Pawan Jury BhilwaraRj

चिंटू - मास्टर जी, 70 सेकंड का यह वीडियो देखिये --- https://web.facebook.com/pawan.jury/posts/929796963805207
मास्टर जी - क्या है इस वीडियो में ?
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चिंटू - कुछ ज्वेलर्स जेटली से मिलने गए थे, एक्साइज ड्यूटी कैंसिल करवाने के लिए। पहले तो जेटली महीना भर में तो उनसे मिलने को राजी हुए, और जब मिले भी तो खड़े खड़े टरका किया। खुद बैठे हुए चाय की चुस्कियां लेते रहे पर न तो उन्हें बैठने को जगह दी न ही चाय के लिए पुछा।
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मास्टर जी - तो इसमें नई बात क्या है ?
चिंटू - अरे, ऐसे कैसे ? कोई ऐसे पेश आता है क्या ? उनसे वो ऐसे व्यवहार कर रहे है जैसे वो कोई खैरात मांगने के लिए आये हो।
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मास्टर जी - तो तू क्या चाहता है उनसे हाथ जोड़ कर बात करें !! गनीमत है कि जेटली जी शिष्ट व्यक्ति है अत: इनके जूत नहीं लगाए। अन्य कोई नेता होता तो टाइम खराब करने के एवज में इन्हें पिटवाता भी था।
चिंटू - क्यों हाथ क्यों नहीं जोड़ेगा ? तो बताओ ये ही जेटली जब अमृतसर में चुनाव प्रचार कर रहा था तो लोगो के पैरो में क्यों लोट रहा था ?
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मास्टर जी - तमीज से बात कर। वित्त मंत्री है। जेटली साहेब बोला कर।
चिंटू - हाँ तो ठीक है। ये जेटली साहेब चुनाव प्रचार में इन्ही लोगो के सामने हाथ जोड़ते क्यों घूम रहे थे ?
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मास्टर जी - तब वोट लेने थे। इसीलिए हाथ जोड़ रहे थे। अब क्या है ? सरकार बन चुकी। अब भी हाथ ही जोडते रहेंगे क्या ?
चिंटू - गलत बात है। काम निकल गया तो तेवर बदल गए। वापिस चुनाव नहीं लड़ना क्या इन्हें ? अबकी हारेंगे।
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मास्टर जी - पहले ही हारे हुए है। पर घाघ आदमी है। राज्य सभा से घुस गए सरकार में। फिर से इसी तरह घुस आएंगे।
चिंटू - मोदी साहेब को कुछ करना चाहिए इसका।
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मास्टर जी - शेर का भाई बघेरा, वो कूदे 9 तो वो कूदे 13 ... मोदी साहेब ने ही घुसाया है इन्हे सरकार में।
चिंटू - क्यों ? जब जनता ने हरा दिया तो फिर मोदी साहेब ने इन्हे क्यों घुसाया ?
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मास्टर जी - मोदी साहेब के हिसाब से अमृतसर के लोग निकम्मे और बेवकूफ है। पर जेटली काम के आदमी है।
चिंटू - बहुत अच्छी बात है। अब ?
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मास्टर जी - अब क्या ? कुछ नी। 2019 तक हाथ बांध कर खड़े रहो। चुनाव में नेता फिर से एक दिन के लिए हाथ जोड़ने आएंगे। जो हार जाएंगे वे अगले 5 साल तक भी जनता के हाथ जोड़ेंगे और जो चुन लिए जाएंगे उनके सामने जनता फिर से 5 साल तक हाथ जोड़ कर खड़ी रहेगी।
चिंटू - कोई ऐसा तरीका है कि जीतने वाले नेता भी अगले 5 साल तक जनता से वैसे ही पेश आये जैसे कि चुनाव के दिन पेश आते है ?
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मास्टर जी - अच्छा बता, नेता चुनाव के दिन जनता के हाथ क्यों जोड़ते है ?
चिंटू - वोट लेने के लिए।
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मास्टर जी - तो बस जनता को अपना वोट वापिस खींच लेने का अधिकार दे दो। ये लोग हमेशा तमीज से पेश आने लगेंगे।
चिंटू - पर वोट वापिस कैसे खींचेंगे, वोट तो दे चुके है ?
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मास्टर जी - जैसे वोट दिया है वैसे ही अपना वोट वापिस खींच लेंगे। जैसे बटन दबा कर वोट दिया, बस वैसे ही बटन दबा कर वापिस ले लिया।
चिंटू - ऐं, कुछ भी !! ऐसा व्यवहारिक है ?
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मास्टर जी - क्यों व्यवहारिक नहीं है। बिलकुल व्यवहारिक है। बस एक क़ानून पास करना पड़ेगा। और हो जाएगा। अमेरिका में वहां के नागरिकों के पास अपने प्रतिनिधियों को नौकरी से निकालने यानी रिकॉल करने की प्रक्रिया है। बस इसी तरह की प्रक्रिया भारत में लागू करनी होगी। तब नागरिक 5 साल का इन्तजार किए बिना अपने प्रतिनिधियों को रिकॉल कर सकेंगे।
चिंटू - भारत में ये प्रक्रिया कैसे आएगी ?
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मास्टर जी - राइट टू रिकॉल कानूनों को गैजेट में प्रकाशित करना होगा। और यह कहने की बात नहीं है कि नेता लोग ऐसे किसी भी क़ानून को गैजेट में नहीं छापेंगे जिससे भारत के नागरिकों को उन्हें नौकरी से निकालने का अधिकार मिल जाए। इसीलिए भारत के नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों पर इन कानूनों को लागू करने के लिए दबाव बनाना होगा।
चिंटू - ओके।
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मास्टर जी - क्या ओके ?
चिंटू - या तो राइट टू रिकॉल क़ानून लाने के लिए दबाव बनाओ या 5 साल तक इनके आगे हाथ बांध कर खड़े रहो।
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मास्टर जी - हाँ, बस यही बात है। राईट टू रिकॉल क़ानून ड्राफ्ट्स के लिंक यहां से मिल जाएंगे --- https://web.facebook.com/notes/809761655808739
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