Pawan Jury BhilwaraRj

सेट टॉप बॉक्स की अनिवार्यता
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यदि आपने अपने घर पर टाटा स्काई, डिश या ऐसी ही कोई छतरी लगवा रखी है यानी कि यदि आप डीटीएच उपभोक्ता है, तो आप सर्विस प्रोवाइडर को 250 रू न्यूनतम चुका रहे है। यदि कल सभी डीटीएच ऑपरेटर प्रसारण कर्ताओ के साथ मिलकर न्यूनतम राशि 500 रू तय कर देते है तो, क्योंकि स्थानीय केबल ऑपरेटर आपको 150 रू में कनेक्शन दे देता है अत: आप अगले दिन ही लोकल केबल ऑपरेटर को कनेक्शन देने के लिए कहेंगे। स्थानीय केबल ऑपरेटर्स की इस उपस्थिति के कारण डीटीएच कंपनियां कीमते नहीं बढ़ा पा रही है।
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लेकिन यदि स्थानीय केबल नेटवर्क पूरी तरह से ख़त्म हो जाए तो प्रसारण कर्ता आसानी से सभी उपभोक्ताओं से 500 रू महीना वसूल सकेंगे !!
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2012 में सरकार ने चार महानगरो में प्रत्येक केबलधारी उपभोक्ता के लिए सेट टॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य किया, तथा दूसरे चरण में इस नियम को पूरे देश में लागू किया। नियम के मुताबिक़ अगले महीने तक देश के प्रत्येक केबलधारी उपभोक्ता को सेट टॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य है। यदि कोई उपभोक्ता सेट टॉप बॉक्स नही लगवाता है तो टीवी पर उसे सिर्फ नीला पर्दा ही दिखाई देगा।
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पहले चरण में सभी केबल उपभोक्ता अपने टीवी पर सेट टॉप बॉक्स लगवा रहे है, क्योंकि कानूनन इन्हें लगाना अनिवार्य है। केबल उपभोक्ता इस सेट टॉप बॉक्स के लिए 1500 रू चुका रहे है, और न चुकाने का कोई विकल्प नही है। इससे प्रसारण कर्ताओ को किसी भी केबल नेटवर्क के उपभोक्ताओं की सटीक संख्या की जानकारी मिलेगी, और केबल ऑपरेटर को प्रति केबल उपभोक्ता 110 रू प्रसारणकर्ताओ को चुकाने होंगे। यानी यदि किसी क्षेत्र के केबल ऑपरेटर के पास 10 हजार कनेक्शन है तो, वह 10*110 = 11 लाख रू मासिक चुकाएगा। फिलहाल केबल ऑपरेटर प्रति कनेक्शन लगभग 200 रू वसूलते है, अत: 200-110 = 90 रू उन्हें बचता है, जिसमे रख रखाव और वेतन आदि का भुगतान शामिल है।
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देश के सभी केबल उपभोक्ताओं के घरो पर सेट टॉप बॉक्स लगने के बाद दूसरे चरण में प्रसारण कर्ता केबल ऑपरेटर से वसूली जाने वाली प्रति उपभोक्ता कीमत 110 से बढ़ाकर 150 और फिर 200 रूपये कर सकेंगे, जिससे केबल ऑपरेटर्स को दाम बढ़ाकर 300 से 350 करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में केबल उपभोक्ता क्या चुनेगा ?
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जब केबल कनेक्शन का प्रति माह शुल्क 350 हो जाएगा और डीटीएच का शुल्क 300 तक बना रहेगा तो उपभोक्ता केबल कनेक्शन कटवा लेगा और 500 रू की छतरी खरीद कर सीधे सेटेलाइट द्वारा प्रसारणकर्ता द्वारा जुड़ जाएगा। उल्लेखनीय है कि जो सेट टॉप बॉक्स अभी लगाए जा रहे है, इसी सेट टॉप का इस्तेमाल डीटीएच ( डाइरेक्ट टू होम) कनेक्शन के लिए भी किया जा सकेगा, अत: सेट टॉप बॉक्स लगाने के उपरान्त उपभोक्ता को सिर्फ छतरी ही खरीदनी होगी। इस प्रकार धीरे धीरे सभी वर्तमान केबल उपभोक्ता सीधे सेटेलाइट सिस्टम से जुड़ जाएंगे और केबल ऑपरेटर्स बढ़ती लागत और घटते कनेक्शन के कारण अपना व्यवसाय खो देंगे।
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एक बार जब केबल ऑपरेटर्स गायब हो जाएंगे तो प्रसारण कर्ताओ को पूरी छूट होगी कि वे प्रति कनेक्शन 500 से 700 रूपये वसूल सके। केबल ऑपरेटर्स के अभाव में सभी उपभोक्ता तब यह पैसा चुकायेंगे या नीला पर्दा देखेंगे।
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कुल मिलाकर यह सेट टॉप बॉक्स को अनिवार्य करने का क़ानून एकाधिकार बनाने, केबल ऑपरेटर्स को गायब करने और बाद में भारी मुनाफा कमाने के लिए बनाया गया है, और जाहिर है कि संचार मंत्रालय को इसके लिए प्रसारण कर्ताओ से मोटा पैसा मिला होगा।
