Pawan Jury BhilwaraRj

(1.10) उन नेताओं, बुद्धिजीवियों की निंदा कैसे करें जो 'जनता की आवाज - पारदर्शी शिकायत प्रणाली' का विरोध करते है ?
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पारदर्शी शिकायत प्रणाली इससे ज्यादा या कम कुछ नहीं कहता कि ---- यदि कोई नागरिक अपनी शिकायत प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखना चाहता है तो उसे ऐसा करने की अनुमति दी जाए।
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=====ड्राफ्ट का आरम्भ=======
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1. [कलेक्टर (और उसके क्लर्क) के लिए निर्देश ]
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कोई भी नागरिक मतदाता, यदि खुद हाजिर होकर, एफिडेविट पर अपनी सूचना अधिकार का आवेदन अर्जी / भ्रष्टाचार के खिलाफ फरियाद / कोई प्रस्ताव या कोई अन्य एफिडेविट कलेक्टर को देता है और प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर रखने की मांग करता है, तो कलेक्टर (या उसका क्लर्क) उस एफिडेविट को प्रति पेज 20 रूपये का लेकर, सीरियल नंबर देकर, एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर रखेगा, नागरिक के वोटर आई.डी. नम्बर के साथ, ताकि सभी बिना लॉग-इन के वे एफिडेविट देख सकें ।
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2. [पटवारी के लिए निर्देश ]
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(2.1) कोई भी नागरिक मतदाता यदि धारा-1 द्वारा दी गई अर्जी या एफिडेविट पर आपनी हाँ या ना दर्ज कराने मतदाता कार्ड लेकर आये, तो 3 रुपये का शुल्क लेकर पटवारी नागरिक का मतदाता कार्ड संख्या, नाम, उसकी हाँ या ना को कंप्यूटर में दर्ज करके रसीद दे देगा। नागरिक की हाँ या ना प्रधानमंत्री की वेब-साईट पर आएग । गरीबी रेखा के नीचे के नागरिकों के लिए फीस 1 रूपये होगी ।
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(2.2) नागरिक पटवारी के दफ्तर जाकर किसी भी दिन अपनी हाँ या ना, बिना किसी शुल्क के रद्द कर सकता है और तीन रुपये देकर बदल सकता है ।
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(2.3) कलेक्टर एक ऐसा सिस्टम भी बना सकता है, जिससे मतदाता का फोटो, अंगुली के छाप को रसीद पर डाला जा सके | और मतदाता के लिए फीडबैक (पुष्टि) एस.एम.एस. सिस्टम बना सकता है |
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(2.4) प्रधानमंत्री एक ऐसा सिस्टम बना सकता है, जिससे मतदाता अपनी हाँ या ना, 10 पैसे देकर एस.एम.एस. द्वारा दर्ज कर सके |
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3. [ सभी के लिए ]
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ये कोई रेफेरेनडम (जनमत-संग्रह) नहीं है | यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, जज, सांसद, विधायक, आदि पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं होगी । लेकिन यदि भारत के 40 करोड़ नागरिक मतदाता, किसी अर्जी, फरियाद पर हाँ दर्ज करें, तो प्रधानमंत्री उस फरियाद, अर्जी पर ध्यान दे भी सकते हैं या ऐसा करना उनके लिए जरूरी नहीं है, या प्रधानमंत्री इस्तीफा दे सकते हैं । प्रधानमंत्री का निर्णय अंतिम होगा ।
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====== ड्राफ्ट की समाप्ति ==========
