Pawan Jury BhilwaraRj
मालदा हिंसा से जुड़े कुछ प्रश्न :
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१) क्या इतने मामूली व्यक्ति द्वारा दिए गए व्यक्ति के बयान पर 2 लाख लोग स्वत: स्फूर्त इकठ्ठा हो सकते थे ? वो भी बिना किसी नेतृत्व के ?
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२) ऐसे जमाव को घटित करने में कौनसे समूह समर्थ है, जो कि आगामी चुनावों में लाभार्थी भी हो ?
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३) इस रिवर्स पोलोराइजेशन से किस समूह को राजनैतिक फायदा होगा ?
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आप अपना अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र है
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मेरे अनुमान में मालदा हिंसा जैसा सुनियोजित आयोजन मिशनरीज़ के सहयोग से बीजेपी और संघ के अलावा अन्य कोई भी समूह करने में सक्षम नहीं है।
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2 लाख मुस्लिमों के सड़को पर उतरने की कोई तुक ही नजर नहीं आ रही। पैगम्बर पर बयान देने वाले नामालूम व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर लिए गया था, और वे जेल में थे। बयान यूपी में दिया गया और हिन्दू महासभा का आधार भी सिर्फ यूपी में मामूली रूप से सीमित है। लेकिन धमाका उस बंगाल में हुआ जहां अब तक कभी भी साम्प्रदायिक हिंसा और प्रदर्शनों का इतिहास नहीं रहा है !! यह जमाव सिर्फ जमाव दिखाने और हुड़दंग करने के लिए ही था, और ये लोग तिवारी को 'फांसी' दिए जाने की मांग कर रहे थे !!
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कौन सी शक्ति इस मुद्दे को बहाकर बंगाल ले गयी, और बांग्लादेश बॉर्डर के समीपस्थ इलाको में बवाल हो गया ?
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इतने थके हुए मुद्दे पर इतनी दूर इतना बड़ा जमाव स्वत: स्फूर्त नही हो सकता। इसके पीछे जो योजनाकार थे, उनकी निगाह में बंगाल में होने वाले आगामी चुनाव है।
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तो, अगर 2 लाख मुस्लिम सड़को पर उतर कर हुड़दंग मचाते है, तो राजनैतिक रूप से फायदा किसे होगा ?
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ममता को नही होगा, लेफ्ट को भी नही होगा, कांग्रेस को भी नही हो सकता। फायदा सिर्फ बीजेपी को होगा।
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इस जमाव से क्षेत्र के हिन्दू असुरक्षित महसूस करेंगे, और बीजेपी के वोटबैंक के रूप में लामबंद होना शुरू होंगे। इससे बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी उठेगा और बीजेपी इसे बंगाल में चुनावी मुद्दा बनाएगी। यह खुली हुयी बात है कि लेफ्ट और ममता सरे आम बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश में घुसाने का समर्थन करते है, और बंगाल की जनता इस बात से वाकिफ है।
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लेकिन बंगाली नागरिक यह नहीं जानते कि बीजेपी भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की कट्टर समर्थक है, अत: वे मोदी साहेब से यह झूठी उम्मीद बांधेंगे कि यदि बीजेपी सत्ता में आई तो बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ देगी। मोदी साहेब को उन्हें झूठी तसल्ली देने के लिए करना सिर्फ इतना होगा कि, वे फिर से विधानसभा चुनावो में मंच से बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ वैसा ही एलान करे जैसा कि लोकसभा चुनावो में कर चुके है। इतना कहने भर से लोग विश्वास करके उन्हें वोट दे देंगे।
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अत: इस हिंसा की लाभार्थी सिर्फ बीजेपी ही है। और बीजेपी के पास इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सऊदी अरब द्वारा संचालित मुस्लिम संगठनो पर अच्छी पकड़ है। हालांकि दीर्घकालीन लाभ हिन्दू महासभा को होने की संभावना है। क्योंकि इससे मिशनरीज को भविष्य में संघ की घडी दबाकर रखने में सुविधा रहेगी। आगे चलकर संघ मिशनरीज के हाथ से न निकल जाए इसके लिए यह आवश्यक है कि एक और छद्म हिंदूवादी दल को उभारकर रखा जाए, ताकि आने वाले वक्त में यदि हिन्दूवादी मतदाता नागनाथ के चंगुल से निकलने में कामयाब हो जाते है तो सांपनाथ की चपेट में आ जाए।
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इस समीकरण को समझने के लिए पाठक को यह जानकारी होना जरुरी है कि, ओवैसी मोदी साहेब के बाएं और शाह के दायें हाथ है। ये शाह ही थे जिन्होंने ओवैसी को मोदी के खिलाफ वह मशहूर हेट स्पीच देने के लिए राजी किया था, तथा आश्वासन दिया था कि यदि मोदी साहेब पीएम बन जाते है तो उन्हें पूरी तरह से कॉपरेट किया जाएगा। आश्वस्त होने पर ही औवेसी ने टीवी कैमरों के सामने एलानिया यह बयान दिया था कि, "देखते है कैसे मोदी वजीरे आजम बनता है'। बयान चल निकला और बीजेपी की सोशल मिडिया सेल ने इसे खूब सर्कुलेट किया। निश्चित रूप से जिसने भी स्पीच सुनी, उसने 'औवेसी को सबक सिखाने के लिए' मोदी को वोट किया। यह प्रति ध्रुवीकरण (रिवर्स पोलोराइजेशन) है, जिसमे अल्पसंख्यको द्वारा बहुसंख्यको को भड़काया जाता है।
