Pawan Jury BhilwaraRj

अलगाव
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कुछ महीने भर पहले तक ज्यादातर (लगभग 80%) लोग 'भारत माता की जय' बोलने पर सहमत थे या उन्हें 'भारत माता की जय' बोलने में कोई आपत्ति नहीं थी तथा शेष (20%) लोगो का भी यह स्टेण्ड नहीं था कि 'हम भारत माता की जय नहीं बोलेंगे'। तथा बहुधा लोग अनायास ही यह नारा लगाते थे।
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तब यदि भारत में लगभग 30% नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनैतिक समूह के नेता अचानक इस प्रकार के बयान देते है कि -- 'तुम्हें भारत माता की जय बोलना पड़ेगा', 'तुम नहीं बोलोगे तो हम तुम्हें सिखाएंगे', 'जो भारत माता की जय नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए' या 'भारत माता की जय नहीं बोलने वाले गद्दार है' आदि आदि।
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तो अन्य प्रतिद्वंदी राजनैतिक दलों, उनके समर्थकों और ऐसी घोषणा करने वाली पार्टी की विचारधारा से असहमत किन्तु राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओ/नागरिकों की क्या प्रतिक्रिया होगी ?

स्वाभाविक रूप से उनमे से कुछ कहेंगे कि, 'हम भारत माता की जय तुम्हारे कहने से नहीं बोलेंगे', और शायद उनमे से कुछ यह भी कह देंगे कि 'अब हम भारत माता की जय नहीं कहेंगे'। फिर जब आप कहेंगे कि यदि तुम भारत माता की जय नहीं बोलोगे तो तुम गद्दार हो, तो वे स्वाभाविक रूप से कहेंगे कि हमें देशभक्ति का प्रमाणपत्र आपसे नहीं चाहिए। उनमे से कुछ तब भारत माता की जय बोलने की जगह 'जय हिन्द' या 'वन्दे मातरम्' का उद्घोष करेंगे। ताकि वे आपके अनुगामी नजर नहीं आये।
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मामला भारत माता की जय बोलने का नहीं है। मामला यह है कि कोई राजनैतिक समूह 'देश की एकता से सम्बंधित' नारे या कवित्त या सूक्ति को अपनी विचारधारा बनाकर प्रस्तुत करता है, यहां तक तो ठीक है, लेकिन फिर वह इस पर एकाधिकार बनाने के लिए नागरिकों को अमुक नारा लगाने के लिए ललकारता है या धमकाता है तो, नतीजे में देश को एकता में पिरोने वाले किसी उद्घोष का राजनैतिक करण हो जाता है और शेष 70% में से कुछ या ज्यादा लोग यह उद्घोष करने से इंकार कर देते है, और इससे दूर छिटक जाते है।
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यदि किसी राजनैतिक दल की देश के महिमा गान से सम्बंधित और पहले से प्रचलित किसी नारे में आस्था है तो बेशक उन्हें ऐसा नारा लगाना चाहिए। जब आप इसे बार बार दोहराएंगे तो स्वत: ही अमुक दल की पहचान ऐसे नारे से बन जायेगी और अमुक पार्टी के अलावा अन्य दलों के नेता/कार्यकर्ता/नागरिक भी अनायास इसका अनुसरण करेंगे। लेकिन धमकाने या ललकारने से यह खतरा है कि ऐसा उद्घोष प्रतिद्वंदी समूहो द्वारा स्वभाविक मतभेदों के चलते खारिज कर दिया जाएगा।
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उदाहरण के लिए हो सकता है कि किन्ही व्यक्तियों को 'जय भीम' कहने से इंकार न हो लेकिन यदि माया मेडम उन्हें ललकारे कि 'तुम्हे जय भीम कहना पड़ेगा', तो स्वाभाविक रूप से मुलायम या बीजेपी समर्थक जय भीम कहने से इंकार कर देंगे। तब मायावती यह कह सकती है कि तुम दलित विरोधी हो। और इस तरह मायावती का वोट बैंक तो बढ़ेगा परन्तु जय भीम कहने वालो की संख्या घट जायेगी।
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तो शायद बीजेपी के नेता जानते थे कि 'भारत माता की जय' बोलने के लिए ललकारने से इस उद्घोष को करने वाले नागरिकों की संख्या घटेगी। या ये भी हो सकता है कि वे यह बात नहीं जानते हो।
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पर कुल मिलाकर बीजेपी ने इस मुद्दे को खूब हवा दी और पूरे भारत में तथा विश्व में भी यह माहौल खड़ा किया कि भारत ऐसे लोगो से भरा पड़ा है जो भारत माता की जय बोलने के अनिच्छुक है। और बीजेपी ने जाने अनजाने ऐसे लोगो की संख्या और भी बढ़ा दी है।
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किसी मुद्दे को इस तरह से उठाया जाए कि उससे समुदाय में टूटन हो खेमे बन जाए तो यह अलगाववाद है। राजनीति में अपना वोट बैंक बनाने के लिए इस निति का अनिवार्य रूप से पालन किया जाता है, और सभी पार्टिया वोट बटोरने के लिए ऐसा करती है। लेकिन देश की एकता से जुड़े हुए मामलो में अलगाववादी निति का आश्रय नहीं लिया जाना चाहिए।
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