Pawan Jury BhilwaraRj

राजनेतिक पार्टियों में आतंरिक लोकतंत्र के स्तर
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1. कोंग्रेस : माँ, बेटे और बेटी दामाद ड्राइंग रूम में बैठकर जो तय करते है, उसे इनके भक्त लोकतंत्र कहते है । यदि कोई कार्यकर्ता नर्म लहजे में भी कोई विपरीत सुझाव दे तो ऐसी हरकत अनुशासन हीनता के दायरे में आती है ।
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2. बीजेपी : ये स्वयंभू लोकतांत्रिक पार्टी कोंग्रेस से ज्यादा लोकतांत्रिक पार्टी है, क्योंकि इसमें लोकतंत्र 4 सदस्यों से विस्तारित होकर 15 सदस्यीय पार्लियामेंट्री बोर्ड तक हो गया है । इस लिहाज से बीजेपी, कोंग्रेस से 4 गुना ज्यादा लोकतांत्रिक पार्टी है । अनुशासनहीनता यहाँ भी बर्दाश्त नही की जाती ।
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3. आम पार्टी : यहाँ आतंरिक लोकतंत्र इतना आंतरिक है कि, कई नेता पूर्व में पार्टी छोड़ने का ठीकरा आंतरिक लोकतंत्र के सिर फोड़ चुके है, और दर्जन भर नेताओं में आंतरिक लोकतंत्र को कब्जाने की सिर फुटौवल जारी है ।

चूंकि अभी तक आंतरिक लोकतंत्र के सिर्फ दो ही मॉडल ( बीजेपी, कोंग्रेस ) मौजूद है, अत: आम पार्टी किसी तीसरे प्रकार के मॉडल को अंगीकार करने की प्रक्रिया में है, किन्तु कुछ जम नहीं पा रहा । दिक्कत यह है कि केजरीवाल चाहते है कि आंतरिक लोकतंत्र उन से शुरू होकर उन पर ही ख़त्म हो जाए, जबकि अन्य महत्त्वाकांक्षी नेता फैसलों में खुद की भागीदारी भी देखना चाहते है । मतलब अनुशासन हीनता कर रहे है ।

योगेन्द्र यादव के लिए बुरी खबर यह है कि, अन्य पार्टियों की तरह आम पार्टी में भी अनुशासनहीनता के एवज में कड़ी कार्यवाही की जा सकती है ।
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जिस प्रकार भारतीय लोकतंत्र में एक बार वोट करने के बाद अगले 5 वर्ष तक मतदाताओं के पास लोकतंत्र का तमाशा देखने के सिवा कोई विकल्प नही रहता, उसी प्रकार अमुक पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास भी चुनाव के दौरान नारे लगाने, टोपी पहन कर गलियों की ख़ाक छानने, मतदाताओं से वोट देने की चिरौरी करने, जाजम और कुर्सियां उठाने आदि गतिविधियों को करने के बाद आंतरिक लोकतंत्र की नौटंकी देखने के सिवा कोई अन्य रास्ता नही बचता ।
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समाधान : भारत के राजनेतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए राईट टू रिकाल ग्रुप द्वारा प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट यहाँ से डाउनलोड करे ।

rahulmehta .com/301.htm
( please search word 'election reforms' )

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प्रजा अधीन राजा @ pk