Pawan Jury BhilwaraRj
भारत की सेना और आरएसएस अपने आप में भारत के सबसे विराट और उपयोगी संगठन है ।
भारत की सेना के पास बाढ़, भूकंप, आंधी पानी आदि में फंसे हुए लोगो को निकालने के लिए आला दर्जे के उपकरण जैसे रस्सियाँ, नावें, चप्पू, यात्री ढोने वाले चोपर आदि है, तथा इन सभी उपकरणों का निर्माण भी भारत ही करता है, अर्थात हमारी सेना बचाव कार्यो में आत्मनिर्भर है । जहां तक हथियारों की बात है, हमारी सेना आयातित हथियारों पर चलती है । मतलब युद्ध से आयी तबाही के बाद बचाव और राहत कार्यो के लिए हम अपनी सेना पर भरोसा कर सकते है ।
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पाकिस्तान के उलट भारतीय सेना अनुशासित है तथा आदेशो का पालन करती है इसलिए उन कानूनों में सुधार के लिए आवाज नही उठा सकती जिन कानूनों के आने से भारत हथियारों और युद्ध में भी आत्मनिर्भर बन सकता है, अत: भारतीय सैनिक जो है उन्ही आयातित हथियारों से काम चलाने के लिए मजबूर है । जहाँ तक नागरिको का प्रश्न है उन्होंने भी भारतीय सेना को आपदा राहत दल के रूप में स्वीकार कर लिया है तथा सेना का हाल नेताओं पर छोड़ दिया है ।
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आरएसएस राहत एवं बचाव कार्यो को कुशलतापूर्वक संचालित करने के लिए 1925 से ही मेहनत कर रहा है । आरएसएस के स्वयंसेवक किसी भी राष्ट्रीय आपदा में मानव सेवा का कार्य लगन से करते है । राष्ट्रीय आपदाओं के अलावा भी स्वयंसेवक कम्बल बांटने, खून इकठ्ठा करने, पेड़ लगाने, प्याऊ चलाने, खाना पीना बांटने, आदि सेवा कार्य करते है जो कि श्रेयस्कर है ।
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राहत कार्यो में चुस्ती बनाए रखने के लिए स्वयंसेवक रोज सुबह शाखा जाकर कबड्डी खो खो तथा आदि हलके व्यायाम करके खुद को हर समय तैयार बनाए रखते है । समयांतर पर पथ संचलन, चिंतन शिविर आदि उपक्रम भी किये जाते है, ताकि स्वयंसेवको को वैचारिक डोज़ मिले और उनका उत्साह बना रहे ।
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जहाँ तक देश की अदालतों, सेना और मंदिरों को सुधारने के लिए आवश्यक राईट टू रिकाल और जूरी सिस्टम जैसे कानूनों की बात है, स्वयंसेवको ने यह काम बीजेपी के नेताओं को हेंडओवर कर दिया है ।
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अब बचे नागरिक, तो उनके पास आरएसएस है, सेना है, और नेता तो है ही । फिर नागरिको को क्यों इन कानूनों की फ़िक्र करनी चाहिए !!
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