Pawan Jury BhilwaraRj
किस तरह महादुरात्मा गांधी की तरह ही संघ के सरसंघ संचालक परम पूज्य हेडगेवार जी ने भी नागरिकों को हथियार विहीन रहने के लिए प्रेरित किया, और नतीजे में विभाजन के दौरान हुए दंगो में 20 लाख हिन्दुओ को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
.
"भारतीय त्योहारों की प्रथा में मनाये जाने वाले उत्सव दशहरे पर संघ भी शस्त्रों की सांकेतिक पूजा किया करता था। एक दफा ऐसा हुआ कि पंजाब का एक कारोबारी बहुत ही अच्छी तरह से डिजाइन किये हुए खंजर और तलवारे बेचने के लिए वर्धा आया। एक स्थानीय स्वयंसेवक ने सोचा कि हमें पूजा में कम से कम एक तो असली खंजर तो रखना ही चाहिए। उसने खंजर का दाम पूछा और खरीदने की अनुमति लेने के लिए बड़े ही उत्साह में संघ संचालक के घर पहुंचा। दैवयोग से डॉ हेडगेवार भी वही पर बैठे थे और उनकी उपस्थिति में ही इस विषय पर विचार विमर्श शुरू हो गया। डॉक्टर साहेब ने प्रश्न उठाया - 'जबकि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में बेहतर हथियार और युद्ध सामग्री थी आखिर क्यों फिर भी हमारा देश गुलाम हो गया' ? डॉक्टर साहेब ने बोलना जारी रखा और खुद ही जवाब दिया कि, 'आप इस परिस्थिति का किसी भी कोण से आकलन करे, आपको जवाब एक ही मिलेगा कि, हमें हर व्यक्ति के दिल को मातृभूमि के प्रति समर्पण से ओतप्रोत करने की जरूरत है। जब देश इस भावना से सुरभित हो जाएगा तो हमें हथियारों की कोई आवश्यकता नहीं रहेगी और बिना एक पल भी गवाएं हम विदेशी सत्ता से आजाद हो जाएंगे'। उन्होंने आगे यह भी जोड़ा कि, 'जब पांडव अज्ञातवास में थे तो उन्होंने अपने शस्त्रों को शमी वृक्ष में छुपा दिया था। इसीलिए हमें हथियारों की चिंता नहीं करनी चाहिए। हमें एकाग्रचित्त होकर अपने आंदोलन को देश भर में फैलाने और अपने संगठन को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए"
.
संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 46, Publisher : RSS, लिंक -- http://goo.gl/LA1RSC
.
बताइये !!!
.
======
.
परम पूज्य हेडगेवार जी ने स्वयंसेवक को यह नहीं बताया कि जंग में निर्णायक बढ़त सिर्फ हथियारों से ही मिलती है। जिस पक्ष के पास जितने बेहतर हथियार होंगे जीतने की सम्भावना भी उतनी ही बढ़ जायेगी। 1857 में सैनिक विद्रोह इसीलिए असफल रहा क्योंकि भारतीय सैनिकों के पास हथियार खत्म हो गए थे। और तब भारत को बन्दुके और कारतूस बनाने नहीं आते थे। मुग़ल भी भारत पर इसीलिए कब्ज़ा कर पाये क्योंकि उनके पास बेहतर तोपखाना था। सिर्फ 80 हजार अंग्रेज 40 करोड़ भारतीयों को इसीलिए गुलाम बनाकर रख पाये क्योंकि जहां अंग्र्जो के पास बन्दुके थी पर भारतीयों के पास तलवारे आदि सामान्य अस्त्र भी नहीं थे।
.
1857 की क्रान्ति के बाद अंग्रेज घबरा गए थे और अगले सशस्त्र विद्रोह की सम्भावना को ख़त्म करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने 1860 में आर्म्स एक्ट बनाया और सभी भारतीयों के हथियार खींच लिए। लोग चोरी चुपके फिर से हथियार न जुटा ले इसके लिए वायसराय का काम महादुरात्मा गांधी ने सम्भाल लिया था। वे पूरे देश में घूम घूम कर लोगो को यह समझा रहे थे की 'चाकू, तलवार, बन्दुके आदि रखना अच्छी बात नहीं है'। महादुरात्मा गांधी का मानना था कि हथियार सिर्फ अंग्रेजो को ही रखने चाहिए भारतीयों को नहीं। और अंग्रेजो को तो अवश्य ही रखने चाहिए।
.
हेडगेवार भी युवाओं को हथियार न रखने का यह सन्देश अपने तरीके से दे रहे थे। इस प्रकार भारतीयों को हथियार विहीन बनाये रखने की नीति पर वायसराय के अलावा महादुरात्मा गांधी और हेडगेवार जी भी काम कर रहे थे। जो नागरिक इन उपदेशों की लपेट में आ गए वे हथियार विहीन रहे और विभाजन के दौरान 20 लाख हिन्दुओ को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। लेकिन सिक्खो और मुस्लिम धर्मावलम्बियों ने 'जागने जगाने और संघठित' होने के साथ ही हथियार रखने को भी तवज्जो दी और इसीलिए 1947 के दंगो के दौरान उन्हें अपेक्षाकृत कम जन हानि हुयी।
.
