Pawan Jury BhilwaraRj
उच्चतम न्यायलय में व्यक्तिनिष्ठ (साक्षात्कार) चयन प्रक्रियाओं के आधार पर नियुक्तियों के लिए आरक्षण का प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट ।
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नागरिक बन्धुओ,
राईट टू रिकाल ग्रुप ने आरक्षण की वर्तमान विसंगतियों को दूर करने तथा दलितों की सहमती से आरक्षण को कम करने के लिए विभिन्न कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किये है । दलितों की सहमती से आरक्षण कम करने के मुख्य प्रस्ताव को आप निम्नांकित लिंक पर देख सकते है :
tinyurl.com/AarakshanGhatao
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SC/ST/OBC वर्ग में जो व्यक्ति संपन्न हो चुके है, उनके लाभों को घटाकर उसी वर्ग के शेष पिछड़े हुए व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए । इस सम्बन्ध में प्रस्तावित ड्राफ्ट इस लिंक पर देखा जा सकता है :
tinyurl.com/AarakshanGhatao2
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अहिंदू धर्मावलंबियो के आरक्षण लाभों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित क़ानून ड्राफ्ट का लिंक :
tinyurl.com/AarakshanGhatao1
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यह स्तम्भ उच्चतम न्यायलय में न्यायधीशों की नियुक्ति के सम्बन्ध में लिखा गया है । प्रस्तावित क़ानून जिन पदों की नियुक्ति लिखित परीक्षा के माध्यम से की जाती है, उनमे SC/ST/OBC वर्ग के लिए अनिवार्य आरक्षण सुनिश्चित करता है । यदि नियुक्ति साक्षात्कार के माध्यम से की जाती है तो प्रधानमन्त्री सरकारी आदेश से ऐसे पदों पर आरक्षण लागू कर सकेंगे ।
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यदि आपको प्रस्तुत ड्राफ्ट या आरक्षण से सम्बंधित प्रस्तावित अन्य ड्राफ्ट्स के स्पष्टीकरण में किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता महसूस होती है, तो कृपया अपने शहर में स्थित किसी भी रिकालिस्ट या राईट टू रिकाल ग्रुप के कार्यकर्ता से संपर्क करें । वे आपको इस ड्राफ्ट को समझने में सहयोग करेंगे । आप संपर्क करने के लिए उन्हें राईट टू रिकाल ग्रुप के फेसबुक समुदाय पर खोज सकते है । आप उन्हें फोन कर सकते है, उनसे मिल सकते है या फेसबुक समुदाय पर उनसे संवाद कर सकते है । यदि आप इस प्रस्तावित ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा यह आदेश करें कि इस कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए ।
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======सांसद को भेजे जाने वाले SMS आदेश का ड्राफ्ट का प्रारम्भ======
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Hon MP, I order you to print the law draft mentioned in http://tinyurl.com/AarakshanGhatao3
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=====SMS ड्राफ्ट की समाप्ति=====
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सांसद के लिए सूचना
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सांसद महोदय, यदि आपको SMS द्वारा इस क़ानून को गेजेट में प्रकाशित करने के लिए सन्देश प्राप्त होता है तो, इसे सन्देश भेजने वाले मतदाता का आदेश माना जाए न कि इस स्तम्भ के लेखक का ।
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=======कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ=========
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सेक्शन- 1
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(1) (प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश)
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सैन्य विभाग के अलावा यह अधिनियम संघीय सरकार द्वारा वित्त पोषित तथा संघीय सरकार के अधीन कार्यरत सभी संस्थाओं/विभागों/इकाइयों पर लागू होगा । यह अधिनियम सभी न्यायलयों तथा विश्वविद्यालयों पर लागू होगा ।
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(2) (प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश)
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यदि कोई संस्था किन्ही पदों पर नियुक्ति के लिए सामान्य चुनावी प्रक्रिया के स्थान पर साक्षात्कार या व्यक्तिनिष्ठ प्रक्रिया या किसी अवस्तुनिष्ठ प्रक्रिया का प्रयोग करती है तो प्रधानमन्त्री को यह अधिकार होगा कि वे अमुक पदों की चयन प्रक्रिया के लिए जातिगत आधार पर SC/ST/OBC वर्ग हेतु आरक्षण लागू करने के लिए सरकारी आदेश जारी कर सकेंगे ।
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(3) प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश)
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अब से उच्चतम न्यायलय में 7% पद SC के लिए, 14% पद ST के लिए तथा 25% पद OBC के लिए आरक्षित रहेंगे । प्रतिशत द्वारा निर्धारित पदों का पूर्णांक प्राप्त करने के लिए प्रथम 5 वर्षो तक छोटी संख्या तथा अगले 5 वर्षो तक बड़ी संख्या को आधार बनाया जाएगा । यदि उच्चतम न्यायलय में न्यायधीशों की नियुक्ति का आधार अवस्तुनिष्ठ चयन होता है तो यह अधिनियम ऐसी नियुक्तियों पर लागू होगा । यदि नियुक्ति का आधार सामान्य चुनाव है तो आरक्षण जारी रहेगा । यदि चयन का आधार वस्तुनिष्ठ है, तो आरक्षण लागू नहीं होगा ।
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सेक्शन-2 : टी सी पी - जनता की आवाज के प्रावधान :
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(टी सी पी.1) [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में कोई संशोधन करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा । कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर स्कैन करके दर्ज करेगा और बदले में छपी हुयी रसीद देगा ।
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(टी सी पी.2) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता इस अधिनियम के किसी सेक्शन, अनुच्छेद या धारा में संशोधन चाहता है या टी सी पी की धारा एक के तहत दर्ज किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ या ना दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू लेकर उसे दर्ज करेगा तथा मतदाता की हाँ/ना को उसकी मतदाता पहचान संख्या के साथ प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर डाल देगा ।
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(टी सी पी.3) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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यदि किसी शपथपत्र पर कुल मतदाताओं के 51% मतदाता हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमन्त्री ऐसे शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है, या इस्तीफा दे सकते या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नही है । प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा ।
========ड्राफ्ट की समाप्ति=======