Pawan Jury BhilwaraRj
विज्ञापन ड्राफ्ट - 2
.
जूरी सिस्टम के विस्तृत विज्ञापन के लिए ड्राफ्ट :
_____________
.
राईट टू रिकाल पार्टी (शीर्षक)
.
ग्रीस में जूरी सिस्टम होने के कारण ही सिकन्दर विश्वविजेता बन पाया था।(उपशीर्षक)
.
न्याय में देर ही अंधेर है - किसी भी व्यवस्था के सभी क़ानून रद्दी हो जाते है यदि उन्हें तोड़ने पर दोषी को त्वरित गति से दंड नही दिया जाता। भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमें लंबित है तथा यह बोझ लगातार बढ़ रहा है।भारत की न्याय व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हमने जूरी सिस्टम का कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है, जिसके गेजेट में प्रकाशित होने पर 90% मुकदमो का फैसला 10-15 दिनों के भीतर आने लगेगा और न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में कमी आएगी।
.
जूरी सिस्टम क्या है ?
.
इस प्रणाली में दंड देने की शक्ति नागरिको के अधीन होती है, तथा नागरिक मंडल बहुमत से फैसले देते है। किसी भी मुकदमे की सुनवाई के लिए नागरिको की जूरी बुलाई जाती है जिनका चयन जिले की मतदाता सूची में से लॉटरी (रेंडमली) द्वारा किया जाता है। प्रत्येक मुकदमे के लिए अलग जूरी होती है तथा यही नागरिक सुनवाई करके बहुमत से फैसला देते है। हमने 12 नागरिको की जूरी का प्रस्ताव किया है। हाईकोर्ट जूरी में नागरिको की संख्या 250 तक होगी, जिनका चयन राज्य की मतदाता सूचियों में से किया जाएगा। इस विधि में नागरिक सर्वोच्च होते है तथा संविधान और क़ानून की व्याख्या का अधिकार प्रजा के पास होता है।
.
जूरी सिस्टम का देश के आर्थिक और सामरिक विकास पर प्रभाव :
.
भारत की सबसे बड़ी समस्या तकनीक में पिछड़ना है जिस कारण हमारा निर्यात गिर रहा है, आयात बढ़ रहा है और हम विदेशी क़र्ज़ में डूबते जा रहे है। स्वदेशी तकनीक में पिछड़ने के कारण हम आधुनिक हथियारों का निर्माण नही कर पा रहे है जिससे हम सैन्य दृष्टी से अन्य देशो पर निर्भर बने हुए है। भारत के स्वदेशी तकनीक में पिछड़ने का मुख्य कारण जूरी सिस्टम का अभाव है। जज सिस्टम में दंड देने की शक्ति मुट्ठी भर जजों के हाथ में होती है, अत: बहुराष्ट्रीय कम्पनियां वकील एवं जज से गठजोड़ बना कर फैसलों को आसानी से अपने पक्ष में मोड़ लेती है। वर्षो तक फैसले न आने से छोटी इकाइयो का कारोबार जांच एजेंसियों और अदालतों की फाइलों में बंद हो जाता है और स्वदेशी इकाइयां छीजती जाती है। हर मुकदमे के लिए अलग से जूरी होने तथा नागरिको के बहुमत से फैसला होने से जूरी सिस्टम स्वदेशी इकाइयों को सरंक्षण प्रदान करता है और तकनीक का विकास होता है। यही कारण है कि जिन जिन देशो में जूरी सिस्टम आया वहां की स्वदेशी इकाइयां तेजी से फूली फूली और वे देश आर्थिक और सामरिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो गए।
.
देश के तकनिकी, औद्योगिक, आर्थिक एवं सैन्य विकास का जूरी सिस्टम तथा राईट टू रिकाल कानूनों से गहरा सम्बन्ध है। ग्रीस में 2500 वर्ष पहले से जूरी सिस्टम मौजूद था लेकिन उतरोत्तर कमजोर होता गया । 12 वीं शती में ब्रिटेन ने जूरी सिस्टम अपनाया और 16 शताब्दी आते आते ब्रिटेन दुनिया का सबसे विकसित देश बना। यूरोप का पुनर्जागरण और औद्योगिक क्रान्ति जूरी सिस्टम की ही देन थी। अमेरिका में जूरी सिस्टम1750 ईस्वी में आया, और आज अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर देश इसीलिए है क्योंकि अमेरिका में सबसे मजबूत जूरी सिस्टम तथा राईट टू रिकाल कानूनी प्रक्रियाएं है।
.
यह एक दिलचस्प तथ्य है कि भारत के नागरिको, कार्यकर्ताओं, क़ानून के छात्रों आदि को जूरी सिस्टम के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी क्यों नहीं है । दरअसल किसी भी क़ानून की किताब में तथा आकादमिक पाठ्यक्रम में जूरी सिस्टम के बारे में जिक्र नही किया गया है। ज्यादातर नागरिक यह जानकर विस्मित हो जाते है कि इसी दुनिया में ऐसे कई देश मौजूद है जहाँ दंड देने की शक्ति नागरिको के पास है। लेकिन भारत के नागरिको को सुनियोजित ढंग से इस महत्त्वपूर्ण जानकारी से वंचित रखा गया है।
.