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चूंकि सेट टॉप बॉक्स लगाने से उपभोक्ता ज्यादा साफ़ तस्वीरें देख सकेगा और प्रसारण की गुणवत्ता बढ़ेगी अत: मैं सेट टॉप बॉक्स लगाने की नीति के खिलाफ नहीं हूँ, लेकिन इसका फैसला उपभोक्ताओं पर छोड़ दिया जाना चाहिए। गन पॉइंट पर सेट टॉप बॉक्स लगाने की अनिवार्यता थोपना किसी भी लिहाज से उचित नहीं है।
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जो कोई सेटेलाइट टीवी एफोर्ड कर सकता है वो डीटीएच सिस्टम का इस्तेमाल करे, जो ऑप्टिकल फाइबर लाइन लेना चाहता है, वह वैसा कनेक्शन ले। लेकिन दिक्कत यह है कि इस धारा के चलते रहने से कुछ ही वर्षो में टीवी देखने के भी महीने के 500-700 रूपये चुकाने पड़ सकते है, और देश की एक बहुत बड़ी आबादी के लिए यह एक बड़ी रकम है। इस व्यवस्था में मध्यवर्ग तो खुद को समायोजित कर लेगा लेकिन निम्न और निम्न मध्य वर्ग विकल्पहीनता के कारण फंस जाएगा।
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समाधान ?
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हमें दूरदर्शन को खड़ा करने की जरुरत है, ताकि देश के करोड़ो नागरिको के पास अच्छे स्तर के मनोरंजन का विकल्प उपलब्ध रहे।
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आज दूरदर्शन के संसाधनो और दर्शको का जोड़ देश के सभी निजी चैनलों के संसाधनो और दर्शको की संख्या के जोड़ से ज्यादा है। लेकिन अकूत संपत्ति और पेट भर के दर्शक संख्या होने के बावजूद दूरदर्शन घटिया प्रसारण की पराकाष्ठा को सिर्फ इसीलिए मेन्टेन रखे हुए है, क्योंकि निजी चैनल्स द्वारा दूरदर्शन के प्रसारण को घटिया स्तर का बनाये रखने के लिए घूस दी जाती है। यदि दूरदर्शन अपने संसाधनो का उचित इस्तेमाल करे तो भारत के करोड़ो नागरिको को स्तरीय मनोरंजन और निष्पक्ष खबरें उपलब्ध करवा सकता है। दूरदर्शन अपने खुद के स्पोर्ट्स चैनल, मूवी चैनल्स शुरू कर सकता है, गुणवत्ता प्रधान धारावारिको का फिर से निर्माण शुरू कर सकता है, और हर तरीके से निजी चैनल्स को कड़ी टक्कर दे सकता है।
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लेकिन चूंकि भारत के नागरिको के पास दूरदर्शन अध्यक्ष को नौकरी से निकालने का अधिकार नहीं है, अत: डीडी चैयरमेन निजी चैनल्स से घूस खाता है और दूरदर्शन के स्तर को निम्नस्तरीय बनाये रखता है, ताकि निजी चैनल्स के लिए विस्तार के अवसर बने रहे।
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समाधान ??
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१) यदि आप चाहते है कि भारत के नागरिको के पास दूरदर्शन के चेयरमेन को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया हो तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा यह आदेश भेजे --

राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/811073719010866
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२) अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे की टीसीपी* क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए --

टीसीपी के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186

टीसीपी क़ानून के गैजेट में प्रकाशित होने से नागरिको की सहमति से राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष, राईट टू रिकॉल जिला दूरसंचार अधिकारी तथा राईट टू रिकॉल दूरसंचार मंत्री के क़ानून को भी गैजेट में प्रकाशित किया जा सकेगा।
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*टीसीपी क़ानून के लिए अपना समर्थन आप http://www.bhilwarasms.in/ पर एसएमएस भेज कर दर्ज करवा सकते है।
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