Pawan Jury BhilwaraRj
क्यों मोदी-अंधभगत* राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ को 'राष्ट्र विरोधी' समझते है ? इससे देश को होने वाला नुकसान और नुकसान से बचने का समाधान।
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[ (*) अंधभगत एक विशिष्ट श्रेणी है, तथा मोदी-समर्थक इनमे शामिल नही है। अंधभगत वे है जो कि बिना देश-काल-परिस्थिति का विचार किये हर हाल में मोदी साहेब के सभी (हाँ सभी, 100%) फैसलों का समर्थन करते है। इनकी पहचान करने के लिए इनसे पूछें कि क्या आप 2 करोड़ मुस्लिम घुसपैठियों को खदेड़ने के क़ानून का समर्थन करते है, तो ये कहेंगे कि -- 'हाँ, इन्हे खदेड़ना बहुत जरुरी है'। फिर यदि आप इनसे यह कहेंगे कि 'लेकिन मोदी साहेब इस क़ानून का विरोध कर रहे है', तो यदि आपको -- 'तुम राष्ट्र विरोधी हो', 'गद्दार हो', 'हिन्दू द्रोही हो', 'कोंग्रेसी हो', 'विदेशी एजेंट' हो या 'थोड़ा रूक नही सकते क्या' ?, 60 साल तक कहाँ गए थे' ? टाइप के उल जलुल जवाब सुनने को मिलें, तो समझ लीजिये कि आपका पाला मोदी अंधभगत से पड़ चुका है।
मोदी अंधभगतो की तरह ही सोनिया घांडी और महात्मा अरविन्द गांधी के भी अंध भगत पाये जाते है। सोनिया भक्त उतार पर है जबकि केजरी भक्त तेजी से बढ़ रहे है। पर इनकी संख्या फ़िलहाल बेहद कम है, अत: उन्हें इस लेख की विषय वस्तु में शामिल नही किया गया है।]
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चूंकि मोदी अंधभगतो के लिए 'मोदी विरोध' राष्ट्र विरोध की श्रेणी में ही आता है, अत: मैं इस शीर्षक को संशोधित करके पुन: लिखूंगा।
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तो सही और संशोधित शीर्षक यह है कि 'क्यों मोदी-अंधभगत राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ को "मोदी विरोधी" समझते है' ?
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'समझते है' शब्द का प्रयोग इसीलिए किया गया है, क्योंकि "तथ्य" यह है कि राईट टू रिकॉल ग्रुप मोदी साहेब के साथ साथ सोनिया घांडी और महात्मा अरविदं केजरीवाल का भी विरोधी है। अत: हम सिर्फ मोदी साहेब का विरोध नही करते बल्कि सोनिया-केजरीवाल-येचुरी-मुलायम-नितीश-मायावती और दुरात्मा अन्ना का भी विरोध करते है। यदि आपको इस "तथ्य" पर इत्मीनान करना हो तो आप राईट टू रिकॉल ग्रुप के पोस्ट देख सकते है, जिनमे बहुधा यह लिखा जाता है कि सोमोके = सोनिया-मोदी-केजरीवाल राईट टू रिकॉल कानूनो का विरोध कर रहे है। तथा हम अपने सभी पोस्ट्स में समाधान के तौर पर मोदी साहेब को गद्दी से हटाने की नही बल्कि इन कानूनो को लागू करवाने के लिए अपने सांसदों को एसएमएस द्वारा आदेश भेजने की अपील करते है।
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फिर भी मेरे लिए यह आश्चर्य का विषय नही है कि --- आखिर क्यों मोदी-अंधभगत राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ को "मोदी विरोधी" समझते है ????