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अब यदि कोई नेता अथवा कोई बुद्धिजीवी किसी भी आधार पर पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून-ड्राफ्ट की धारा 1 का विरोध करता है तो मेरे जैसा ‘जनता की आवाज - पारदर्शी शिकायत प्रणाली’ का समर्थक यह कहते हुए उस नेता, बुद्धिजीवी को कोस सकता है कि ------ 'तुम नहीं चाहते कि महिला मतदाता, दलित मतदाता, गरीब मतदाता, वरिष्ठ नागरिक मतदाता, किसान, मजदूर आदि अपनी शिकायत प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर डाल सके'। और मैं उस पर महिला विरोधी, दलित विरोधी, गरीब विरोधी, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी आदि होने का आरोप लगाते हुए उसकी निंदा कर सकता हूँ। यही कारण है कि सभी बुद्धिजीवी, नेता आदि पारदर्शी शिकायत प्रणाली के क़ानून-ड्राफ्ट का विरोध करते है, लेकिन किसी भी नेता, बुद्धिजीवी ने आज तक इस क़ानून-ड्राफ्ट का सार्वजनिक रूप से विरोध करने का साहस नहीं किया है। इसलिए 'जनता की आवाज - पारदर्शी शिकायत प्रणाली' के समर्थको को चाहिए कि वे बुद्धिजीवियों, नेताओं आदि से 'जनता की आवाज पारदर्शी शिकायत प्रणाली' के क़ानून-ड्राफ्ट की धारा 1 से 3 पर अपना विचार सार्वजनिक रूप से रखने को कहे। जब कार्यकर्ता उनसे ऐसा आग्रह करेंगे तो ये बुद्धिजीवी, नेता आदि बेचैन हो जाएंगे और विषय को टालने के लिए हाँ , हूँ करना शुरू कर देंगे।
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मैं पारदर्शी शिकायत प्रणाली के समर्थक कार्यकर्ताओ से अनुरोध करूंगा कि वे पारदर्शी शिकायत प्रणाली पर इसकी तीनो धाराओ के संदर्भ में चर्चा करे। कृपया बुद्धिजीवीयों एवं नेताओ से पुछिए कि 'आप क्यों नागरिकों की किसी शिकायत को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर आने देने से मना करते हैं, अथवा आप क्यों पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून-ड्राफ्ट की धारा 1 का विरोध करते हैं ? यह उस नेता और बुद्धिजीवी को इस हद तक रक्षात्मक बना देगा, कि वह अपना बचाव बिलकुल नहीं कर सकेगा। तब इन नेताओ, बुद्धिजीवियों के समर्थको को यह समझाना सरल हो जायेगा कि ये लोग गरीब/आम नागरिको के विरोधी और धनिकों के समर्थक है। कृपया ध्यान दें कि किसी नेता बुद्धिजीवी से बातचीत करने का प्रयोजन उसे इस बात पर मनाने का नहीं है कि पारदर्शी शिकायत प्रणाली अच्छा क़ानून है, क्योंकि धनवान लोगों का कोई भी ऐजेंट इस कानूनी ड्राफ्ट से कभी सहमत नहीं होगा। बातचीत का उद्देश्य नेता, बुद्धिजीवी की सच्चाई उनके भक्तो-समर्थकों के सामने लेकर आना है, कि वह नेता, बुद्धिजीवी अमीरों का ऐजेंट है और गरीबो का समर्थक होने का सिर्फ दिखावा कर रहा है।
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इस प्रकार सच्चे, राष्ट्रवादी और गरीब समर्थक कार्यकर्ता उस नेता, बुद्धिजीवी का साथ छोड़ देंगे जिससे अमुक नेता, बुद्धिजीवी की ताकत घटेगी और पारदर्शी शिकायत प्रणाली के समर्थको की संख्या बढ़ेगी। उत्तरोत्तर पारदर्शी शिकायत प्रणाली के समर्थक बढ़ते और इन कानूनो का विरोध करने वाले नेता और बुद्धिजीवी घटते चले जाएंगे। इन कार्रवाइयों से इस बात की उम्मीाद बढ़ेगी कि प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री 'जनता की आवाज - पारदर्शी शिकायत प्रणाली' पर हस्ताक्षर करने को बाध्य हो।
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(1.11) 'जनता की आवाज - पारदर्शी शिकायत प्रणाली को लागू करवाने में आप कैसे मदद कर सकते हैं ?
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इसी पुस्तक के अध्याय 13, मैं मैंने चालीस छोटे छोटे उपायों की सूची प्रस्तुत की है। प्रति सप्ताह सिर्फ दो से चार घंटे का समय देकर आप इस कानूनी ड्राफ्ट को भारत में लागू करवाने में सहायता कर सकते है। कृपया विस्तृत विवरण के लिए अध्याय 13 देखें।
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(1.12) किसी ने इस बारे में पहले क्यों नहीं सोचा ?
