Pawan Jury BhilwaraRj

आखिर क्यों सोनिया-मोदी-केजरीवाल/स्मृति जुबिन ईरानी आदि आईआईएम की प्रवेश परीक्षा (कैट/CAT) को हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं में आयोजित किये जाने का विरोध कर रहे है ?
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भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा बहु-वैकल्पिक प्रकार की होती है, जिसमे अभ्यर्थी को A,B,C,D,E के विकल्पों में से उत्तर चुनना होता है। इस प्रश्न-पत्र का आसानी से हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया जा सकता है।
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यदि कोई छात्र कैट जैसी परीक्षा पास कर सकता है, तो निश्चित रूप से वह आगे चलकर अंग्रेजी भाषा सीख सकता है।
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यदि कैट परीक्षा हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में ली जाती है, तो इससे हिन्दी और स्थानीय भाषी छात्रों के पास होने के अवसर कई गुना बढ़ जायेंगे। इससे उन छात्रों को तरक्की करने में आसानी होगी जिन्होंने अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में शिक्षा ग्रहण नही की है। तब चेतन भगत और उसके जैसे अन्य बुद्धिजीवियों(कु) के हाथ से उन लोगो का मजाक उड़ाने का अवसर निकल जाएगा, जिनकी अंग्रेजी कमजोर है।
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चेतन भगत जैसे मनोरंजन कर्ताओं को अलग करके भी देखें तो मोदी-सोनिया-केजरीवाल-सिब्बल-स्मृति आदि भी कैट परीक्षा हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में लिए जाने का विरोध कर रहे है।
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ये देशी और विदेशी राजा इस प्रस्ताव का विरोध क्यों कर रहे है, यह आप इनसे ही पूछे तो बेहतर है।
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मेरा प्रस्ताव है कि जहां तक सम्भव हो प्रवेश प्रतियोगी परीक्षाओं को अंग्रेजी के साथ साथ हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी आयोजित किया जाना चाहिए।
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इस प्रस्ताव को राईट टू रिकाल शिक्षा मंत्री के कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करके लागू किया जा सकता है। जब शिक्षा मंत्री प्रजा अधीन हो जाएगा तब शिक्षा मंत्री स्वत: ही प्रजा के हितो के लिए काम करने लगेगा, और अधिकतम प्रवेश परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र हिन्दी तथा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे।
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प्रारम्भिक चरण में हम कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, उड़िया और तमिल भाषाओं में अनुवादित प्रश्न-पत्र से शुरुआत कर सकते है।
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