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1. क्योंकि उन्हें जानकारी नही है कि, यदि देश को कोई आदमी चला सकता था तो हमारे नियंताओं को विश्व का सबसे बड़ा संविधान और सैंकड़ो क़ानून नही लिखने पड़ते थे।
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2. उन्हें जानकारी नही है कि देश को क़ानून चलाते है बयान, नारे और भाषण नही। उन्हें यह भी जानकारी नही है कि अच्छे क़ानून अच्छा देश बनाते है और बुरे क़ानून बुरा देश बनाते है।
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3. उन्हें पता नही है कि, जनप्रतिनिधियों को सिर्फ क़ानून बनाने के लिए ही चुना जाता है। और क़ानून बनाने के अलावा उनके पल्ले में रत्ती भर का काम भी नही है। हम 28 विधानसभाओ और संसद को सिर्फ क़ानून बनाने के लिए पाल रहे है।
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4. उन्हें पता नही है कि संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य और अधिकार है कि वह अपने प्रतिनिधियों को देशहित में क़ानून बनाने के लिए आवश्यक आदेश भेजे।
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5. उन्हें यह भी पता नही है कि , अच्छे कानूनो की मांग करना नागरिको का दायित्व है, गुस्ताखी नही।
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6. वे भूल गए है कि अभी देश के प्रधानमंत्री मोदी साहेब है, अत: कानूनो की मांग भी उन्ही से ही की जायेगी राहुल गांधी से नही।
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7. क्योंकि वे इस 'तथ्य' को जान बूझकर गोल कर जाते है कि राईट टू रिकॉल ग्रुप मई 2014 में पैदा नही हुआ है, बल्कि 2008 से ही इन कानूनो की मांग कर रहा है। और तब हम मनमोहन और सोनिया घांडी से भी इन कानूनो की मांग कर रहे थे और उनका भी इसी शिद्दत से विरोध कर रहे थे। (२०१४ से पहले ये अंधभगत कहाँ गायब थे मुझे पता नही। क्योंकि हम तो यहीं पर थे और कांग्रेस का विरोध कर रहे थे। इसकी तस्दीक हमारे मई 2014 से पहले के पोस्ट्स से की जा सकती है।)
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8. इन्हे इल्म नही है कि कांग्रेस देश को इसीलिए लूट पायी क्योंकि देश के क़ानून उन्हें लूट की इजाजत देते थे। और आज भी वही क़ानून जारी है। और इनका समाधान कानूनो में सुधार करके ही किया जा सकता है।
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9. क्योंकि इन्हें यह भी पता नही है कि बीजेपी द्वारा राज्य सभा में बहुमत नही होने का हवाला देना सिर्फ एक बहाना है, और मोदी साहेब के पास संयुक्त सत्र में बहुमत है और वे जिन भी कानूनो को लागू कराना चाहते है उन्हें संयुक्त अधिवेशन में या गैजेट में छाप कर लागू कर सकते है।
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10. वे भूल जाते है कि हम अच्छे कानूनो को लागू करने की मांग भारत देश के लिए ही कर रहे है, बल्गारिया के लिए नही। अत: इनसे सुधार भी भारत में ही आएगा।
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उपरोक्त भौतिक और वास्तविक तथ्यों के अतिरिक्त कुछ मनोवैज्ञानिक कारण भी है, जिसके कारण मोदी साहेब के अंध भगत राईट टू रिकॉल ग्रुप को मोदी विरोधी समझते है। इनमे से कुछ निम्न है।
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11. क्योंकि वे कांग्रेस से बुरी तरह से घबराये हुए है, अत: सरकार की आलोचना को मोदी साहेब की आलोचना और मोदी साहेब की आलोचना को कांग्रेस के समर्थन की तरह देखते है।
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12. कांग्रेस राहुल नाम के निहायत ही औसत व्यक्ति के नेतृत्व की शिकार होने के बावजूद इनके लिए सबसे बड़ा हव्वा है। और ये कांग्रेस के भय से अब तक उबर नही पाये है। इन्हें गंभीरता पूर्वक यह लगता है कि राहुल एक दिन देश के प्रधानमन्त्री बन जाएंगे। ( हद है ! )
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13. क्योंकि इन्हें लगता है कि कांग्रेस 45 सीटों पर सिमटने के बावजूद 283 सीटों पर भारी है। ( और मोदी साहेब भी गाहे बगाहे इन्हें इस भय से आक्रान्त करते रहते है )
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14. इन्हें अब भी यह लगता है कि कांग्रेस ही कंट्रोल में है, और देश सोनिया घांडी ही चला रहे है। ( मोदी साहेब ने भी राबर्ट वढेरा पर कार्यवाही न करके इनकी इस धारणा को पुख्ता कर दिया है।
