Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Pawan Jury BhilwaraRj:
बिहार चुनाव के नतीजों के बाद ज्यादातर परिपक्व और राष्ट्र के प्रति समर्पित मोदी-समर्थक मोदी साहेब तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहे है, जिनमें चुनावों में हार के कारणो के साथ साथ भविष्य में बीजेपी की स्थिति मजबूत करने के लिए आवश्यक व्यवहारिक सुझाव भी शामिल है। विडम्बना है कि प्रधानमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोई अधिकृत प्रक्रिया उपलब्ध न होने के कारण जमीन से जुड़े इन समर्पित कार्यकर्ताओ की आवाज घूम फिर कर यहीं पर Echo हो रही है।
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निचे एक प्रस्तावित प्रक्रिया का विवरण दिया गया है जिसके गैजेट में प्रकाशित होने से मोदी समर्थको को अपनी आवाज अधिकृत, पारदर्शी और संगठित रूप से प्रधानमंत्री के सम्मुख रखने का अवसर मिल जाएगा। स्तम्भ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किस तरह इस प्रक्रिया के आने से मोदी साहेब का आम नागरिको और उनके समर्थको से सीधे संवाद स्थापित हो जाएगा।
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=====ड्राफ्ट का आरम्भ=======
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1. [कलेक्टर के लिए निर्देश ]
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यदि कोई नागरिक मतदाता कलेक्टर कार्यालय में खुद हाजिर होकर कोई एफिडेविट प्रस्तुत करता है, तो कलेक्टर एक सीरियल नंबर जारी करेगा तथा प्रति पेज 20 रूपये का शुल्क लेकर नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ अमुक एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रख देगा, ताकि कोई भी नागरिक बिना लॉग-इन के इस शपथ पत्र को एफिडेविट देख सकें।
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2. [पटवारी के लिए निर्देश ]
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(2.1) यदि कोई नागरिक मतदाता धारा-1 के तहत रखे गए शपथपत्र पर अपनी हाँ या ना दर्ज कराने के लिए पटवारी कार्यालय में मतदाता कार्ड लेकर आये, तो पटवारी 3 रुपये का शुल्क लेकर नागरिक की मतदाता संख्या, नाम तथा उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करके रसीद दे देगा और इसे प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर दर्ज करेगा। गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए फीस 1 रूपये होगी ।
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(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी हाँ या ना, बिना किसी शुल्क के रद्द कर सकता है और तीन रुपये देकर बदल सकता है।
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(2.3) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम भी बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो, अंगुली के छाप को रसीद पर डाला जा सके | और मतदाता के लिए फीडबैक (पुष्टि) एस.एम.एस. सिस्टम बना सकता है |
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(2.4) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकते है, जिससे मतदाता अपनी हाँ या ना, 10 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके |
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3. [ सभी के लिए ]
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ये कोई जनमत-संग्रह नहीं है। यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता किसी शपथपत्र पर हाँ दर्ज कर देते है तो प्रधानमंत्री उस अर्जी पर कार्यवाही सकते हैं । प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा ।
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====== ड्राफ्ट की समाप्ति ==========
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ये क़ानून कैसे काम करेगा ?
