Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
सुब्रह्मनियम स्वामी का नया नाटक - रघुराम गज़नी के साथ नूरा कुश्ती। जानिये, कि कैसे स्वामी नाटक कर के रघुराम गजनी के एजेंडे को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे है।
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सुब्रह्मनियम स्वामी ने 1997-1998 के दौरान वाजपेयी सरकार को गिराने के कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया और सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया किन्तु इसमें उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली !!! और स्वामी वाजपेयी के इसीलिए खिलाफ हो गए थे क्योंकि वाजपेयी ने भारत के परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए पोकरण-२ किया था और बीमा, मिडिया समेत कई क्षेत्रो में एफडीआई को अनुमति देने से इंकार कर दिया था। अमेरिका को वाजपेयी की यह नीति बिलकुल भी पसंद नहीं आयी और इसीलिए अमेरिका के शुभचिंतक सुब्रह्मनियम स्वामी ने वाजपेयी सरकार को अमेरिका के हक़ में गिराने की कसम खायी !!! असल में स्वामी ने जब से होश सम्भाला तब से ही वे बतौर अमेरिकी कार्यकर्ता काम कर रहे है !!!
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बाद में कुछ 5 कार्यकर्ताओ ने सोनिया गांधी के इस दावे के खिलाफ कि, उनके पास केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कॉलिज डिग्री है, कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। तब सुब्रह्मनियम स्वामी इन कार्यकर्ताओ के मुद्दे को हाइजेक करने के लिए फिर से सामने आये और शूर्पणखां घांडी के डिग्री के बारे में पेश किये गए झूठे शपथपत्र के मुकदमे में 'मुख्य वादी' बन गए। अदालत में यह साबित भी हो गया कि शूर्पणखां घांडी ने अपनी डिग्री के बारे में झूठ बोला था। और जब शूर्पणखां घांडी सुप्रीम कोर्ट में दोषी पायी गयी तो स्वामी ने अंत में जज से क्या कहा ?
सुब्रह्मनियम स्वामी ने दृढ़ और सपाट लहजे में कहा कि, 'माय लार्ड, मैं अपना मुकदमा वापिस लेता हूँ' !! तो इस प्रकार जब मुख्य वादी मुकदमा वापिस ले लेता है तो मामले ही खत्म हो जाता है !! दूसरे शब्दों में, एन मौके पर सुब्रह्मनियम स्वामी एकदम से सोनिया गांधी के तारणहार बन कर उभरे !!!
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2G स्पेक्ट्रम घोटाले में स्वामी फिर से निकलकर आये और उन्होंने इस मामले के मुख्य वादियों का मुकदमा हाइजेक कर लिया। नतीजा ? यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना लेकिन इसकी हवा निकालने के लिए एन मौके पर सुब्रह्मनियम स्वामी दूर संचार मंत्री ए. राजा का सार्वजनिक नार्को टेस्ट करने का विरोध करने लगे जिससे मामला सुट्ट् हो गया परिणामस्वरूप सोनिया समेत सारे आरोपी इस मामले से बरी हो जाएंगे !!! सोनिया को इस मामले से लाभ यह हुआ कि टेलीकॉम मिनिस्ट्री डीएमके से खिंचकर कांग्रेस के पास आ गयी !!!
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दूसरे शब्दों में, सुब्रह्मनियम स्वामी मलका ए नौटंकी है। ये आदमी खुद को भ्र्ष्टाचार और भारत विरोधी तत्वों के मुकाबले में खुद को खड़ा करता है और इस तरह का भरम खड़ा करता है जीससे यह लगे कि वाकयी यह आदमी देश हित के लिए लड़ रहा है। लेकिन वास्तव में सुब्रह्मणियम स्वामी ये नाटक इसीलिए रचते है ताकी अमेरिकी हितों और बड़े बघियारो की रक्षा की जा सके।
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और अब सुब्रह्मनियम स्वामी का नया नाटक देखिये --- वे जनता को इस भ्रम में डालने की कोशिश कर रहे है कि वे महमूद ग़ज़नवी के 23 वें वंशज रघुराम गजनी के खिलाफ है !!!