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15. क्योंकि बिहार और दिल्ली हार ने इनकी चिंता को और भी बढ़ा दिया है।
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16. क्योंकि ये कांग्रेस के साथ ही महात्मा अरविदं गांधी से भी उतने ही भयभीत है।
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17. क्योंकि बकौल 'रिवर्स पाओलो कोएल्हो' इन्हें लगता है कि, 'पूरी कायनात मोदी साहेब के खिलाफ एक साजिश रच रही है'
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18. क्योंकि ये मोदी साहेब को प्रधानमन्त्री बने हुए देखने मात्र से ही खुश है। इन्हें इस तथ्य से कोई लेना देना नही है कि मोदी साहेब को भारत की क़ानून व्यवस्था में सुधार लाने के लिए चुना गया है।
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19. क्योंकि इनके मन में 2019 के चुनावो में मोदी साहेब के फिर से पीएम बनने को लेकर संदेह गहरा रहा है।
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20. क्योंकि ये नियमित रूप से टीवी के सामने बैठकर खबरिया अफीम का सेवन करते है।
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अलावा इसके मोदी अंधभगत कुछ बेहद महत्त्वपपूर्ण जानकारियों से वंचित है, जिसके चलते वे यथार्थ को देख नही पाते।
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21. उन्हें पता नही है कि भारत की सेना आयातित हथियारों पर निर्भर है, और हम 100 करोड़ का देश होने के बावजूद मांगे के हथियारों से सेना चला रहे है।
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22. उन्हें यह भी पता नही है कि जो देश अपने हथियार खुद से नही बनाता उस देश को कोई भी आत्मनिर्भर सेना जब मर्जी हो तब लूट सकती है या तहस नहस कर सकती है।
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23. उन्हें पता नही है कि अगर पाकिस्तान/चीन से युद्ध के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन और रूस हमें हथियार देना बंद कर देगा याहथियारों के दाम 100 गुना कर देगा तो हम या तो हमें अमेरिका के सामने घुटने टेकने पड़ेंगे या युद्ध हारना पड़ेगा।
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24. उन्हें यह भी जानकारी नही है कि विदेशी कम्पनिया भारत में मेक इन इण्डिया के तहत जो हथियार बनाएंगी उनमे 'किल स्विच' होंगे। तथा इन्हें एक्टिवेट करने से हमारे हथियार काम नही करंगे। अत: युद्ध के दौरान हथियारो के कील स्विच दी एक्टिवेट करने के लिए हमें भारी दाम चुकाने होंगे (डॉलर में )
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25. वे इस जानकारी से भी वंचित है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनिया और मिशनरीज एक ही सिक्के के दो पहलू है, और जितना ही विदेशी निवेश आएगा उतना ही थोक में धर्मांतरण होंगे।
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26. उन्हें जानकारी नही है कि भारत में जितना भी विदेशी निवेश किया जा रहा है, उनके बदले तथा इन कम्पनियों द्वारा कमाए गए मुनाफे के बदले हमें डॉलर चुकाने पड़ेंगे।
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27. उन्हें यह भी जानकारी नही है कि आज हमारा मिडिया, रक्षा , रेल, संचार, बैंकिंग आदि जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नियंत्रण में जा चुके है और हम तकनिकी तौर पर विदेशी कम्पनियों पर बुरी तरह से निर्भर है।
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28. क्योंकि उन्हें कोई अंदाजा नही है कि भारत पर 400 बिलियन डॉलर का कर्ज है, और एक बिलियन में 100 करोड़ डॉलर होते है, और मेक इन इण्डिया के तहत जितनी भी विदेशी कम्पनिया भारत में आकर रुपयों में मुनाफा कमाएगी उन रूपयों के बदले हमने डॉलर चुकाने होंगे। और हमारे पास रूपये छापने की मशीने तो है , लेकिन डॉलर छापने की नही। अत: जब विदेशी कम्पनिया रूपयो के बदले डॉलर मांगेगी तो हम दिवालिये हो जायेगे और हमें अपनी राष्ट्रिय संपत्तियां और अपने प्राकृतिक संसाधन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हवाले करने पड़ेंगे।
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29. उन्हें पता नही है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का मुख्य एजेंडा हिन्दू धर्म का नाश करके पूरे भारत को ईसाई बनाना है। और उन्हें यह भी पता नही है कि बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में इतनी ताकत है कि वे ऐसा कर सके।
