Pawan Jury BhilwaraRj

सिर्फ सैनिक ही सेना नही है। हमें सैनिको से इतर सेना के महत्त्व को भी समझना चाहिए।
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भारत में ज़्यादातर नागरिक सेना से मतलब सैनिक लेते है, जो कि एक भयंकर भूल है और हम इसका खामियाज़ा भुगत रहे है। किसी भी प्रकरण या घटना के उपरांत यह देखा गया है कि सैनिको की बहादुरी और समर्पण की महिमा गायी जाती है (गाया भी जाना चाहिए), लेकिन हम इसी स्तुति गान के साथ सेना की परवाह की इति कर देते है, जो कि घातक है।
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भारत के सैनिक अपेक्षाकृत अधिक अनुशासित और देशहितो के प्रति समर्पित है, लेकिन किसी भी सेना के मजबूत होने का मापदंड सैनिको के साहस और जज्बे पर निर्भर नही करता।
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सेना हथियारों पर निर्भर करती है। सैनिको के पास जितने बेहतर हथियार है सैनिक उतना ही बेहतर प्रदर्शन करते है। आप ऐसे साहसी और देशभक्त सैनिक से क्या उम्मीद करेंगे जो अपनी थ्री नोट थ्री से मशीनगन धारी दुश्मन से मुकाबला कर रहा हो। फिर आप यह भी चाहते है कि वह अपने जज्बे का प्रदर्शन करते हुए खुद की जान देश पर कुर्बान कर दे, ताकि आप उसकी महिमा गा सके।
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इसी बेवकूफाना हिमाकत के कारण हमारे सैनिक अपनी जान गवां रहे है, और इसके जिम्मेदार वे सभी लोग है जो बढ़ चढ़ कर शहादत का यशोगान गाते है, लेकिन सैनिको और सेना को आधुनिक हथियार दिए जाने का विरोध करते है।
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अपने सेना के हथियारों की तुलना अन्य देशो की सेनाओं से कीजिये, तो आप पायेंगे कि हमने सैनिको को राम-भरोसे छोड़ा हुआ है।
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यदि आप सैनिको का सम्मान करते है तो उन्हें शहीद होने के लिए मत उकसाइए, बल्कि सरकार से उन कानूनों की मांग कीजिये जिससे हम स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन करके सेना को मजबूत और सैनिको को सुरक्षित बना सके।
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तो आइन्दा जब भी आप सेना या सैनिक का विचार करे तो जो चीज सबसे पहले आपके दिमाग में आनी चाहिए वो हथियार है, न कि बावर्दी सैनिक।
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जूरी सिस्टम और राईट टू रिकाल कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करवाकर हम स्वदेशी आधुनिक हथियारों का उत्पादन करके अपनी सेना को मजबूत बना सकते है। यदि आप इन कानूनों का विरोध करते है तो अप्रत्यक्ष रूप से आप भारत की सेना को कमजोर बनाने में सहयोग कर रहे है, और युद्ध/हमलो के दौरान होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार है।
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