Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब ने जम्मू कश्मीर को 80 हजार करोड़ का तोहफा दिया है और कहा है कि 'दिल्ली की तिजौरी पर तुम्हारा हक़ है, तथा भविष्य में हम आपको और भी उपहार देंगे' !!!
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मनमोहन सिंह जी कहा था कि 'भारत के प्राकृतिक संसाधनो पर पहला अधिकार मुस्लिमो का है'। और मोदी साहेब अब यह साबित कर रहे है कि मनमोहन सिंह सही थे !!!
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मोदी साहेब यह भी सिद्ध कर रहे है कि आतंक को भुगतान किया जाना चाहिए !!!
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सोनिया और केजरीवाल भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहे है !!!
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हालांकि कश्मीरी सिर्फ जूत खाने के लायक है। उनके पट्टे पड़ने चाहिए ताकि वे आतंकवाद से किनारा कर ले। आतंकवादियों को पैसे देने का मतलब सिर्फ उनके सामने समर्पण करना और उनकी विजय की घोषणा करना है।
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खबर के लिए इस लिंक को देखें ---
http://timesofindia.indiatimes.com/india/articleshow/49699348.cms ".
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मेरे विचार में कश्मीर की समस्या का समाधान है कि ------ हमें अपनी सेना की ताकत को उस सीमा तक बढ़ाना चाहिए कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, चीन और अमेरिका कश्मीर के अलगाव वादियों की मदद करना बंद कर दे। जब भारत की सेना इतनी मजबूत हो जायेगी सिर्फ तब ही जम्मू कश्मीर की समस्या का निपटारा हो सकेगा।
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कैसे हम भारत की सेना को मजबूत बना सकते है ?
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हमें वही तरीका इस्तेमाल करना चाहिए जिन तरीको का इस्तेमाल पश्चिमी देशो ने किया था। पश्चिमी देशो ने कारखानो की कार्यकुशलता बढ़ाने और अफसरों-नेताओं के भ्रस्टाचार को कम करने के लिए ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल, मल्टी-इलेक्शन और जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू की और जीएसटी, वैट और एक्साइज़ टैक्स के स्थान पर वेल्थ टैक्स ले आए। इससे कारखानो की उत्पादकता बढ़ी और उन्होंने अन्य वस्तुओं के साथ साथ हथियारों के निर्माण में भी विकास किया, फलस्वरूप वे मजबूत सेना खड़ी करने में सफल हुए। एक बार यदि भारत की सेना मजबूत हो जाती है तो अमेरिका, चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब आदि कश्मीर में अलगाव वादियों को सहायता देना बंद कर देंगे जिससे आतंकवाद लगभग ख़त्म हो जाएगा।
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सिर्फ 8 हजार करोड़ का खर्चा करके हम भारत में ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल, जनमत संग्रह और मल्टी-इलेक्शन प्रक्रियाएं लागू कर सकते है, लेकिन सोनिया-मोदी-केजरीवाल और उनके अंधभक्त इन प्रक्रियाओं का विरोध कर रहे है और देखिये हमें इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ रही है ----- हम जम्मू-कश्मीर को 80 हजार करोड़ रूपये का तावान अदा कर रहे है। वो भी सिर्फ कश्मीर के लिए। इसके अलावा हमें अपने बाजार के सभी क्षेत्रो को विदेशी कम्पनियो के लिए खोलने होंगे और इसी बाजार से मुनाफा कमाकर इन कम्पनियो के मालिक पाकिस्तान को कारगिल में घुसपैठ के लिए उकसाएंगे और पेड मिडिया के सहयोग से हार्दिक पटेल जैसो को उभारने और अरविंद केजरीवाल जैसे कपटियों को प्रधानमंत्री बनाने के प्रयास करेंगे। सेना कमजोर होने का खामियाजा हमें किस सीमा तक भुगतना पड़ेगा, इसकी कोई सीमा नहीं है।
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नागरिको और कार्यकर्ताओ से हमारा आग्रह है कि उन्हें सोनिया-मोदी-केजरीवाल की अंधभक्ति में अपनी ऊर्जा और समय नष्ट करने की जगह भारत में ज्यूरी सिस्टम, राईट टू रिकॉल, मल्टी-इलेक्शन और टीसीपी जैसी जनमत संग्रह प्रक्रियाएं लागू करने के प्रयास करने चाहिए। इन कानूनो की प्रस्तावित प्रक्रियाएं देखने के लिए इस लिंक को देखें ---- https://web.facebook.com/notes/pawan-kumar-jury/809761655808739
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