Pawan Jury BhilwaraRj
दिल्ली लोकपाल पद के लिए आवेदन
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महात्मा अरविन्द गांधी, मुख्यमंत्री, दिल्ली।
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हर्ष का विषय है कि आप दिल्ली से भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए लोकपाल क़ानून पास करने वाले है। मुझे जानकारी मिली है कि प्रस्तावित लोकपाल की नियुक्ति और बर्खास्तगी का अधिकार आपने खुद के पास ही बनाये रखा है। बधाई।
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मैं भी देश में भ्रष्टाचार की आपकी जंग में शरीक होकर इस दैवीय कार्य में भागीदारी करना चाहता हूँ। यदि आप मुझे लोकपाल के पद पर नियुक्त करें तो मैं आभारी रहूँगा तथा विश्वास दिलाता हूँ कि आपको निराश नही करूँगा।
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मैं निष्ठापूर्वक घोषणा करता हूँ कि मैं ऐसा कोई कार्य नहीं करूँगा जिससे आपकी पेशानी पर बल आये। यदि आम आदमी पार्टी के विधायक और सांसद आदि किसी भी प्रकार के भ्रष्ट आचरण में लिप्त पाये जाते है तो आप मुतमईन रहें कि अव्वल तो मैं उन पर कोई कार्यवाही ही नहीं करूँगा, और यदि कार्यवाही करनी भी पड़ी तो मैं मामले की जांच धीमा बनाये रखूँगा।
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मैं यह भी विश्वास दिलाता हूँ कि आपकी पार्टी के स्नेह भाजन और पसंदीदा अफसरों के मामलात भी मैं जांच के दायरे से बाहर रखूँगा।
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यदि कोई आपके खिलाफ किसी भी प्रकार का आरोप या शिकायत दर्ज करा देता है तो मैं आपको शपथपूर्वक आश्वस्त करता हूँ कि जैसा की आपने प्रस्तावित बिल में प्रावधान किया है उन अधिकारों का प्रयोग करते हुए शिकायतकर्ता को त्वरित रूप से हवालात में पहुंचा दूंगा।
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सार यह कि मेरी कार्य प्रणाली को आप इस सूत्र वाक्य में ग्रहण करें कि 'मैं आपके प्रति पूर्ण रूप से निष्ठा बनाये रखते हुए अपने कर्तव्य का पालन करूँगा'।
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चूंकि मेरी नियुक्ति में आपने विपक्ष के नेता की भी आंशिक भूमिका निश्चित की है अत: इसी आशय का एक पत्र मैंने बीजेपी के नेता-विपक्ष विजेंद्र जी गुप्ता को भी रवाना कर दिया है, और चूंकि मैं कांग्रेस से आपके मधुर सम्बन्धो से परिचित हूँ अत: शीला जी को भी मैंने विश्वास दिला दिया है कि उन पर लगाए गए आरोप मुझे शुरू से ही मिथ्या प्रतीत होते थे। लेकिन चूँकि मुझे पदच्युत करने का पूर्ण अधिकार आपने अपने पास रखा है अत: एक बार मेरी नियुक्ति के बाद आप जैसा भी आदेश करेंगे वैसे मैं इन पर कार्यवाही करने का रुख निश्चित करूँगा।
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एक अतिरिक्त निवेदन यह है कि, मैं कुछ समय से 'राईट टू रिकॉल लोकपाल' के उस प्रस्ताव की सार्वजनिक रूप से वकालत करता रहा हूँ जिसमे लोकपाल को नौकरी से निकालने और नियुक्त करने का अधिकार राज्य के मतदाताओ को दिया गया है, किन्तु भूतकाल की इन अनर्गल बातों से आप मन मैला न करें । मैं जानता हूँ कि जनता को ऐसे अधिकार दिए जाने की बातें आप पसंद नही करते, अत: अब मेरा भी मत आप इस आशय में ही समझें कि लोकपाल को नौकरी से निकालने का अधिकार जनता को नहीं दिया जाना चाहिए।
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कृपया एक बार सेवा का अवसर प्रदान करें --- आपका विश्वासपात्र
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सबे मर्जी 'सरकार' की !
मैं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में विश्वास रखता हूँ, अत: सभी को सुझाव दूंगा कि यदि आप भी लोकपाल बनना चाहते है तो इसी आशय का पत्र महात्मा अरविन्द गांधी को भेज सकते है। लोकपाल बनने के लिए सबसे पहले महात्मा अरविन्द गांधी को 'खुश करना' पड़ेगा। और जब तक आपको लोकपाल बने रहना है तब तक भी आपको महात्मा अरविन्द को 'खुश बनाये रखना' पड़ेगा। यदि अरविन्द जी किसी बात पर नाराज हो गए तो वो लोकपाल को नौकरी से निकाल देंगे !!
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भ्रष्टाचार विरोधी इस मुहीम में लोकपाल बनने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए, क्योंकि पद उसी को मिलेगा जिससे सरकार खुश हो जाएंगे।
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