Pawan Jury BhilwaraRj
ब्राइब - घूस ; म्राइब - आपसी खिदमत
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म्राइब ---- जब पेड मिडिया के प्रायोजक और मालिक किसी मंत्री, जज, प्रशासनिक अधिकारी या पुलिस अधिकारी का की छवि को निखारने या बिगाड़ने के लिए मिडिया कर्मियों को भुगतान करते है।
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उदाहरण के लिए :
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1. जापानियों के पास बुलेट ट्रेन चलाने की तकनीक है और उनके पास भारत में सोनी चैनल के रूप में प्रसारणकर्ता भी है।
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2. बुलेट ट्रेन चलाकर जापानी भारत में अरबों-खरबों रूपये कमा सकते है, और अपने सोनी चैनल नेटवर्क का इस्तेमाल करके वे मोदी साहेब की छवि को धूमिल कर सकते है या चमका भी सकते है। छवि धूमिल होने से मोदी साहेब के वोट कटेंगे जबकि सकारात्मक प्रसारण से वोटो में इजाफा होगा।
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3. तो जापानी कम्पनियों ने मोदी साहेब को कहा कि --- 'मुंबई-अहमदाबाद रूट हमारे हवाले कर दो। यदि तुमने ऐसा नहीं किया तो हम सोनी नेटवर्क का इस्तेमाल करके तुम्हारी छवि धवस्त कर देंगे। और अगर तुम बुलेट ट्रेन का व्यापार हमारे हवाले कर देते हो तो हम अपने चैनल्स पर तुम्हारी ऐसी हवा बनायेंगे कि हर किसी को लगेगा कि पिछले 50 लाख सालो में तुमसे बेहतर प्रधानमंत्री इस धरती पर नहीं हुआ है'।
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इसी ऑफर को मैं म्राइब कहता हूँ ---- यह घूस के जैसा ही है, लेकिन लेनदेन के रूप में नकदी कि जगह इसमें अलग तरह की वस्तुओ का इस्तेमाल किया जाता है।
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घूस तो जारी है, लेकिन 1950 से 2000 के कालखंड के नेताओं के उलट आज ज्यादातर नेता, जज, मंत्री, अधिकारी आदि ब्राइब में नकदी लेने कि जगह म्राइब का उपयोग बहुतायत से कर रहे है।
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