Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
"करो का संग्रहण तथा उनका नागरिकों में बंटवारा" बनाम राईट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कराधान प्रणाली।
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कई ऐसे प्रस्ताव सामने आ रहे है जिनका कहना है कि, 'अमीरों पर टैक्स लगाओ और इस पैसे का बंटवारा नागरिकों में करो"। राईट टू रिकॉल ग्रुप में 'मैं' इस प्रकार के प्रस्ताव का विरोध करता हूँ। हमने गरीबी कम करने के लिये निम्नलिखित कानूनी ड्राफ्ट्स प्रस्तावित किये है -- एमआरसीएम, वेल्थ टैक्स, जमीनों के लेनदेन में खुली बोली का प्रयोग, आयकर को सुसंगत बनाना और वैट/एक्साइज/जीएसटी आदि करो का निष्कासन।
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अन्य समूहों द्वारा बताये जा रहे कुछ प्रस्ताव इस प्रकार है :
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1. धूर्त थॉमस पिकेटी -- यह आदमी वेल्थ टैक्स और इससे प्राप्त कर राशि को नागरिकों में बांटने की वकालत कर रहा है। लेकिन जैसा कि सभी विख्यात अर्थशास्त्री किसी भी प्रकार की कोई क़ानूनी प्रक्रिया न देने के लिए जाने जाते है पिकेटी ने भी अपने प्रस्ताव के बारे में कोई कानूनी विवरण प्रस्तुत नहीं किया है। और सबसे बड़ी बात यह कि धूर्त थॉमस पिकेटी गैर सरकारी संगठनों और ट्रस्टों पर वेल्थ टैक्स लगाने का विरोध कर रहा है !!! कहने की जरुरत नहीं कि रोकोफेलर-रोथ्स्चाइल्ड आदि पिकेटी के फार्मूले में अपने ट्रस्टों पर शून्य वेल्थ टैक्स चुकाएंगे !!! इसीलिए रोकोफेलर-रोथ्स्चाइल्ड ने अपने मिडिया को यह आदेश दिया है कि पिकेटी के प्रस्तावों को प्रेस में पर्याप्त जगह दी जाए।
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2. 'आर्थिक न्याय' कहना है कि -- लगभग 50 करोड़ की सीमा निर्धारित करते हुए सभी संपत्तियों पर वेल्थ टैक्स लगाया जाए, तथा वेल्थ टैक्स की दर ब्याज दरों के बराबर या उससे आधी हो। और कर से प्राप्त इस राशि का बंटवारा भारत के सभी नागरिकों में बराबर कर दिया जाए। इनके प्रस्ताव में आयकर, वैट, जीएसटी, एक्साइज आदि करो को हटाने की या बेहद कम किये जाने की वकालत की गयी है। अधिक जानकारी के लिए कृपया 'अमीरी रेखा', 'रोशन लाल अग्रवाल अमीरी रेखा', 'आर्थिक न्याय', 'भारत गांधी' आदि पर गूगल करें।
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3. तीसरा प्रस्ताव है कि -- पेट्रोल/डीजल/कैरोसिन/गैस आदि पर प्रति लीटर 100 रू तथा कोयले पर 20 रू प्रति किलो की दर से टैक्स लगाया जाए। और इससे संग्रहीत राशि का वितरण नागरिकों को बराबर कर दिया जाए। साथ ही आयकर, वैट, जीएसटी, एक्साइज आदि करो को हटाया जाए या बेहद कम कर दिया जाए।
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4. बिंदु (1), (2) और (3) का मिश्रण।
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अब मैं "करो का संग्रहण तथा उनका नागरिकों में बंटवारा" के इन प्रस्तावों की तुलना राईट टू रिकॉल के प्रस्तावों से करूंगा।
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हमारे क़ानून ड्राफ्ट्स में भी नागरिकों में पैसे का वितरण करने का प्रस्ताव किया गया है। लेकिन यह राशि सिर्फ खनन रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी, जल संसाधन रॉयल्टी, सरकारी भूखंडों से प्राप्त किराए आदि से आएगी और इसी धन का बँटवारा नागरिकों में समान रूप से किया जाएगा।
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साथ ही हमारा प्रस्ताव है कि, वेल्थ टैक्स और आयकर जारी रहेगें तथा एक्साइज/वैट/जीएसटी आदि करो को ख़त्म कर दिया जाएगा। आयकर, संपत्ति कर आदि द्वारा संगृहीत राशि का उपयोग सेना, अदालतें, पुलिस आदि के संचालन करने में तथा हथियार बंद नागरिक समाज की रचना और गणित-विज्ञान की शिक्षा को मजबूत बनाने में किया जाएगा। हमने करो का वितरण नागरिकों में करने का कोई प्रस्ताव नहीं किया है। परन्तु हमारे द्वारा प्रस्तावित वेल्थ टैक्स में सभी गैर सरकारी संगठनों और ट्र्स्टो को भी कर के दायरे में रखा गया है।
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राईट टू रिकॉल ग्रुप का प्रस्ताव है कि, कस्टम ड्यूटी से प्राप्त धनराशि का 33% हिस्सा सभी नागरिकों में बराबर वितरित किया जाएगा। लेकिन यह टैक्स नहीं है। क्योंकि कस्टम ड्यूटी का सम्बन्ध आयात को हतोत्साहित करने से है न की सरकारी आय से। इसके अलावा आयकर और वेल्थ टैक्स से प्राप्त धनराशि का 1% हिस्सा नागरिकों में इस आधार से वितरित किया जा सकता है, कि वे कर संग्राहक को चुनने और हटाने के लिए राईट टू रिकॉल वित्त मंत्री कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रहे है। लेकिन तब भी यह करो का उस तरह से नागरिकों में बंटवारा नहीं है जिन प्रस्तावों में करों से प्राप्त भारी धनराशि का वितरण नागरिकों में करने के सुझाव दिए जा रहे है।
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