Pawan Jury BhilwaraRj
यह हिला देने वाला वाकया है । आज से 90 वर्ष पहले भी अपनी बात लोगो और शासको तक पहुँचाने के लिए असेम्बली में बम फेंकना पड़ा था, और आज भी नागरिक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे है ।
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गांधीवाद ने जनता की नसों में उतर कर नेताओं को दबंग और सीनाजोर बना दिया है ।किसान दुखी कम क्षुब्द और गुस्से में ज्यादा था । दुखी व्यक्ति सार्वजनिक रूप से ऐसा नही करता ।
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क्या ही अच्छा होता यदि उस किसान के पास बन्दूक होती ।नागरिको के पास हथियार न होने ने नेताओं की आयु बढ़ा दी है ।
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आँखों के सामने किसान की आत्महत्या के बाद केजरीवाल ने भाषण में कहा कि पुलिस ने किसान को नही बचाया, इसमें पुलिस की राजनीति हो सकती है । आशुतोष ने कहा कि मैं केजरीवाल से कहूँगा कि आइन्दा ऐसा हो तो वे खुद मंच से उठकर जाएँ, शाखाओ पर चढ़े और किसान को उतार लायें ।
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यदि कोई नागरिक राईट टू शूट की क़ानून की भी मांग करते है तो, किसी को बुरा नही मानना चाहिए ।
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मोदी साहेब ने कहा है कि वे किसानो के साथ है । आश्चर्य नही अगर कुछ ही घंटो में कांग्रेस इसी बयान को दोहरा दे ।
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समाधान : टी सी पी
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