनाना आसान हो जाता है। इसके अलावा कई जानकारियां ऐसी होती है, जिनके बारे में लाखों या करोडो नागरिक जानना चाहते है। लेकिन मौजूदा कानून में किसी सूचना के आवेदन पर नागरिको को अपनी सहमति व्यक्त करने की कोई प्रक्रिया नहीं दी गयी है। इससे एक ही प्रकार की सूचना प्राप्त करने के लिए सभी नागरिकों को अलग अलग आवेदन करने पड़ते है, जिससे समय, श्रम और पैसे की अतिरिक्त हानि होती है।
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उदाहरण के लिए मान लीजिए कि पूरे देश में 1 करोड़ नागरिक चाहते है कि 1947 में ब्रिटिश और भारत सरकार के बीच किए गए "सत्ता हस्तांतरण समझौते" को सूचना के अधिकार के तहत सार्वजनिक किया जाए। तो मौजूदा कानून के अनुसार देश भर के 1 करोड़ नागरिकों को अलग अलग आवेदन करना होगा। तब भी इस बात का कभी पता नहीं चलेगा कि अमुक सूचना के लिए कितने लोगो ने आवेदन किया है।
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हमारे द्वारा प्रस्तावित प्रक्रिया के आने से कोई भी नागरिक मांगी गयी सूचना का आवेदन कलेक्टर कार्यालय में जाकर जमा कर सकेगा। कलेक्टर इस आवेदन को सूचना आयोग की वेबसाइट पर रखेगा। साथ ही देश का कोई भी नागरिक यदि इस आवेदन का समर्थन करता है तो वह पटवारी के कार्यालय में जाकर इस आवेदन पर अपनी "हाँ" दर्ज कर सकेगा। इस प्रकार आवेदन पारदर्शी रूप से किए जा सकेंगे तथा अन्य नागरिक भी अमुक आवेदन पर अपनी सहमति व्यक्त कर सकेंगे।
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यदि आप इस प्रक्रिया का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि इस प्रक्रिया को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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सांसद को भेजे जाने वाले एसएमएस का नमूना
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माननीय सांसद, मैं आपको आदेश करता हूँ कि, इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए --- https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/968950456556524
मतदाता संख्या : ######
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सांसद महोदय ,
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अगर आपको एस.एम.एस. के द्वारा यू.आर.एल. मिला है तो उसे वोटर का आदेश माना जाये जिसने यह मैसेज भेजा है न कि जिसने ये लेख लिखा है।
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सूचना का अधिकार के मौजूदा अधिनियम में जोड़े जाने वाली प्रस्तावित प्रक्रिया :
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=====ड्राफ्ट का प्रारम्भ=====

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1. [ जिला कलेक्टर के लिए निर्देश ]

कोई भी महिला मतदाता, दलित मतदाता, वरिष्ठ नागरिक मतदाता, गरीब मतदाता, किसान मतदाता या कोई भी नागरिक मतदाता यदि जिला कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर सूचना के अधिकार का कोई शपथपत्र प्रस्तुत करता है, तो कलेक्टर उस शपथपत्र को 20 रूपये प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर दर्ज करेगा और सीरियल नंबर के साथ एक रसीद जारी करेगा। तथा कलेक्टर इस शपथपत्र को स्कैन करके शपथपत्र प्रस्तुतकर्ता की मतदाता संख्या के साथ सूचना आयोग की वेबसाइट पर रखेगा, ताकि कोई भी नागरिक इस अर्जी को बिना लॉग इन के देख सके।
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2. [ पटवारी या तलाटी के लिए निर्देश ]
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(2.1) कोई महिला मतदाता, दलित मतदाता, वरिष्ठ नागरिक मतदाता, गरीब मतदाता, किसान मतदाता या कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 के तहत प्रस्तुत किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी 'हाँ' या 'ना' दर्ज कराने के लिए मतदाता पहचान पत्र के साथ पटवारी कार्यालय में आता है, तो पटवारी 3 रुपये का शुल्क लेकर कंप्यूटर में मतदाता की हाँ/ना को उसकी मतदाता पहचान संख्या के साथ दर्ज करेगा, तथा मतदाता को इसकी एक रसीद देगा। पटवारी नागरिक की हाँ/ना को उसकी मतदाता संख्या के साथ सूचना आयोग की वेबसाइट पर भी रखेगा।
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(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी 'हाँ' या 'ना' तीन रुपये का शुल्क देकर बदल सकेगा।
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(2.3) बीपीएल कार्ड धारक के लिए देय शुल्क 1 रू होगा।
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(2.4) कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकेगा जिससे मतदाता द्वारा दर्ज की गयी हाँ/ना की पुष्टि का एस.एम.एस उसके रजिस्टर्ड मोबाइल पर भेजा जा सके।
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(2.5) प्रधानमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकेंगे जिससे मतदाता अपनी हाँ/ना 50 पैसे का शुल्क देकर एटीएम द्वारा दर्ज करवा सके।
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(2.6) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है, जिससे मतदाता अपनी हाँ/ना 5 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके।
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3. [ सभी के लिए निर्देश ]
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(3.1) यदि "एक निश्चित संख्या" तक मतदाता किसी सूचना के आवेदन पर 'हाँ' दर्ज के देते है तो सूचना आयुक्त अमुक शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकत है या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है। इस सम्बन्ध में सूचना आयुक्त का निर्णय अंतिम होगा।
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(3.2) कार्यवाही के लिए "निश्चित संख्या" तय करने का अधिकार सूचना आयुक्त को होगा, तथा सूचना आवेदनों के विवरण के प्रतिवेदन सूचना आयोग के अवलोकन के लिए रखें जाएंगे।
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(3.3) यदि किसी सूचना के आवेदन पर "एक निश्चित संख्या" तक नागरिक अपनी 'हाँ' दर्ज कर देते है तो सूचना आयुक्त अमुक सूचना को सार्वजनिक रूप से अपनी वेबसाइट पर रखेगा, तथा नागरिकों द्वारा मांगे जाने पर इनकी प्रतियां विधिवत शुल्क लेकर प्रदान करेगा।
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=====ड्राफ्ट की समाप्ति====