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अल्पसंख्यको के एक ध्रुव पर इकट्ठा होने से बहुसंख्यक स्वत्: ही दूसरे ध्रुव पर एकत्र होने लगते है।
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यह भी सनद रहे कि संघ और बीजेपी पूरी तरह से मिशनरीज के नियंत्रण में ही कार्य करते है, लेकिन मुस्लिम विरोध के कारण संघ और बीजेपी की छवि हिंदूवादी प्रतीत होती है। जबकि वास्तव में संघ का हिंदुत्व से दूर दूर तक कोई लेना देना नही है। हिंदुत्व से संघ का कुछ भी लेना देना है वह जबानी जमा खर्च और मौखिक बयानों तक सीमित है।
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अत: मालदा काण्ड में बीजेपी का निष्क्रिय योगदान हो सकता है और मिशनरीज का सक्रीय। या मिशनरीज का निष्क्रिय और बीजेपी का सक्रीय। या दोनों की सक्रीय भूमिका भी हो सकती है। लेकिन यह तय है कि इसकी लाभार्थी बीजेपी और मिशनरीज है, और दोनो ही ऐसा आयोजन करने में सक्षम है।
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समाधान ?
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१) देश में 2 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिये घुसे हुए है, और बंगाल के सीमावर्ती जिलो में स्थिति बेहद गंभीर है। बीजेपी-कांग्रेस-सोनिया-ममता-लेफ्ट आदि सभी पार्टियां इन्हे समर्थन देती है और ये इन्हे खदेड़ने का क़ानून बनाने का विरोध कर रहे है। समाधान के लिए हमें बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए क़ानून की जरुरत है। अत: नागरिको को सरकार से इन्हे खदेड़ने के लिए आवश्यक क़ानून को गैजेट में प्रकाशित करने की मांग करनी चाहिए।
बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ने के लिए राइट टू रिकॉल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित क़ानून इस लिंक पर अध्याय 33 में देखें -- https://web.facebook.com/groups/righttorecallparty/10152114637883103/
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२) इस तरह के जमाव और हिंसा को रोकने के लिए पुलिस प्रमुख पूरी तरह से प्राधिकृत और समर्थ है। लेकिन पुलिस प्रमुख अपनी नौकरी बचाने और शाबाशी पाने के लिए ऐसे हालात में मुख्यमंत्री के निदेशों का पालन करता है और पक्षपात से स्थिति बिगड़ जाती है। समाधान के लिए नागरिको को सरकार से राईट टू रिकॉल पुलिस प्रमुख और राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित करने की मांग करनी चाहिए।
राईट टू रिकॉल मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
https://www.facebook.com/pawan.jury/posts/811071415677763
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३) मिडिया हमारा मिशनरीज और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में है, जिससे दर्शको तक सच्ची खबरे नहीं पहुँच पाती। हमें मिडिया में एफडीआई रद्द करने और दूरदर्शन अध्यक्ष को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको को देने की जरुरत है।
राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/811073719010866
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४) उलजलूल बयान देकर भड़काने वालो और दंगाइयों के खिलाफ दर्ज किये गए मुकदमो में त्वरित और निष्पक्ष निपटारे के लिए सुनवाई और फैसलों का अधिकार नागरिको की ज्यूरी को दिया जाए। 10-15 नेता बयान देने के हफ्ते भर में जेल पहुंचेंगे और दंगाइयों के घर-झोपड़े बेच कर जब सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई की जायेगी, तो ये अन्य दंगाई और बकरउ स्वयं ही एहतियात बरतने लगेंगे।
ज्यूरी सिस्टम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809746209143617
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५) नागरिको को अपनी सुरक्षा के लिए बन्दुक रखने की छूट दी जानी चाहिए।
हथियारबंद नागरिक समाज की रचना के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809737552477816
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इन कानूनो को नागरिको की सहमति से लागू करवाने के लिए अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजें कि पारदर्शी प्रस्ताव प्रणाली के क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
पारदर्शी शिकायत प्रणाली के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186
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*टीसीपी क़ानून के लिए अपना समर्थन आप http://www.bhilwarasms.in/ पर एसएमएस भेज कर दर्ज करवा सकते है।
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