ज्ञातव्य है कि सिक्खो ने 'कृपाण दा मोर्चा' आन्दोलन करके अंग्रेजो पर दबाव बनाकर तलवार रखने का अधिकार ले लिया था। बाद में सभी वर्गों के लोगो को इसकी अनुमति दे दी गयी। धार्मिक रीति होने के कारण जो सिक्ख 'सोये' हुए थे मतलब जागे हुए नहीं थे वे भी अपने साथ हथियार रखते थे जबकि उल जलूल सिद्धांतो के चक्कर में आकर 'जागे हुए' हिन्दू भी हथियार विहीन थे या लाठियां लेकर घूम रहे थे।
.
इसी कारण से राष्ट्रपिता अहिंसा मूर्ती महात्मा सुभाष चन्द्र बोस ने हेडगेवार जी का संघ में कार्य करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया था। वे बात तो टेढ़े तरीके से समझने के आदि नहीं थे। वे इस सीधी बात को समझते थे कि अंग्रेजो के पास हथियार है और भारतीय हथियार विहीन है, इसीलिए इन्हे खदड़ने के लिए हमें अंग्रेजो से ज्यादा सशस्त्र ताकत जुटानी होगी। महात्मा भगत सिंह जी, महात्मा चन्द्रशेखर आजाद, उधम सिंह ही आदि भी इसी बात में मानते थे। लेकिन संघ का शीर्ष नेतृत्व इन्हे न जाने क्यों भटके हुए नौजवान और अंध राष्ट्रवादी कहता था और युवाओं को इन क्रांतिकारियों का अनुसरण न करने के लिए प्रेरित करता था।
.
असल में अमेरिका और ब्रिटेन दुनिया के ताकतवर देश इसीलिए नहीं है कि वे 'जागे हुए और संगठित' है, बल्कि इसीलिए है क्योंकि उनके पास ज्यादा बेहतर और आधुनिक स्वदेशी हथियारो का जखीरा है। और हथियार बनाने की यह तकनीक वे इसीलिए जुटा पाये क्योंकि उनके पास प्रशासन को चलाने के लिए राईट टू रिकॉल और ज्यूरी सिस्टम जैसी बेहतर क़ानून प्रक्रियाएं है। यह हथियारों का ही अंतर था कि जापान के 'जागे हुए देशभक्त' लोगो को अमेरिका ने दो परमाणु बम फेंक कर हमेशा के लिए सुला दिया है।
.
कुल मिलाकर देश में ताकत उसकी सेना से आती है, और सेना बेहतर हथियारों से मजबूत होती है। और यह हथियार स्वदेशी होने चाहिए न कि आयातित। वरना युद्ध के समय देश को हथियार निर्यातक देश के निर्देशों का पालन करना होता है। तब भारत सेना कमजोर थी और नागरिकों के पास हथियार नहीं थे इसीलिए हम गुलाम बने और विभाजन के दौरान लाखों हिन्दुओ के गले काट दिए गए।
.
आज भी स्थिति बदली नहीं है। न तो भारत की सेना मजबूत है और न ही नागरिकों के पास सुरक्षा के लिए हथियार है। और आज भी संघ राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम तथा अन्य उन सभी कानूनों का विरोध कर रहा है जिससे भारत के नागरिकों को हथियार बंद किया जा सके और सेना को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक स्वदेशी हथियारों का उत्पादन किया जा सके।
.
======
.
समाधान ?
.
संघ के स्वयंसेवकों को अपने संगठन के पदाधिकारियों पर यह दबाव बनाना चाहिए कि संघ का शीर्ष नेतृत्व भारत की सेना को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कानूनों के ड्राफ्ट प्रस्तुत करे ताकि कार्यकर्ता सरकार पर दबाव बनाकर उन कानूनों को लागू करवा सके। यदि संघ ऐसे किसी भी क़ानून के ड्राफ्ट देने से इंकार करता है तो स्वंयसेवको चाहिए कि वे राइट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित क़ानून संघ के पदाधिकारियों को उपलब्ध करवाए तथा इनका समर्थन करने को कहे। यदि तब भी संघ का शीर्ष नेतृत्व देश की स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने तथा सेना को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट नहीं देता है तो देशहित में उन्हें संघ से किनारा कर लेना चाहिए और कानूनों ड्राफ्ट्स का नागरिकों में प्रचार करना चाहिए।
.
इस बात को सभी कार्यकर्ताओ को समझ लेना चाहिए कि भारत की सेना आयातित हथियारों पर निर्भर है व भारत के नागरिक भी हथियार विहीन है। भारत चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनो से घिरा हुआ है। यदि जल्दी ही हमने स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करके भारत की सेना जो 'आत्मनिर्भर' नहीं बनाया तो जब चीन हम पर हमला करेगा या पाकिस्तान को हमला करने के लिए हथियार देगा तो भारत को मदद लेने के लिए अमेरिका के सामने घुटने टेकने पड़ेंगे और हम अमेरिका के गुलाम बन जाएंगे। क्योंकि अमेरिका हमारा रिश्तेदार नहीं है। अत: मदद मुफ्त नहीं आएगी। हमें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
.
भारत की सेना को अमेरिका के बराबर ताकतवर बनाने के लिए राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कानून ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखें जा सकते है --- https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112
.
________________________