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मान लीजिये कुछ मोदी समर्थक प्रधानमन्त्री तक यह बात पहुंचाना चाहते है कि उन्होंने बिहार इसीलिए गवां दिया क्योंकि वे विकास के मुद्दे से भटक गए थे, या कुछ का मानना है कि बिहार की हार का कारण हिंदुत्व की उपेक्षा रहा।
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ऐसी स्थिति में कोई भी समर्थक बतौर नागरिक अपने सुझाव या शिकायत या प्रस्ताव का विस्तृत विवरण एक शपथपत्र पर लिख कर उपरोक्त क़ानून की धारा 1 के तहत प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखवा सकेगा, ताकि अन्य मतदाता भी इस पर अपनी हाँ या ना दर्ज कर सके। जाहिर है ऐसे सैंकड़ो शपथपत्र विभिन्न नागरिको द्वारा दर्ज किये जाएंगे लेकिन प्रधानमन्त्री समयाभाव के कारण उन पर नहीं देंगे। (धारा 1 देखें)
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लेकिन मान लीजिये कि किसी शपथपत्र में दर्ज सुझावों से लाखों नागरिक सहमत हो जाते है अत: धारा 2 का प्रयोग करते हुए अमुक अर्जी पर अपनी हाँ दर्ज कर देते है। ऐसी स्थिति में लाखों या करोड़ो नागरिको द्वारा अनुमोदित शपथपत्र प्रधानमन्त्री का ध्यान खिंचेगा और वे उस पर कार्यवाही करने को गंभीरता से लेंगे। (धारा 1 देखें)
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गौरतलब है कि समर्थको की भावनाओ और आशंकाओ का ध्यान रखते हुए मोदी साहेब को 'सेफ' करने के लिए इस प्रस्तावित क़ानून की धारा 3 में यह प्रावधान रखा गया है कि 'इस सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री का निर्णय अंतिम होगा' (धारा 3 देंखे)
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कुल मिलाकर यदि मोदी साहेब इन धाराओं को गैजेट में प्रकाशित कर देते है तो मोदी समर्थको के साथ साथ देश के अन्य सभी नागरिको को भी अपनी बात अधिकृत एवं पारदर्शी रूप से प्रधानमन्त्री के सामने रखने का अवसर मिल जाएगा।
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मैं पूर्ण रूप से आश्वस्त हूँ कि यदि इस प्रक्रिया की जानकारी मोदी साहेब तक पहुँच जाती है तो वे मिनिट से पहले ही इस या ऐसी ही प्रक्रिया की रचना कर देंगे जिससे वे नागरिको से सीधा संवाद स्थापित कर सके। असल में मोदी साहेब पर काम का बहुत प्रेशर है और इतने बड़े देश को चलाने के लिए उन्हें देश विदेश के सैकड़ो विषयो पर जानकारी जुटा कर निर्णय लेने पड़ते है। वो पहले ही 24 में से 18 घंटे काम कर रहे है। आखिर कोई कितना करेगा। समयाभाव के कारण उन्हें जनता की नब्ज़ टटोलने के लिए अमित शाह, भागवत अरुण जेटली और क्षेत्रीय नेताओ पर निर्भर रहना पड़ता है और यहीं से गड़बड़ी होने की संभावना शुरू हो जाती है।
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यह कोई कहने की बात नहीं है कि मोदी साहेब और उनके डिप्टी शाह को छोड़कर बीजेपी के लगभग सभी नेता निकम्मे है और अपने घोड़े को छाया में बाँधने में लगे रहते है। आम नागरिक और छोटे कार्यकर्ता, नेता मोदी साहेब तक अपनी बात पहुंचा नहीं पा रहे कि जनता क्या चाहती है, और उन्हें घेरे बैठे नेताओ को निजी स्वार्थ के कारण देश के बारे में सोचने का अवकाश नहीं मिलता। इसलिए मोदी समर्थको और खुद मोदी साहेब के लिए यह जरुरी है कि मोदी साहेब से सीधे ही संवाद स्थापित करने की एक प्रक्रिया की रचना की जाए।
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कैसे हम मोदी साहेब तक यह बात पहुंचा सकते है कि इन तीन धाराओ को गैजेट में प्रकाशित किया जाए ?
