Pawan Jury BhilwaraRj

हरियाणा में आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट और गैर जाट समुदायों में हिंसक संघर्ष सामने आया और सोशल मिडिया पर इसे अब और भी हवा दी जा रही है। यदि यह प्रवृति पनपी तो हिन्दू धर्म में अगड़ी-पिछड़ी, दलित-स्वर्ण के साथ ही और भी कई तरह के जातिगत समूह उभर आएंगे। अब सोशल मिडिया पर आपसी संवाद के कारण यह समस्या ज्यादा तेजी से पनप सकती है।
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इस अलगाव के क्षणिक लाभार्थी केजरीवाल, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बसपा, सपा आदि और अंतिम लाभार्थी मिशनरीज है। बीजेपी की पोलिटिकल लाइन साफ़ है --- हिन्दू-मुस्लिम को दो ध्रुवों में बांटकर हिन्दू वोटो को 'राजनैतिक' रूप से एकत्रित करो। लेकिन आरक्षण के मुद्दे पर देश में कई ध्रुव बनने से बीजेपी को नुकसान होगा। और इसी वजह से मोदी साहेब मिशनरीज और बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के एजेंडे पर कार्य करने पर मजबूर है।
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फिलहाल बीजेपी आरक्षण पर अपष्ट नीति को अपनाए हुए है , और इसी कारण देश को नुकसान हो रहा है। यदि बीजेपी को इस दबाव से बाहर आना है तो उसे आरक्षण पर अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए। और यह भी जरुरी है कि , ऐसा रूख अनिवार्य रूप से कानूनी हो न कि बयानी।
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