Pawan Jury BhilwaraRj
चूंकि इन ऐवार्डियो 84 के दंगो में अपने एवार्ड नहीं लौटाए इसलिए अब ये सरकार का विरोध करने का अधिकार खो चुके है, बेतुकी बात है। तुक वाली बात यह है कि देश के खनिज संसाधनो को धनिकों-नेताओ-अधिकारियों-जजो के गठजोड़ द्वारा लूटा जा रहा है, लेकिन ये सभी बुद्धिजीवी खनन से प्राप्त रॉयल्टी नागरिको के खाते में भेजे जाने का खामोश विरोध करते आये है।
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तुक वाली बात यह है कि, देश के सरकारी स्कूल और अस्पताल बदतरीन होते जा रहे है, खाद्य जिंसों और दवाइयों के दाम आसमान पर है। सिर पे छत डालने के लिए जमीन का एक टुकड़ा खरीदने में गरीब आदमी को पूरी उम्र पैसा जोड़ना पड़ता है, क्योंकि संपत्ति कर नहीं होने से जमीने लगातार अमीर वर्ग खींच रहा है, जिससे जमीनो की कीमते बढ़ती जा रही है। इन समस्याओ के कारण गरीबी और भुखमरी बढ़ रही है, लेकिन इनके समाधान के लिए राईट टू रिकॉल जिला शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, संपत्ति कर, और ज्यूरी सिस्टम जैसे कानूनो का सोनिया-मोदी-केजरीवाल के साथ साथ ये सभी बुद्धिजीवी भी विरोध कर रहे है।
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