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देखिये, अगर हम मोदी साहेब से व्यक्तिश: रूप से मिलकर उन्हें यह जानकारी देने की कोशिश करेंगे तो एपॉइंटमेंट मिलने में ही महीनो या सालो गुजर जाएंगे। उनकी वेबसाइट पर भी रोज की हजारो अर्जियां दर्ज होती है जिन्हे उनका स्टाफ देखता है, उन तक ये अर्जियां नहीं पहुँच पाती। लेकिन एक आदमी ऐसा है जो उनसे नियमित संपर्क में रहता है और जब चाहे अपनी बात व्यक्तिगत रूप से उन्हें बता सकता है ---- 'हमारा सांसद'
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असल में मोदी साहेब अपने 273 सांसदों के वोट से ही पीएम की कुर्सी पर बने हुए है। आपको यह कितना ही अजीब और अव्यवहारिक लगे किन्तु सच्चाई यह है कि यदि कल सांसद संसद में मोदी के खिलाफ वोट करके जेटली को समर्थन दे देते है तो जेटली पीएम बन जाएगा और जनता अगले 5 सालो तक इन सांसदों का कुछ भी नही बिगाड़ सकेगी। तो तकनिकी तौर पर हमने अपने सांसद को और सांसद ने मोदी साहेब को चुना है। लेकिन जादुई बात यह है कि हम अब अपने सांसद को अगले 5 वर्ष तक नौकरी से नहीं निकाल सकते, लेकिन सांसद जब चाहे मोदी साहेब से समर्थन वापिस ले सकते है। इस तरह से सांसदों के प्रसाद पर्यन्त ही प्रधानमंत्री की नौकरी चलती है।
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किसी क्षेत्र का सांसद चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, उस संसद कक्ष में बैठता है जहां प्रधानमंत्री बैठते है। अत: उन्हें मिलने के लिए कोई एपॉइंटमेंट नहीं लेना पड़ता। संसद कक्ष में तो सभी साथ साथ ही बैठते है। कोई भी प्रधानमंत्री किसी सांसद को मिलने से इंकार नहीं करेगा। इसलिए सिर्फ सांसद ही है जिसके माध्यम से हम अपनी बात मोदी साहेब तक पहुंचा सकते है।
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हमें अपने सांसद को यह तीन लाइने एसएमएस द्वारा भेजनी चाहिए और कहना चाहिए कि वो प्रधानमंत्री से इन्हे गैजेट में प्रकाशित करने को कहे। यदि सांसद ने ये तीन धाराएं किसी सादे कागज़ पर लिखकर मोदी साहेब को दे दी तो यह तय है कि मोदी साहेब इन्हे तुरंत लागू कर देंगे। क्योंकि इन्हें लागू करने के लिए किसी संसद सत्र को बुलाकर बिल पास करने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ मोदी साहेब इस पर अपने साइन करके गैजेट में छपवा देंगे तो यह क़ानून देश में लागू हो जाएंगे।
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सांसद से मांग करने के बावजूद भी अगर यह क़ानून गैजेट में प्रकाशित नहीं किया जाता है तो इसका मतलब है कि हमारे सांसद ने यह मांग मोदी साहेब तक नहीं पहुंचाई। क्योंकि अधिकतर सांसदों को जब भी मोदी साहेब से मिलने का मौका मिलता है तो वे अवसर गँवाना नहीं चाहते और खुद के मतलब की बात करके लौट आते है। जनता की मांग की वे तब ही परवाह करते है जब उन पर दबाव बने।
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ऐसा दबाव बनाने के लिए यह जरुरी है कि ज्यादा से ज्यादा नागरिक और कार्यकर्ता अपने सांसदो से यह स्पष्ट मांग करे कि इस क़ानून को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
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सांसद के सामने कैसे अपनी मांग रखें ?
