Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Ashok Jain VotevapsiCm:

~राईट टू रिकॉल ग्रुप ~
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प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कोइ भी व्यक्ति बैठै, वो देश हित का कार्य करें या यों कह सकते है कि अमेरिका के खिलाफ कुछ भी कर ही नही सकता है । क्यों ?
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उस व्यक्ति के चाहे वो अटल जी हो ,मनमोहन जी हो ,मोदी जी हो या आने वाले समय मे कोइ भी पार्टी का प्रधानमंत्री हो चाहे कितना ही ताकतवर हो सीट पर बैठने के बाद उनके हाथ पैर ,मुंह युं कह सकते है कि पुरे बांध दिये जाते है। उसे पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनीयों (MNCs) और मिशनरियों रूपी अजगरो द्वारा जकड लिया जाता है ।
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मुझे खुद को जब से वोट डालने का अधिकार मिला है विगत 19 वर्षों से मे स्वयं बीजेपी को ही मतदान कर रहा हूँ और में एक संघ का स्वयंसेवक भी हूँ, लेकिन इस बार जो मोदी जी की लहर थी उसे देख कर लग रहा था की यह व्यक्ति प्रधानमंत्री बनने के लायक है और ये आम नागरिकों के सभी सपनों को पुरा कर देगें। ऐसा सभी ने भी सोचा ही होगा और इसीलिए वे प्रधानमंत्री बन सकें।
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यहाँ सपनों से तात्पर्य है - ---------:---------

1. अयोध्या मन्दिर बनवाना।

2. बहु राष्ट्रीय कम्पनीयों को देश से खदेड़ना।

3. स्वदेशी कम्पनीयों को बढावा देना।

4. सेना को मजबूत करना।

5. पाकिस्तान को करारा जवाब देना।

6. गरीबी ,बेरोजगारी ,भ्रष्टाचार आदी ।
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मेरे प्यारे भाइयों इनमें से कोइ भी काम मोदी जी नही कर पा रहे है और ना ही भविष्य में कभी चाह कर भी कर सकते हैं, चाहै अपन लौग उन्हे 2019 मे भी पूर्ण बहुमत से ले आये ।
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यह बात मेरी समझ मे तो आ गई, बात कडवी जरूर लग रही है लेकिन सत प्रतिशत कटु सत्य भी है । क्यों कि अटल जी के समय कारगिल हुआ तो हमने क्या उखाड़ लिया ,सैनिक भी शहीद हुए और एक चौटी 5353 भी गवाँ बैठे और युद्ध विराम करना पडा ।
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मनमोहन के समय कसाब घुसा तो हमने क्या उखाड़ लिया और अभी मनमोहन के समय सीमा पर सैनिकौ के सिर काट कर ले गये हमने क्या ऊखाड लिया। हाल ही कि ताजा घटना ले लो पढान कोट की हमने क्या ------------- .

मतलब की हमारे हाथ मे कुछ नही है ,करना जो भी हे वो अमेरिका को ही करना है ।
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इसका सबसे बडा कारण कोई माने या ना माने सिर्फ और सिर्फ़ भारत की सैना मजबूत नहीं होना है,वरना ना तो अमेरिका की हिमम्त होती और ना ही पाकिस्तान की।
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क्यों की जब भी मोदी जी कोइ देशहित का कार्य करने की कौशिश करते है तो उनकी घड़ी अमेरिका दबा देता है।
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ऐसी ही एक कौशिश माननीय अटल जी 1999 में की थी।
पोकरण परीक्षण और परीक्षण करके सजा भुगत चुके है। सजा क्या थी ? सजा थी कारगिल।
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मित्रों कारगिल अमेरिका की पाॅलिसी के तहत ही पाकिस्तान द्वारा किया गया था और कारगिल जीतने के लिए जिन लेसर गाइडेड बमों की आवश्यकता थी वो भारत बनाता भी नही था और दुसरे देशों को भी अमेरिका द्वारा चेतावनी दे दी गई थी कि कोई मदद नही करेगा। फलस्वरूप बैचारे अटल जी को अमेरिकन शर्तों को मानना पड़ा, झुकना पड़ा और तदनुसार हमें लेसर गाइडेड बम मिले ।

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आप कल्पना भी नही कर सकते हौ कि उन शर्तों के मानने के कारण अब ता जिन्दगी भारत ना कभी परमाणु परीक्षण कर सकता हैं और ना बने हुए का उपयोग बिना अमेरिकी परमिशन के कर सकता है और ना ही कोई स्वदेशी हथियार बना सकता है। इसके अलावा बहुराष्ट्रीय कम्पनीयाँ भारत मे अपने पैर पसारेगी, उनकी सशर्तो से व्यवसाय करेगी ।
मतलब की पाकिस्तान हमला कर भी दे तो भी हम बिना आका की इजाजत के कुछ नही कर सकते।
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मेरा यह सब बताने से तात्पर्य इतना सा है कि जब तलक भारत की सैना मजबूत नही होगी हम कुछ नही कर सकते चाहे वो किसी भी पार्टी का प्रधानमंत्री हो।
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समाधान :-
देश में राईट टू रिकॉल ग्रुप के प्रस्तावित कानून
राईट टू रिकॉल कानून
जूरी सिस्टम
पब्लिक नार्को टेस्ट
हथियार बद्ध नागरिक समाज कानून..
इत्यादि देश में लागू करवाने के लिये अपने सासंद से मैसेज कर मांग करें |