Pawan Jury BhilwaraRj
मोदी साहेब के आम चुनावो में 'बहुमत' ले आने के पीछे 4 घटनाओ की बड़ी भूमिका थी :
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1. पूरे देश के मिडिया कर्मियों को बुलवाकर जालीदार टोपी न पहनने का फूटेज निकलवाना
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2. कैमरों के सामने अकबरुद्दीन औवेसी को भड़काऊ भासण देने और मोदी को निशाने पर लेने के लिए तैयार करना।
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3. सभी टीवी चेनल्स पर लगातार गोधरा के मुद्दे को उठाने के लिए भुगतान करना।
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4. मुजफ्फरपुर की घटना को फ्रेम करने के लिए मिडिया को पैसा देना।
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REVENGE IS THE PUREST EMOTION ----- MAHABHARAT
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कांग्रेस अपनी साख पूरी तरह से गवां चुकी थी, लेकिन फिर भी पूर्ण बहुमत लाना दूर की कौड़ी था। यदि पेड मिडिया उपरोक्त घटनाओं को करोड़ो नागरिको तक पहुंचाने से इंकार कर देता तो हिन्दुओ का ध्रुवीकरण करना सम्भव नहीं था। मोदी 230-240 सीटों के आस पास ठहर रहे थे, लेकिन पेड मिडिया के सहयोग से मोदी साहेब ने पांसा पलट दिया। शेष, विकास वगेरह दीगर मुद्दे है। अपील करते है, लेकिन जोश नहीं भरते। सोशल मिडिया पर मोदी साहेब को बढ़त मिली हुयी थी , लेकिन बहुमत के लिए नाकाफी थी। अटल-आडवाणी सीटों की ऊँची छलांग लगा पाए क्योंकि उस समय बाबरी ढाँचे के ध्वंस की गर्मी ठंडी नहीं हुयी थी। लेकिन 12 साल पुरानी घटना को 2014 में लोगों के स्मृति पटल पर ऐसे सजीव कर देना जैसे घटना कल ही घटी हो, सिर्फ पेड मिडिया के बूते की ही बात थी।
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कोई कुछ भी सफाई दे, लेकिन बीजेपी और ख़ास तौर पर मोदी साहेब का भविष्य ध्रुवीकरण पर ही टिका हुआ है। अब ये ध्रुवीकरण प्रायोजित दंगो और विवादित बयानों के गर्भ से पनपे या स्वभाविक घटनाओ से, मोदी साहेब की स्थिति मजबूत बनाये रखने के लिए पेड मिडिया नफरत के इस हवन में आहुति देता रहेगा।
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दादरी के संदर्भ में बिहार चुनाव निपट चुके है। उत्तर प्रदेश कतार में है।
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