Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब ने शहर एवं विकास मंत्रालय को ऐसा कानून लागू करने का आदेश दिया है जो बिल्डर्स को बाध्य करेगा कि वे अपने फ्लेट्स सभी धर्मावलम्बियों को विक्रय के लिए उपलब्ध रखें। मोदि साहेब के सभी अंध भगत और संघ का प्रत्येक अंध सेवक इस फैसले का समर्थन कर रहा है !!! लेकिन "राईट टू रिकॉल पार्टी" इस फैलसे का विरोध करती है।
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सही या गलत, जो भी कारण रहे हो, लेकिन अहमदाबाद में, गुजरात में और पूरे देश में बिल्डर्स कई मुस्लिम बहुल इलाको में ऐसे प्रोजेक्ट चलाते है जिनमे हिन्दुओ को फ्लेट नहीं दिए जाते, औेर साथ ही हिन्दूओ के लिए बनाये गए प्रोजेक्ट भी होते है जिनमे मुस्लिमो को फ्लेट नहीं दिए जाते। जैसा कि नजर आ रहा है, यदि मोदी साहेब पल्टे नहीं तो वे संसद में इस तरह का प्रस्ताव रखने वाले है, जिससे बिल्डर्स सभी धर्मावलम्बियों को फ्लेट्स देने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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कृपया पेड इन्डियन एक्सप्रेस द्वारा प्रकाशित यह खबर पढ़े :
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http://goo.gl/BytP1d
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हालात को और भी बदतर बनाने के लिए मोदी साहेब ने विवाद की दशाओ में सुनवाई और फैसले का अधिकार ज्यूरी की जगह जजों को दे दिया है !!! चूंकि मोदी साहेब अपने लड़कपन से ही ज्यूरी सिस्टम के विरोधी रहे है, अत: उन्होंने रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल में ज्यूरी प्रक्रियाओं को शामिल करने से मना कर दिया। साथ ही उन्होंने इन जजों और नियामकों को चुनने और नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिकों को देने से भी इंकार कर दिया है !!! उन्होंने ये फैसला भी इसीलिए लिया क्योंकि वे छुटपन से ही राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं के मुखर विरोधी रहे है और संघ 1925 व् बीजेपी भी 1952 से ही राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं का विरोध कर रही है !! इस तरह से भ्रष्ट जज और नियामक यह फैसला करेंगे कि विवाद की दशाओं में किसी सोसाइटी में धर्म, जाति या अन्य किसी भेदभाव के आधार पर फ्लेट दिया जाना चाहिए या नहीं !!!
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"राईट टू रिकॉल पार्टी" इस प्रस्ताव का विरोध करती है। किसी व्यक्ति को किसी भी आधार पर सार्वजनिक स्थलों में भेदभाव करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, लेकिन घर सार्वजनिक नहीं बल्कि निजी संपत्ति है। किसी घर में किसे प्रवेश दिया जाना चाहिए और किसे नहीं इसका फैसला गृह स्वामी पर ही छोड़ दिया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति को जन्म से तय होने वाले विभेद जैसे कि -- जातीय आधार, पर भेदभाव की इजाजत नहीं दी जा सकती, किन्तु धर्म के साथ ऐसा नहीं है। धर्म जन्म आधारित नहीं है, यह पसंद और चयन का मामला है, और यही खान पान की आदतों पर भी लागू होता है। इसी तरह से अपार्टमेंट्स भी किसी भी तरीके से सार्वजनिक स्थल नहीं है -- यह "संयुक्त स्वामित्व" के तहत निर्मित स्थल है। इसीलिए एक निजी स्थल में कौन प्रवेश करेगा और कौन नहीं करेगा इसका फैसला करने का पूरा हक़ अमुक स्थल के स्वामियों को है। साथ ही यदि भेदभाव का कोई मामला आता है तो इसका फैसला नागरिकों की ज्यूरी द्वारा किया जाना चाहिए न कि जजों या नियामकों द्वारा। यदि मैं ज्यूरी मंडल में रहता हूँ तो मेरा मत यही रहेगा कि गृह स्वामियों को इस बारे में फैसला करना चाहिए कि वे आहार या धर्म के आधार पर किसे प्रवेश देना चाहते है और किसे नहीं।
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बिल्डर्स को सभी धर्मावलम्बियों को फ्लेट्स बेचने को बाध्य करने वाला मोदी साहेब का यह फैसला गृह स्वामियों के अधिकारों का हनन करता है। उदाहरण के लिए कई व्यक्ति 100% शाकाहरी पड़ौसी चाहते है, लेकिन अब वे मांसाहारी को पड़ौस में रखने के लिए बाध्य हो जाएंगे। इससे अपनी सुविधा का घर जुटाने की लागत बढ़ जायेगी।
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"राइट टू रिकॉल पार्टी" मोदी साहेब के इस प्रस्ताव का विरोध करती है। मोदी साहेब का प्रत्येक अंध भगत और संघ का प्रत्येक अंध सेवक मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता तो इस फैसले से इतने खुश है जैसे उनकी मन मांगी मुराद पूरी हो गयी हो। कांग्रेस के मंत्री इस क़ानून को 2013 से ही लागू करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। मोदी साहेब इसमें सफल होते दिख रहे है। अत: बीजेपी-कांग्रेस-आम पार्टी आदि सभी इस मुद्दे पर एक मत है।
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"राईट टू रिकॉल पार्टी" द्वारा प्रस्तावित समाधान :
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मेरा सभी कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे "राईट टू रिकॉल पार्टी" द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, एमआरसीएम, टीसीपी आदि कानूनों को देश में लागू करवाने का प्रयास करें, ताकि इस प्रकार के भेदभाव के मामलो की सुनवाई नागरिकों की ज्यूरी करें, न कि भ्रष्ट जज। साथ ही मेरा आग्रह है कि बीजेपी-कांग्रेस-आम पार्टी का पीछा छोड़ दे और राईट टू रिकॉल पार्टी के एजेंडे पर कार्य करे। क्योंकि देश में एक मात्र "राईट टू रिकॉल पार्टी" ही है जिसके पास देश में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आवश्यक क़ानून है। इन नेताओ से आपको बुरे कानूनों और अच्छे भाषणों के सिवा कुछ भी हासिल नहीं होगा।
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[ राईट टू रिकॉल पार्टी ]
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