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जैसा कि सभी सुधि जन जानते है कि रघुराम राजन महमूद ग़जनी के 23 वे वंशज है और इसीलिए वे 1050 में गजनी द्वारा छोड़ा गया काम पूरा करने में लगे हुए है। मुराद मंदिरों का सोना खींचकर आरबीआई/एसबीआई की तिजौरी में पहुंचाने से है जहां से ये सोना रिपेट्रिशिएसन क्राइसिस आने पर रोथ्स्चाइल्ड की तिजौरी में चला जाएगा। और सुब्रह्मनियम स्वामी रघुराम गजनी की इस नीति का समर्थन कर रहे है। मतलब स्वामी ठीक वही कर रहे है जिस काम करने में रघुराम गजनी 2013 से लगे हुए है।
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जब रघुराम गजनी ने 'मंदिरों का सोना लूट कर उन्हें बॉन्ड थमाओ' योजना शुरू की थी तो हम राईट टू रिकॉल ग्रुप के कार्यकर्ताओ ने देश के सभी मतदाताओं से अपने सांसद को एसएमएस द्वारा यह आदेश भेजने के लिए आग्रह किया था कि रघुराम गजनी को नौकरी से निकाल जाए और उसका सार्वजनिक नार्को टेस्ट लिया जाए, ताकि यह साबित हो सके कि रघुराम राजन महमूद गज़नी का 23वां वंशज है।
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और आप जानते है तब सुब्रह्मनियम स्वामी ने क्या किया ? इस आदमी ने रघुराम गजनी को नौकरी से निकालने के लिए नागरिकों से सांसदों को एसएमएस भेजने की अपील करने से साफ़ इंकार कर दिया !!
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फिर सुब्रह्मनियम स्वामी ने गजनी को नौकरी से निकालने के लिए क्या किया ? क्या उन्होंने राज्य सभा में 'राईट टू रिकॉल रिजर्व बैंक गवर्नर' का क़ानून ड्राफ्ट रखा ताकि भारत के मतदाता रघुराम गजनी को बहुमत का प्रयोग करके नौकरी से निकाल सके ? नहीं। सुब्रह्मनियम स्वामी ने राज्य सभा में राईट टू रिकॉल रिजर्व बैंक गवर्नर' का क़ानून ड्राफ्ट रखने से साफ़ इंकार कर दिया !!!
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रघुराम गजनी को पद से हटाने के लिए स्वामी ने जो कुछ किया है वह यह है कि -- उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है !!
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तो क्या ये उचित होगा, यदि रघुराम गज़नी को नौकरी से निकाल दिया जाए लेकिन 'मंदिर लूटो योजना' जारी रहे ? असल में सुब्रह्मणियम स्वामी की योजना गजनी को नौकरी से निकालने की है, लेकिन उनका कहना है कि मंदिरों का सोना लूटने की स्किम जारी रहनी चाहिए !!
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कुल मिलाकर रघुराम गजनी से नूरा कुश्ती स्वामी द्वारा किया जा रहा एक और नया नाटक है। नाटक के सिवाय कुछ नहीं।
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ये सब तो ठीक है, पर स्वामी भ्र्ष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए जाने जाते है, तो अब चूंकि वे राज्य सभा में सांसद है तो यह पुछा जाना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट आदि में व्याप्त भ्र्ष्टाचार और भाई भतीजा वाद को रोकने के लिए उन्होंने कितने क़ानून सदन में प्रस्तुत किये है ? अंडा !! मंत्रियो, सांसदो, विधायको, पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों आदि में व्याप्त भ्र्ष्टाचार को रोकने के लिए उन्होंने कितने क़ानून प्रस्तावित किये है ? अंडा !! सुब्रह्मनियम स्वामी हमेशा से ही कहते आये है कि 'आयकर को ख़त्म कर दिया जाना चाहिए' , अच्छी बात है, पर क्या सुब्रह्मनियम स्वामी ने राज्य सभा में आयकर को निरस्त करने के लिए कोई कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तुत किया है ? नहीं, बिलकुल नहीं !!!! दूसरे शब्दों में सुब्रह्मनियम स्वामी एक भकर है, जिनकी आस्था बकवाद में है क्रियान्वयन में नहीं। इसीलिए सुब्रह्मनियम स्वामी द्वारा दिए गए सभी एलान सिर्फ माहौल बनाकर कार्यकर्ताओ को अपने साथ चिपकाते है और फिर शून्य में खो जाते है। वे उनके क्रियान्वयन की कभी परवाह नहीं करते, और न ही उनकी ऐसी नीयत होती है। इस तरह से डायलॉग देने का उनका हुनर काफी अच्छा है -- पेशेवर अभिनेताओं से भी अच्छा।
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सार रूप में मैं कार्यकर्ताओ से आग्रह करूंगा कि यदि वे देश की व्यवस्था में सकारात्मक सुधार लाना चाहते है तो राइट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित एमआरसीएम, वेल्थ टैक्स, राईट टू रिकॉल, टीसीपी, ज्यूरी सिस्टम आदि क़ानूनो का प्रचार करे और सुब्र्ह्मणियम स्वामी जैसे पेशेवर नटो के पीछे अपना समय बर्बाद न करे। औेर यदि फिर भी आपको डॉयलॉग बाजी में रस मिलता हो तो बॉलीवुड की और रूख करे, वहाँ आपको और भी ज्यादा सनसनीखेज डायलॉग सुनने को मिलेंगे।
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