Pawan Jury BhilwaraRj
वोट वापिस लेने का अधिकार 'नहीं' होने का खामियाजा
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2012 में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से 5-6 लाख बेहद निम्न वर्गीय लोग अपने परिवार समेत सैकड़ो किलोमीटर की दूरी दो महीने में पैदल नाप कर दिल्ली पहुंचे थे। उन्हें दिल्ली की सीमा पर ही रोका गया और कांग्रेस सरकार ने उनकी मांगे मानी। इनकी मांग के अनुसार अध्यादेश निकाल कर भूमि अधिग्रहण क़ानून में संशोधन किया गया।
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तब बीजेपी इनकी मांग का समर्थन कर रही थी, क्योंकि उन्हें इनके वोट लेने थे। कांग्रेस इनकी मांग के खिलाफ थी।
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सत्ता में आते ही मोदी साहेब ने एक अध्यादेश निकाल कर उसी क़ानून को फिर से लागू कर दिया जिस क़ानून को रद्द करवाने के लिए ये 6 लाख भूमिहीन परिवार दो महीने पैदल चलकर आये थे। लेकिन अब कांग्रेस इनकी मांग का समर्थन कर रही है !!
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इसी तरह से 2012 में कांग्रेस ने ज्वेलरी पर उत्पाद शुल्क लगाया जिसका सर्राफा कारोबारियों ने विरोध किया। लम्बी हड़ताल के बाद कांग्रेस को इस फैसले को वापिस लेना पड़ा। तब मोदी साहेब ज्वेलरी पर उत्पाद शुल्क के विरोध में थे।
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सत्ता में आने पर मोदी साहेब ने ज्वेलरी पर एक्साइज ड्यूटी लगा दी। सर्राफा कारोबारी फिर से हड़ताल पर है। और अब कांग्रेस सर्राफा कारोबारियों की इस मांग का समर्थन कर रही है !!
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इस सूची को और भी बढ़ाया जा सकता है। पर मामला सिर्फ बीजेपी-कांग्रेस तक ही सीमित नहीं है।
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समस्या यह है कि, 2019 में सर्राफा कारोबारी यदि केजरीवाल को वोट करेंगे तो वे सत्ता में आकर उत्पाद शुल्क की सीमा 1% से बढ़ाकर 10% कर देंगे ! पर चुनाव से पहले ये बात वे कभी कहेंगे नहीं।
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तो हमारे नेता इतने मक्कार क्यों है ?
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मक्कार नहीं है। जैसे सब आदमी होते है, वैसे ही वे भी है। आपके और हमारी तरह। काम निकलने के बाद कोई किसी को पूछता है क्या ?
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उन्हें पता है कि --- कुछ भी बोल कर वोटर से एक बार वोट ले लेना है। एक बार वोट देने के बाद जनता अगले 5 साल तक अपना वोट वापिस नहीं लौटा सकती। 5 साल तक हम उन्हें कितने भी पट्टे मारे, उन्हें खाने ही है।
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लेकिन अगर जनता के पास वोट देने की साथ ही वोट वापिस खींचने का अधिकार भी हो तो....? तो नेता अपनी खाल में रहेंगे।
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वोट देने का अधिकार -- राईट टू वोट
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वोट वापिस लेने का अधिकार -- राईट टू रिकॉल
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अमेरिका के नेता भारत के नेताओ से भी बड़े मक्कार है। लेकिन अमेरिका में मतदाताओं के पास अपने प्रतिनिधियों को नौकरी से निकालने का अधिकार है, अत: वहाँ के नेता कम मक्कारी दिखाते है।
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