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30. उन्हें पता नही है कि दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया में एफडीआई के माध्यम से और ईराक में सेना के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ ऐसा कर चुकी है।
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तो मैं मोदी साहेब के समर्थको से कहना चाहूंगा कि :
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(A) राईट टू रिकॉल ग्रुप सिर्फ अच्छे कानूनो की मांग करता है, तथा नागरिको से अपील करता है कि वे भी सरकार से इन कानूनो को लागू करने की मांग करें। यदि उनके पास हमारे ड्राफ्ट्स से बेहतर ड्राफ्ट्स है तो हमें देवें। हम उनके कानूनो का प्रचार करने लगेंगे।
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(B) राईट टू रिकॉल ग्रुप उन सभी नेताओ और पार्टियों का विरोध करता है जो राजनैतिक दखल रखते है किन्तु अच्छे कानूनो का विरोध करते है। हम उन सभी लोगो का भी विरोध करते है जो समाधान के ड्राफ्ट नही देते, और सिर्फ समस्याओ पर गपड़चौथ करते है।
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(C) इत्तिफ़ाक़ से इस समय पीएम मोदी साहेब है, और हमारे द्वारा प्रस्तावित कानूनो कानूनो का विरोध कर रहे है अत: हम दिल पर पत्थर रख कर देश हित में उनका विरोध करने के लिए बाध्य है।
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(D) राइट टू रिकॉल ग्रुप कोई पंजीकृत संगठन नही है, तथा हमारे पास लोगो को जोड़ने की कोई व्यवस्था नही है। यदि कोई नागरिक अच्छे कानूनो का समर्थन करता है किन्तु मोदी साहेब का समर्थन करता है तब भी हम अमुक नागरिक का समर्थन करते है। इसीलिए ऐसा बिलकुल भी नही है कि हम मोदी विरोधी ब्रिगेड चला रहे है। दरअसल हम अच्छे कानूनो को लागू करवाने के लिए मुहीम चला रहे है।
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(E) कि मोदी भगत यदि चाहते है कि मोदी साहेब 2019 में भी पीएम बने और अगले 20 साल तक भी बने रहें तो उन्हें मोदी साहेब से अच्छे कानूनो की मांग करनी चाहिए। क्योंकि अच्छे कानूनो से देश में स्थायी और सकारात्मक बदलाव आएगा और उनके वोट बढेंगे। वरना अब तक के कार्यकाल के अनुसार मोदी साहेब ने वोट जोड़े नही है बल्कि घटाए ही है। वे इसी नीति पर चलते रहे तो 2019 में वे 283 से खिसक कर निश्चित रूप से 210 से 220 सीटों पर आ जाएंगे। उदाहरण के लिए यदि मोदी साहेब ने 'दलितों की सहमति' से आरक्षण कम करने के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित कर दिया होता तो उन्हें गुजरात और हरियाणा में आरक्षण के मुद्दे पर वोट नही गंवाने पड़ते। और इस क़ानून को लंबित करके मोदी साहेब अब राजस्थान में भी वोट गवाएंगे।
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(F) कि उन्हें महात्मा अरविदं गांधी को वाकई सीरियसली लेना चाहिए। इसीलिए नही कि उन्हें दिल्ली में बिजली पानी मुफ्त देने के एलान देकर सत्ता कब्जानी आती है, बल्कि उनसे इसीलिए डरना चाहिए क्योंकि केजरीवाल को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और मिशनरीज का समर्थन हासिल है। अत: मोदी साहेब को वे बराबरी की टक्कर दे सकते है।
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(G) कि उन्हें ऐसे कानूनो की मांग करनी चाहिए जिससे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की भारत में ताकत कम हो। क्योंकि कांग्रेस मिशनरीज/बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की ही कठपुतली है, अत: जब तक भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की ताकत कम नही होगी तब तक कांग्रेस केजरीवाल, नितीश, हार्दिक पटेल आदि के रूप में लौट कर आती रहेगी।
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और लिखते हुए अच्छा नही लगता लेकिन तथ्य यही है कि , बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से टकराव लेने की क्षमता फिलहाल प्रधानमंत्री तो छोड़िये भारत के 100 करोड़ नागरिको की सम्मिलित शक्ति के भी बूते की बात नही है। इसीलिए मेरा आग्रह है कि कार्यकर्ताओ को उन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करवाने के प्रयास करने चाहिए जिससे भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और मिशनरीज के वर्चस्व में कमी आये।
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नुकसान ?
