Pawan Jury BhilwaraRj

सोने पर एक्साइज ड्यूटी लगाने के समर्थन मैं यह तर्क दिया गया है कि "सोना एक गैर उत्पादक और बुरा निवेश है, इससे राष्ट्र कमजोर होता है"
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इस तर्क पर मेरा जवाब --- (copied by comment box)
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यह बात ठीक है कि सोना एक गैर उत्पादक निवेश है। लेकिन यह बात गलत है कि सोना एक विलासी निवेश है। कुछ मात्रा में प्रत्येक नागरिक को सोने में निवेश करना चाहिए। वरना हमारा देश ख़त्म हो जाएगा। कैसे ?
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१) सोना पिछले 10 हजार वर्षो से पूरी दुनिया में सबसे स्थायी और शुद्ध निवेश बना हुआ है। दुनिया में ऐसा कुछ नहीं है जो सोने के निवेश के सामने टिक सके। 3 साल बारिश नहीं हुयी या अकाल हो गया या भूकम्प आ गया तो करोडो की जमीन के हजारो भी नहीं मिलते। यदि आप शेयर बाजार में निवेश कर रहे है तो एक न एक दिन आपका पैसा रोथ्स्चाइल्ड या धनिको की तिजौरी में जाने वाला है। एक बार मंदी आई और शेयर धड़ाम। बैंक में पड़ा रूपया इंफ्लेशन इकोनॉमी कोलेप्स होने पर कागज बन जाएगा। डॉलर खुद एक कागज के सिवा कुछ भी नहीं है। जबकि सोना हर हालत में अपनी कीमत बनाए रखता है।
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२) मान लीजिए कि चीन भारत पर हमला कर देता है या चीन पाकिस्तान को हमला करने के लिए अपने हथियार दे देता है, तथा अमेरिका भारत की मदद 6 महीने बाद करता है तथा चीन रूस को भी पर्याप्त डॉलर दे देता है ताकि रूस भारत को हथियार न दे --- तो यह तय है कि पाकिस्तान या चीन सेनाएं लगभग 1 से दो महीने के भीतर मेरे और आपके शहर में पहुँच जायेगी।

अथवा

मान लीजिए कि जैसा कि असम में 2012 में हुआ। जब बांग्लादेशी घुसपेठियो ने भारतीयों पर हमला कर दिया था और लगभग 1 लाख लोगो अपनी जान लेकर असम से भागना पड़ा। या 1990 में कश्मीरी पंडितो को सब कुछ छोड़कर कश्मीर से भागना पड़ा। या 1971 में बांग्लादेश या 1947 में पाकिस्तान से हिन्दुओ को भागना पड़ा।
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तो मान लीजिए कि आपका सामना ऐसी स्थिति से हो जाता है और आपके पास अपनी जान-माल बचाने के लिए 24 घंटे की मोहलत है तो आप अपने परिवार को लेकर पलायन करेंगे तब अपने साथ क्या लेकर जाएंगे ?
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सिर्फ दो चीजे ही आपकी रक्षा करेगी। १) हथियार २) सोना। बाकी सब मिट्टी है। क्योंकि निर्णायक युद्ध में हारने वाले देश की मुद्रा उड़ जाती है। ऐसे में सोना और हथियार लाइफ लाइन है। क्योंकि सोना तब भी अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अपनी कीमत बनाये रखेगा। सोना शुद्ध निवेश है। सभी सभ्यताओं ने इसे हर हाल में खजाना माना है। सोना आज भी कीमती है, रहेगा। इसीलिए अमेरिका-ब्रिटेन का धनिक वर्ग नहीं चाहता है कि भारत के आम नागरिक सोने में निवेश करे। वे ऐसे क़ानून चाहते है जिससे भारतीय सोने की जगह शेयर बाजार (यानि उनकी कम्पनियो) में निवेश करें। अमेरिका में 80% नागरिक कर्ज में डूबे हुए है। और उनके पास जीरो सोना है। सारा सोना धनिको की तिजौरियों में है। पर उनके पास हथियार है। भारत के नागरिकों के पास हथियार पहले से ही नहीं है। सोना भी नहीं होगा तो आपत्तिकाल में या युद्ध के दौरान उनके टिके रहने की क्षमता कमजोर हो जायेगी।
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३) किसी भी देश की करेंसी को भी बेकअप सिर्फ दो चीजों से ही मिलता है। देश की सेना कितनी मजबूत है और देश के पास और नागरिकों के पास सोना कितना है। अमेरिका का डॉलर पूरी दुनिया में इसीलिए चलता है क्योंकि अमेरिका के पास सबसे आधुनिक और ज्यादा हथियार है और सबसे ज्यादा स्वर्ण भण्डार है। ब्रिटेन का पोंड भी इसीलिए टिका हुआ है। अत: सोना बिलकुल भी बुरा निवेश नहीं है।
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फिर भी मैं सोने पर टैक्स लगाने के खिलाफ नहीं हूँ। अत: मेरा प्रस्ताव है की सोने पर 1 प्रतिशत सालाना सम्पत्ति कर लगाया जाए। और जो सोने का आयात करना चाहते है उन्हें सरकार डॉलर देना बंद करे। जिनको आयात करना है डॉलर उन्हें खुद जुटाने होंगे। इससे हम आयात से खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा के भार से बच जायंगे।
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यह भी आवश्यक है कि सोने को सोने के रूप में स्वयं के नियंत्रण (बैंक लॉकर आदि) में ही रखा जाना चाहिए। यदि आप सोना जमा करवाकर 'गोल्ड बांड' सम्भाल कर रखे हुए है तो यह गोल्ड बांड आपत्तिकाल में बेकार साबित होंगे। कल्पना कीजिये कि यदि भामाशाह* के पास सोने की जगह अकबर द्वारा दिए गए 'गोल्ड बांड' होते तो महाराणा प्रताप इन बांड्स से सेना किस तरह खड़ी कर पाते ?
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(*) राज्य और सेना गवांने के बाद मेवाड़ के महाराणा को धन की आवश्यकता थी। तब दानवीर भामाशाह ने महाराणा को सोने से लदी कई गाड़ियां दी थी। महाराणा ने उसी कोष से अपनी सेना खड़ी की और अकबर से लोहा लिया।
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सबक यह है कि 'गोल्ड मोडिटाइजेशन स्कीम' एक अच्छे निवेश को बुरे निवेश में बदल देने का सबसे बेहतर तरीका है।
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