Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

Pawan Jury BhilwaraRj:

प्रदुषण कम करने के लिए आवश्यक क़ानून बनाने की जगह न्यायधीश और नेता लोगो तक यह जानकारी फैला रहे है कि प्रदुषण बढ़ता जा रहा है। जाहिर है इसके लिए भी वे जनता को ही जिम्मेदार ठहराना चाहते है।
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प्रदुषण की समस्या से निपटने के लिए मुख्य न्यायधीश एच एल दत्तू ने अखबारों को यह खबर प्रमुखता से छापने को कहा है कि, 'दिल्ली में प्रदुषण बहुत ज्यादा है और सांस लेना भी जहर हो गया है'।
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http://www.dnaindia.com/india/report-supreme-court-concerned-over-alarming-pollution-level-in-delhi-2131912
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'किसी भी धार्मिक किताब में नहीं लिखा है कि दिवाली पर पटाखे चलाने चाहिए, ये प्रकाश का त्यौहार है, शोर का नहीं' --- जस्टिस यू डी साल्वे, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
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http://articles.economictimes.indiatimes.com/2015-09-28/news/66957893_1_firecrackers-bursting-crackers-plea
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पिछले साल हर्षवर्धन ने भी दीपावली पर पटाखे न चलाने की सलाह दी थी, और इन्हे प्रदुषण का जिम्मेदार ठहराया था। हर्षवर्धन से पूछा जाना चाहिए कि तब से अब तक उन्होंने दिल्ली में प्रदुषण कम करने के लिए कौनसे क़ानून सुझाए है।
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प्रदुषण विश्व व्यापी समस्या है, लेकिन इसका कम होना इस पर निर्भर करता है कि इसे कम करने के लिए किन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित किया जा रहा है। अखबार में छापने से और दिवाली पर आतिशबाजी पर रोक लगाने से प्रदुषण को कम नहीं किया जा सकता है। चीन इसके लिए ज्यादा से ज्यादा साइकिलों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन दे रहा है। लेकिन ऐसा प्रोत्साहन बयान देकर नही बल्कि विधिवत क़ानून-नीति बनाकर किया जा रहा है।
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http://www.royalhaskoningdhv.com/en-gb/news-room/news/dutch-chinese-experts-develop-beijing-bicycle-plan/4663
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https://www.youtube.com/watch?v=7LIEu4HJCI4
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मौजूदा हालात में हमारे शहरो में फुटपाथ नही है और सड़को पर प्राथमिक अधिकार कारो और दुपहिया वाहनो ने हड़प लिया है। इससे पैदल चलने वाले को सड़को में से गुजरना किसी युद्ध क्षेत्र से गुजरने का अनुभव देता है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमराई हुयी है, और सिटी बसो से उतरने वाले को देखकर लगता है कि वह अंदर कुश्ती लड़कर आया है। साइकिलो के लिए अलग से लेन न होने से रोड के किनारे चलने के बावजूद किसी भी समय किसी वाहन के चपेट में आने का खतरा बना रहता है। नतीजा निजी वाहनो का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है, और प्रदुषण नियंत्रक बोर्ड होने के बावजूद सभी उद्योग अपशिष्ट उगल रहे है।
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सड़को पर फुटपाथ बनाकर, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को दुरुस्त कर, साइकिल परिवहन के ढांचे का निर्माण कर, वाहनो पर जारी आयात शुल्क छूटो को समाप्त कर और उद्योगो एव प्रदूषण बोर्ड के बीच हुए विवादों का निपटारा ज्यूरी द्वारा करके इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे पैदल चलने और सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करने के लिए नागरिक प्रोत्साहित होंगे और उद्योगो द्वारा फैलाये जा रहे प्रदुषण में कमी आएगी।
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ये सब करने की जिम्मेदारी यूआईटी चेयरमेन, महापौर, भूतल परिवहन मंत्री, पर्यावरण मंत्री और प्रदुषण बोर्ड अध्यक्ष आदि की है। इन्हे हम महीने के महीने वेतन दे रहे है, इनके गाडी बंगले और स्टाफ का खर्च उठा रहे है लेकिन इन लोगो को व्यवस्थाओ में सुधार करने की न तो फुर्सत है न इच्छा।
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कारण -- इन्हे पता है कि ये सब काम न करने से भी जनता उनका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकेगी। उन्हें उनका वेतन महीने के महीने मिलता रहेगा, सुविधाये जारी रहेगी और नौकरी से हटाने की बात तो भूल ही जाइए। चाहे ये नेता कांग्रेस-बीजेपी या आप आदि किसी भी पार्टी के हो, सबका यही ढंग है। यदि इन्हे यह भय हो कि हमने अपना काम कुशलता से नहीं किया तो जनता किसी भी समय हमें नौकरी से निकाल देगी तो ये सभी पदाधिकारी अगले दिन ही इस समस्या के वास्तविक समाधान पर पूरे मनोयोग से पसीना बहाने लगेंगे।
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निकम्मे और भ्रष्ट पदाधिकारियों को नौकरी से निकालने का अधिकार जनता के पास होना राईट टू रिकॉल कहलाता है। यदि इन सभी पदो पर राईट तू रिकाल प्रक्रियाए लागू कर दी जाए तो नौकरी खोने के भय से ये सभी नेट/अधिकारी/जज आदि अनुशासित होकर मन लगा कर काम करेंगे या अपनी नौकरी गवाँयेगे।
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समाधान : अपने सांसद को एसएमएस करके राईट टू रिकॉल एवं ज्यूरी सिस्टम कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने का आदेश भेजे। प्रस्तावित ड्राफ्ट्स यहां देखे जा सकते है :
https://www.facebook.com/notes/pawan-kumar-jury/809761655808739
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