Pawan Jury BhilwaraRj

संविधान में कुछ भी लिखा हो फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि जज वही पढ़कर सुनाएंगे जो वे सुनाना चाहते है।
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संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने।
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मोदी साहेब ने कहा कि 'संविधान के अनुसार' रावत सरकार को बर्खास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए !
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हाईकोर्ट ने कहा कि 'संविधान के अनुसार' राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता, अत: रावत मुख्यमंत्री बने रहेंगे !!
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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि, 'संविधान के अनुसार' राष्ट्रपति शासन जारी रहेगा !!!
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The constitution, on this hypothesis, is a mere thing of wax in the hands of the judiciary, which they may twist, and shape into any form they please. -- Thomas Jefferson, 1819 (2nd president of USA)
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संविधान की परिकल्पना न्यायधीशों के हाथ में रखे हुए सिर्फ एक मोम के टुकड़े की तरह है, जिसे उनके द्वारा तोड़ मरोड़ कर इच्छित आकार में प्रस्तुत किया जा सकता है -- थॉमस जेफरसन, 1819, अमेरिका के द्वितीय राष्ट्रपति
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समाधान ?
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१) सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायधीशों को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिकों के पास होना चाहिए, ताकि न्यायधीशों पर नागरिकों का अंकुश रहे और वे संविधान को अपनी इच्छानुरूप तोड़ मरोड़ न सके।
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२) संविधान की व्याख्या का अधिकार नागरिकों की ज्यूरी के पास होना चाहिए। मतदाता सूचियों में से अक्रमत विधि से नागरिकों की ज्यूरी का चयन किया जाए तथा नागरिकों की इस ज्यूरी के पास संविधान का अर्थ करने की शक्ति हो।
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इन दोनों प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए आवश्यक क़ानून ड्राफ्ट्स देखने के लिए यह लिंक देखें :

ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617

राइट-टू-रिकॉल जिला प्रधान जज के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/826540930797478
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यदि आप इन कानूनी ड्राफ्ट्स का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि इन कानूनों को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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