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मेरा सुझाव है कि हमें अपने सांसद के सामने मांग इस तरह से रखनी चाहिए कि वह अधिकृत हो और ज्यादा से ज्यादा नागरिक भी आसानी से इसमें शामिल हो सके। इसलिए मैं अनुशंषा करता हूँ कि हमें अपने मोबाइल से अपने सांसद को इस तरह का एसएमएस भेजना चाहिए :
माननीय सांसद, मैं आपको आदेश देता हूँ कि इस लिंक में दर्ज कानूनी ड्राफ्ट को गैजेट में प्रकाशित किया जाए -- www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186
मतदाता संख्या : ######
अथवा
Hon MP, I order you to print mentioned law-draft in gazette -- www.facebook.com/pawan.jury/posts/809753852476186
voter ID no : #######
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(1) इसमें आदेश शब्द का प्रयोग इसीलिए किया गया है कि तकनिकी और संवैधानिक रूप से हम सांसद के मालिक है और हमने ही मतदान के माध्यम से चुनाव आयोग को यह आदेश दिया था कि अमुक व्यक्ति को सांसद की नौकरी दे दी जाए। अत: हमें सांसद को आदेश ही भेजने चाहिए निवेदन वगैरह नहीं।
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(2) इस सन्देश में एक लिंक दर्ज किया है जिसे क्लिक करके सांसद हमारे आदेश का विस्तृत विवरण पढ़ सकते है। इस लिंक में ऊपर दी गयी तीनो धाराओ को दर्ज कर दिया गया है। यदि आप यह आदेश अपने सांसद को भेजना चाहते है तो इस लिंक को क्लिक करें और इन तीनों धाराओ को कॉपी करके अपनी वॉल पर पेस्ट कर ले। तब आपकी वाल पर पेस्ट किये गए पोस्ट का लिंक अपने सांसद को भेज दें। इस तरह इस ड्राफ्ट के लेखक आप हो गए है तथा सांसद आपके द्वारा भेजे गए एसएमएस में दर्ज लिंक को क्लिक करेंगे तो वे आपकी वॉल पर इन धाराओ को पढ़ सकेंगे।
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(3) यदि आप इस एसएमएस में अपनी मतदाता संख्या दर्ज नहीं करते है तो आपके आदेश की कोई कीमत नहीं है। क्योंकि आपने यह दर्ज नहीं किया कि यह आदेश कौन दे रहा है। जिस तरह आप वोट का आदेश तब कर पाते है जब आप मतदान केंद्र में अपना वोटर आई डी कार्ड लेकर जाते है, उसी तरह यह आवश्यक है कि आप अपना वोटर आई डी नंबर एसएमएस आदेश भेजते समय भी दर्ज करे।
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(4) सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का यह सबसे आसान और कम खर्चीला तरीका है। इस तरह से किसी भी क्षेत्र के वो सभी नागरिक अपनी मांग रख सकेंगे जिनके पास मोबाइल फोन है। और ऐसी मांग वे सिर्फ 1 मिनिट से कम समय में भेज सकते है।
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(5) यहां यह स्वाभाविक प्रश्न उठता कि क्या कोई सांसद ऐसे एसएमएस पर कार्यवाही करेगा ? बिलकुल करेगा। क्योंकि मांग रखने की प्रक्रिया आसान और कम खर्चीली होने के कारण ज्यादा लोग इसमें सहभागी होते जाएंगे और जितने ज्यादा नागरिक एसएमएस करेंगे सांसद पर दबाव लगातार बढ़ता जाएगा। सांसद को यह जानकारी रहेगी कि इतने हजार लोग यह मांग कर रहे है। सड़क पर उतरने वाले झुण्ड की बात सांसद इसीलिए नहीं मानते, क्योंकि वे यह जानते है कि अमुक मांग सिर्फ यह 100-200 का झुण्ड ही कर रहा है, ज्यादा नागरिक नहीं।
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इस प्रक्रिया के आने से देश के करोड़ो नागरिको को किसी भी विषय पर अपना समर्थन/विरोध/सुझाव/प्रस्ताव/शिकायत आदि प्रधानमंत्री के सम्मुख संगठित रूप से रखने का अवसर मिल जाएगा और सच्चे लोकतंत्र की स्थापना होगी। यह क़ानून देश के सभी करोड़ो नागरिको को अपनी आवाज पारदर्शी और अधिकृत रूप से अपने प्रधानमंत्री के सम्मुख रखने का अवसर देता है अत: सभी नागरिको और कार्यकर्ताओ से आग्रह है कि वे अपने सांसद से इस 'पारदर्शी शिकायत प्रणाली - टीसीपी' क़ानून ड्राफ्ट को गैजेट में प्रकाशित करने की मांग करें।
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