Pawan Jury BhilwaraRj

"कारगिल युद्ध में अमेरिका ने भारत को मदद देने से मना कर दिया था" -- पेड दैनिक भास्कर
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खबर इस लिंक पर देखें -- http://goo.gl/pU7wXo
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पेड भास्कर अपने पाठको को 17 साल बाद यह बात बता रहा है। वो भी अधूरी। राईट टू रिकॉल ग्रुप यह जानकारी भारत के नागरिकों तक पहुंचाने की कोशिश 1999 से ही कर रहा है। जिस पूरी बात को पेड भास्कर छुपा रहा है वह यह है कि --

"अमेरिका ने ही भारत का सेटेलाइट बंद करवाया था*, पाकिस्तान को कारगिल की चोटियों पर चढ़ने के लिए हाई एल्टीट्यूड हेलिकॉप्टर्स दिए थे, और युद्ध के दौरान भारत को लेजर गाइडेड बम देने से मना कर दिया था"
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(*) कैसे अमेरिका ने भारत का सेटेलाइट बंद करवाया था ?

अमेरिका ने भारत के आला प्रशासनिक अधिकारियों को घूस देकर कारगिल के क्षेत्र में निगरानी करने वाले इसरो के सेटेलाइट को बंद करवा दिया। इसरो सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करता है, और उस समय पीएम वाजपेयी थे। वाजपेयी इतने दुष्ट नहीं थे कि ऐसी हरकत करें। लेकिन उनके प्रधान सचिव बृजेश मिश्र ( कंधार मामले को हैंडल करने वाले ) पर यह शुबहा किया जा सकता है। यदि हमारा सेटेलाइट बंद नहीं किया जाता तो निश्चित ही पाकिस्तान की गतिविधियों को भारत घुसपैठ के दौरान ही पकड़ लेता और हमें कारगिल नहीं झेलना पड़ता।
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और अमेरिका ने ऐसा इसीलिए किया था क्योंकि भारत द्वारा किये गए पोकरण-2 से अमेरिका नाराज था। अमेरिका आज भी तब तक ही भारत से खुश रहेगा जब तक हम भारत के सैन्य और रक्षा प्रतिष्ठानों को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर निर्भर बनाये रखें। मोदी साहेब के मेक इन इण्डिया से अमेरिका इसीलिए खुश है। आज भी भारत की फ़ौज आयातित हथियारों पर निर्भर है और एक जीपीएस सिस्टम बना लेने से हम रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं हो जाने वाले है।
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तो हमें यह बात समझने की जरुरत है कि भारत-अमेरिकी सम्बन्धो का मैच फिक्स है और मोदी साहेब अमेरिका की तरफ से बैटिंग कर रहे है। लेकिन अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा संचालित पेड मिडिया इसे इस तरह से पेश करता है जैसे वे भारत की नीतियों पर काम कर रहे हो। यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि कांग्रेस और केजरीवाल भी एफडीआई के घोर समर्थक है, अत: इनके सत्ता में आने से भी परिस्थिति जस की तस रहेगी।
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समाधान ?
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अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के पास ताकत उनकी सेना से आती है। सेना को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक हथियारों की जरुरत होती है। उत्कृष्ट हथियारो के निर्माण के लिए निर्माण प्रौद्योगिकी के विकास का बुनियादी ढांचा बेहतर होना चाहिए। और अमेरिका में राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स आदि क़ानून प्रक्रियाएं होने से उनकी स्वदेशी इकाइयां तकनीक के क्षेत्र में ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर पाती है।
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समाधान के लिए हमारा प्रस्ताव है कि कार्यकर्ताओ को भारत में ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स आदि क़ानून प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए प्रयास करने चाहिए। कानूनों के आने से हमारी स्वदेशी इकाईयां तकनिकी तौर पर ज्यादा बेहतर होकर उभरेगी और हम स्वदेशी हथियारों के निर्माण में सक्षम हो जायेगे।
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यदि आप देश में बेहतर स्वदेशी हथियारों को बढ़ावा देने वाले कानूनों का समर्थन करते है तो निचे दिए गए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट के लिंक को क्लिक करके इसे पढ़ें और इसके कमेंट बॉक्स में 'I support' लिखकर अपना समर्थन दर्शाएं। साथ ही अपने सांसद को एसएमएस द्वारा यह आदेश भेजे कि इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। ड्राफ्ट का लिंक --- https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/548862728625259
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