Pawan Jury BhilwaraRj

देश के खनिजों और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनो को बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से बचाने के प्रयासो को किस हद तक प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, इंडोनेशिया इसका उदाहरण है।
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इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो ने साथ के दशक में खनिज सम्पदाओ का राष्ट्रीयकरण कर दिया और भूमि सुधार किये। उसने विश्व बैंक और अन्तराष्ट्रीय मुद्रा कोष को देश से निकाल बाहर किया तथा विदेशी निवेश पर रोक लगा दी।
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नतीजा :
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सीआईए और अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनियो ने इंडोनेशिया की सेना की मदद से 1965 से 1966 के बीच कम्युनिस्ट पार्टी के 10 लाख लोगो का कत्ले आम किया। विदेशी कम्पनियो का विरोध कर रहे कम्युनिस्ट पार्टी के सभी नेताओं, कार्यकर्ताओ और समर्थको को ढूंढ ढूंढ कर मौत के घाट उतारा। एक को भी नही छोडा।
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सबक यह है कि :
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१) मांग ड्राफ्ट की शक्ल में होनी चाहिए ताकि सभी कार्यकर्ताओ के गायब हो जाने या मर जाने के बावजूद आंदोलन आगे बढ़ता रहे।
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२) जब तक किसी देश की सेना की शक्ति देश के नागरिको की शक्ति से अधिक रहेगी, तब तक सच्चे लोकतंत्र की स्थापना नही की जा सकती। अत: हथियारबंद नागरिक समाज की लोकतंत्र की जननी है।
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३) यदि मांग ड्राफ्ट के रूप में नहीं है तो विकेन्द्रित व्यवस्था के तहत कार्य करना भी सुरक्षित नही है।
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४) किसी एक नेता से देश को बचाने की उम्मीद करना बिलकुल ही बकवास सिद्धांत है।
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अधिक जानकारी के लिए कृपया ये लिंक देखें ---

http://www.frontline.in/world-affairs/a-forgotten-genocide/article8017859.ece
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https://en.wikipedia.org/wiki/Indonesian_killings_of_1965%E2%80%9366
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https://www.jacobinmag.com/2015/06/indonesian-communist-party-suharto-massacre-purge/
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