Pawan Jury BhilwaraRj

क्या आप जानते है कि असल में दूरदर्शन के मुखिया मोदी साहेब है---- इसलिए मिडिया को 'भांड मिडिया', 'दलाल मिडिया' या 'बिकाऊ मिडिया' कहने का मतलब है कि आप मोदी साहेब पर दलाल होने का आरोप लगा रहे है । और उनके मंत्री वी के सिंह ने तो इससे भी गिरा हुआ शब्द इस्तेमाल किया था ।
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हमारे विचार में सार्वजनिक जीवन में खुले तौर पर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए । मोदी साहेब के अंधभक्त तो गावदी है, लेकिन मंत्रियो को संयम बरतना चाहिए ।
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हालांकि सच्चाई यही है कि, दूरदर्शन जमीन, संसाधन, स्टाफ और दर्शक संख्या के लिहाज से सबसे बड़ा समाचार समूह है । और मोदी साहेब ही दूरदर्शन के मुखिया है, अत: मोदी साहेब ही भारत में सबसे शक्तिशाली मिडिया अधिकारी (या जो भी आप कहना चाहे) है ।
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इसलिए अगली बार जब आप मिडिया और इसके मालिको पर 'सभ्य' शब्दों में लानत भेजे तो, यह ध्यान रखे कि सबसे ज्यादा कीचड़ आप मोदी साहेब पर ही फेंक रहे है । वैसे दूरदर्शन खबरों को छुपाने में निजी चेनल्स से भी 5 कदम आगे है । आखिर दूरदर्शन अपने दर्शको को क्यों नही बता रहा है कि बुलेट ट्रेन भारतीय अर्थ व्यवस्था को गंभीर नुक्सान पहुंचाने वाली है, तथा इसके आने से भारत पर डॉलर का इतना बोझ पड़ेगा कि चुकाते चुकाते हमारी कमर टूट जायेगी । क्या कोई मोदी-भक्त बतायेगा की, क्यों मोदी साहेब ने दूरदर्शन को यह सब खबरे दिखाने से मना किया है । क्या अब मोदीभक्त मोदी साहेब को उन शब्दों से सुशोभित कर सकते है, जिनसे वो अन्य पत्रकारों और मिडिया मालिको को नवाजते है ।
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प्राइवेट न्यूज़ चेनल्स का बाजार लगातार इसीलिए बढ़ रहा है क्योंकि, दूरदर्शन बदहाल अवस्था में है । और मोदी साहेब ने अभी तक दूरदर्शन की हालत सुधारने के लिए शून्य कार्य किया है । न तो मनोरंजन क क्षेत्र में न ही खबरों के क्षेत्र में ।
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समाधान : दूरदर्शन अध्यक्ष को प्रजा अधीन किया जाए, ताकि जनता भ्रष्ट अध्यक्ष को नौकरी से निकाल सके ।
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अपने क्षेत्र के सांसद को यह आदेश SMS द्वारा भेजें :
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Hon MP, I order you to print the law draft mentioned in tinyurl.com/RtrDdAdhyaksh
voter ID : ####
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