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नुकसान यह है कि --- इस समय मोदी समर्थको की संख्या सबसे ज्यादा है, किन्तु वे मोदी साहेब के प्रति अपना समर्पण दिखा रहे है, देश के प्रति नही। इससे न तो अच्छे कानूनो की जानकारी नागरिको तक नही पहुँच पा रही है, और न ही इनकी मांग खड़ी हो पा रही है। नतीजा यह है कि देश में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का वर्चस्व लगातार बढ़ रहा है, और मोदी साहेब के पीएम होने के बावजूद बढ़ रहा है। चूंकि मोदी साहेब के समर्थको को उनसे कोई शिकायत नही है अत: मोदी साहेब की भी इन कानूनो को लागू करने में की रुचि नही है।
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क्योंकि इन कानूनो को लागू करने से मोदी साहेब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का समर्थन खो देंगे, और चूंकि वे अपनी छवि बनाये रखने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा संचालित पेड मिडिया पर बुरी तरह से निर्भर करते है , अत: वे यह कभी नही चाहेंगे कि उनके सम्बन्ध इनसे खराब हो। फिलहाल मोदी साहेब को उन कानूनो को लागू करने से सिर्फ नुक्सान ही होगा, फायदा नही। लेकिन यदि मोदी समर्थक इन कानूनो की मांग करने लगते है, तो मोदी साहेब को या तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हितो को चुनना पड़ेगा या अपने समर्थको यानी वोटो को। ऐसी स्थिति में मोदी साहेब अपने समर्थको को चुनेंगे और ये क़ानून देश में लागू हो जायेगे। और यदि मोदी साहेब तब भी इन प्रस्तावित कानूनो को देश में लागू करने से मना कर देते है तो कौनसे मोदी समर्थक केजरीवाल या राहुल गांधी को वोट कर देंगे। वोट तो तब भी उनने मोदी साहेब को ही करना है। तो कर दें वोट फिर से उन्हें। लेकिन कम से कम अच्छे कानूनो की मांग तो करें।
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यदि कार्यकर्ता मोदी साहेब पर अच्छे कानूनो को लागू करने का पर्याप्त दबाव नही बना पाते है तो यह तय है कि वे कभी भी इन कानूनो को लागू नही करेंगे और देश की आर्थिक और सैन्य स्थिति गिरती चली जायेगी।
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समाधान ?
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भारत में एक मात्र राईट टू रिकॉल ग्रुप है जिसने गरीबी, भ्रष्टाचार, महंगाई, को कम करने , अयोध्या-मथुरा-काशी में क्रमश राम-कृष्ण-विश्वनाथ मंदिर बनाने, सरकारी स्कूलों और अस्पतालों को सुधारने, हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाने, स्वदेशी इकाइयों को सरंक्षण देने, विदेशी कम्पनियों के प्रभाव को कम करने, मिडिया को मिशनरीज के प्रभाव से मुक्त करने और इसे स्वतंत्र बनाने, भारत की सेना को मजबूत बनाने तथा ऐसे ही कई महत्त्वपूर्ण समस्याओ के समाधान के कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है, और हम सरकार से इन्हें देश में लागू करने की मांग कर रहे है। हमारा आग्रह है कि ज्यादा से ज्यादा नागरिक अपने सांसद को एसएमएस भेज कर इन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने की मांग करे, तथा अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर उन कानूनो को रखें जिनका आप समर्थन करते है। प्रस्तावित ड्राफ्ट्स इस लिंक पर देखें जा सकते है --- https://web.facebook.com/notes/809761655808739
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*और टीवी पर पेड न्यूज देखना ज़रा कम करें। क्योंकि पेड मिडिया खबरे छुपाने के कारोबार में है, दिखाने के में नही।
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