पाठ्यपुस्तक लेखको की नियुक्ति राजनैतिक होती है तथा सभी नेता सकारात्मक कवरेज के लिए मिडिया पर निर्भर करते है। यह खुली हुयी बात है कि भारत के सभी बड़े मिडिया समूह बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के नियंत्रण में है । चूंकि जूरी सिस्टम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को भारी नुकसान पहुंचाता है, इसलिए सभी बड़े मिडिया समूह नागरिको से यह जानकारी छुपाते आ रहे है। यही कारण है कि आप किसी भी कानूनविद्, स्तंभलेखक, बुद्धिजीवी आदि को जूरी सिस्टम के बारे लिखते हुए नही देखेंगे, और यही हाल खबरिया टीवी चेनल्स का भी है। वे इस तथ्य से भली भाँती परिचित है कि यदि आम नागरिको तक यह जानकारी पहुँच जाती है तो वे तुरंत भारत में इस प्रणाली की मांग करना शुरू कर देंगे, जिससे दंड देने की शक्ति उनके हाथो से निकल कर आम नागरिको के हाथ में चली जायेगी।
.
भारतीय संविधान भी न्यायपालिका व्यवस्थापिका एवं प्रशासन के स्वतंत्र एवं पृथक्करण की अवधारणा को प्रतिपादित करता है। अत: शासन के इन तीनो अंगो को प्रजा के अधीन होना चाहिए। किन्तु मौजूदा व्यवस्था में लोकतंत्र के इन तीनो स्तंभों पर प्रजा का कोई नियंत्रण नही है। अत: जूरी सिस्टम और राईट टू रिकाल कानूनों को लागू करके इन तीनो अंगो को प्रजा के अधीन किया जा सकता है।
.
राईट टू रिकाल क्या है ?
.
भ्रष्ट को नौकरी से निकालने का अधिकार नागरिको के पास होना राईट टू रिकाल है। अमेरिका में जज तथा जिला पुलिस प्रमुख को नौकरी से निकालने का अधिकार वहां के नागरिको के पास है। इससे नेता-पुलिस-जज गठजोड़ टूट जाता है तथा ये अधिकारी जनता के हितो के लिए कार्य करते है। जापान तथा चीन में भी नागरिको के पास आंशिक रूप से राईट टू रिकाल प्रक्रियाएं है। हमने भारत में भी जज, पुलिस प्रमुख, शिक्षा अधिकारी आदि पदों के लिए राईट टू रिकाल प्रक्रियाएं प्रस्तावित की है। जिनके ड्राफ्ट नीचे दिए गए है।
.
शासन की मशीन को क़ानून चलाते है। अच्छे क़ानून अच्छा देश बनाते है, और बुरे क़ानून बुरा। भारत की सामरिक-आर्थिक-शैक्षिक व्यवस्था को सुधारने तथा भ्रष्टाचार-गरीबी-बेरोजगारी की समस्याओं को हल करने के लिए हमें जूरी सिस्टम तथा राईट टू रिकाल जैसे अच्छे कानूनों को भारत में लागू करवाने की जरुरत है।
.
नागरिको के लिए : संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वे देशहित में आवश्यक आदेश अपने जनप्रतिनिधियों को भेजे। यदि आप इन कानूनों का समर्थन करते है तो, अपने सांसद को SMS भेज कर जूरी सिस्टम तथा राईट टू रिकाल कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करने की मांग करे तथा अन्य नागरिको से भी ऐसी मांग करने को कहे। जूरी सिस्टम क़ानून की प्रक्रिया के ड्राफ्ट का लिंक नीचे दर्ज किया गया है। जब करोड़ो नागरिक ऐसी मांग करेंगे तो प्रधानमन्त्री जनसमर्थन का सम्मान करते हुए इन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित कर देंगे।
.
सांसद को भेजे जाने वाले SMS का नमूना
.
Hon mp, I order you to mentioned law draft in gazzate : tinyurl.com/JuryNichliCourt
Voter ID : ######
.
अपनी मांग को प्रमाणिक बनाने के लिए SMS में अपनी मतदाता संख्या अवश्य करें । नागरिक प्रमाणिक प्रक्रिया के बारे जानने के लिए smstoneta.com वेबसाईट देखें।
.
अधिक जानकारी के लिए राईट टू रिकाल ग्रुप के किसी भी कार्यकर्ता से संपर्क करे।
.
जूरी सिस्टम का क़ानून ड्राफ्ट यहाँ देखें : tinyurl.com/JuryNichliCourt
राईट टू रिकाल जज के लिए : tinyurl.com/RtrJilaJaj
.
पारदर्शी शिकायत प्रणाली (टी सी पी) : सिर्फ तीन लाइन का यह क़ानून देश के करोड़ो नागरिको को अपनी शिकायत/सुझाव प्रधानमन्त्री के सम्मुख स्पष्ट, अधिकृत एवं पारदर्शी तरीके से रखने की प्रक्रिया उपलब्ध कराता है। ड्राफ्ट यहाँ देखें : tinyurl.com/PrintTcp
.
प्रस्तावित अन्य 120 क़ानून ड्राफ्ट्स के लिए : righttorecall.info/301.h.pdf
फेसबुक समुदाय : facebook.com/Groups/Righttorecallparty/
.
*राष्ट्रहित में सूचनार्थ यह विज्ञापन सामान्य नागरिको के अंशदान द्वारा दिया गया है।
_________________