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नेता और बुद्धिजीवी पूछ सकते है, कि यदि यह तीन पंक्तिंयों का क़ानून-ड्राफ्ट गरीबी कम कर सकता है तो पहले किसी ने इस बारे में क्यों नहीं सोचा ? लेकिन यदि किसी ने इस बारे में पहले कभी नहीं सोचा, इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा कानून हो ही नहीं सकता। उदाहरण के लिए रोमन और यूनानियों ने शहरों/साम्राज्यों के लेखे रखे, ज्यामिति और तर्कशास्त्र में काफी प्रगति की लेकिन अंकगणित की खोज नहीं कर सके। इसी प्रकार इनकास और माया ने कैलेण्डर बनाए, महल बनाए, पुल बनाए लेकिन वे भी पहले अंकगणित के शून्य की खोज नहीं कर सके थे। यह प्रस्तावित जनता की आवाज -पारदर्शी शिकायत प्रणाली का क़ानून-ड्राफ्ट राजनैतिक अंकगणित का शून्य है । ठीक उसी प्रकार जैसे अंकगणित का शून्य सदियों तक खोजा नहीं जा सका, उसी प्रकार राजनीतिक अंकगणित का शून्य अब तक खोजा नहीं जा सका। इसमें किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
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(1.13) कैसे 'जनता की आवाज -पारदर्शी शिकायत प्रणाली' राजनैतिक अंकगणित का शून्य है ?
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जैसे अंकगणित का शून्य अंकगणित में कठिन से कठिन सवाल को आसान बना देता है और गणित की अन्य शाखाओं में सुधार ले आता है। ठीक उसी प्रकार पारदर्शी शिकायत प्रणाली का क़ानून अनेक कानूनों जैसे नागरिकों और सेना को खनिज रॉयल्टी , रॉइट टू रिकॉल (भ्रष्ट को बदलने का अधिकार) आदि को लागू करना आसान कर देता है। उदाहरण के लिए XLVII और XXII को जोड़ने का प्रयास कीजिए, और फिर 47 और 23 को जोड़ने का प्रयास कीजिए। आप जान जाएंगे कि कैसे शून्य के आविष्कार ने जोड़ को सरल बना दिया है। और इसी प्रकार XLVII को XXII से गुणा करने का प्रयास कीजिए और 47 का 22 से गुणा कीजिए। इसके बाद XLV को IX से भाग दीजिए, और तब 45 को 9 से भाग दीजिए। और ये तो केवल दो ही अंक वाली संख्याएं है। कृपया चार छह अंकों वाले रोमन संख्याओं और फिर दशमलव के साथ जोड़, घटाव, गुणा, भाग का प्रयास कीजिए। इस प्रकार, जैसे शून्य आधारभूत अंकगणितीय प्रश्नों जैसे जोड़-बाकी ,गुणा-भाग को सरल बना देता है, उसी प्रकार पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून अन्य राजनितिक समस्याओ के समाधान के लिए आवश्यक कानूनो को नागरिको की सहमति से बनाना आसान कर देता है।
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‘जनता की आवाज - पारदर्शी शिकायत प्रणाली ठीक उसी प्रकार काम करती है जैसे अंकगणित में शून्य काम करता है। ये इस बात को सिद्ध करने अथवा सिद्ध नहीं करने के काम को आसान बनाता है कि बहुमत किसी प्रस्ताव को पसन्द करता है या नहीं। और इस प्रकार यह नागरिकों के जरिये अधिकारियों पर नियंत्रण करने के कार्य को आसान बनाता है। राजनीति यह नहीं है कि कैसे शासक नागरिकों पर शासन करेगा, बल्कि यह इस बारे में है कि नागरिकों के धन को हड़पे जाने से कैसे शासक को रोका जा सकता है। पारदर्शी शिकायत प्रणाली क़ानून इस अच्छी राजनीति को आसान बनाता है।
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(1.14) सारांश
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मैंने यह बताया कि कैसे सिर्फ 3 लाइनों का यह टीसीपी कानून गरीबी, पुलिस में भ्रष्टाचार आदि को कम करेगा। यदि आपको यह कानून पसंद आया है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि पारदर्शी शिकायत प्रणाली की उपरोक्त तीन धाराओ को गैजेट में प्रकाशित किया जाए। इस क़ानून को पारित करवाने के लिए आपका यह छोटा सा कदम सबसे महत्त्वपूर्ण है। कृपया इसके बाद इसी पुस्तक का अध्याय 13 जरूर पढ़े। अध्याय 13 में उन कार्यों की सूची दी गई है जिनका पालन करके कोई भी कार्यकर्ता इस क़ानून को देश में लागू करवाने में सहायता कर सकता है। और यदि भारत भर में केवल 2 लाख कार्यकर्ता भी एक सप्ताह में सिर्फ 2 से 4 घंटे इन कार्यो का अनुपालन करें तो भारत की व्यवस्था में चमत्कारिक सुधार आ सकते है। इस क़ानून को लागू कराने के लिए सिर्फ आपके समय की आवश्यकता है दान ,चंदे आदि के रूप में किसी प्रकार के धन की नही।
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