Pawan Jury BhilwaraRj

संस्मरण
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24 फ़रवरी को आपात परिस्थिति में दुर्ग एक्सप्रेस के सेकंड क्लास स्लीपर (अवातानूकूलित) से यात्रा करने के दौरान कुछ दुस्वप्न से दो चार होना पड़ा ।

1. तारीख 25 को सुबह 9 बजे से रात्रि 11 बजे तक, बोगी नम्बर S-11, S- 10, S- 9 तथा S- 8 के किसी भी शौचालय में पानी नही था । सभी यात्री अपने अपने तरीके से अधिकारियों और व्यवस्था को कोस रहे थे । TT लगभग नदारद थे, अगले स्टेशन पर पानी भरने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद पानी नही भरा जा सका । पूरे दिन यात्री हाथ 'वगेरह' धोने के लिए मिनरल वाटर का इस्तेमाल करते देखे गए ।

शाम 5 बजे के एक स्टेशन पर पानी चढाने के प्रयास असफल इसीलिए रहे, वाटर प्रेशर कम था।

आप नादान है, यदि आप सोच रहे है कि हस्त प्रक्षालन के लिए किसी भी वाश बेसिन में साबुन घोल के पात्र उपलब्ध थे ।

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2. किसी भी बोगी के चार्जिंग पॉइंट काम नही कर रहे थे, अमूमन यात्रियों को गले में चार्जर लटकाए, इधर से उधर घूमते देखा जा सकता था ।

दरवाजे के पास स्थित एक मात्र जो चार्जिंग सोकेट काम कर रहा था, उसमे वेटिंग चल रही थी, तथा बारी बारी से फोन तथा लेपटोप चार्ज किये जा रहे थे ।
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3. पानी की बोतल का 20 रूपया वहां भी वसूल किया जा रहा था, जहाँ पानी की बोतल का रेट 15 रू अंकित था । ( शायद रेल नीर तथा कुल्हड़ के फैसलों को वापिस ले लिया गया है )
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4. पूरी यात्रा के दौरान सभी स्टेशन पर तथा ट्रेन के भीतर भी केमिकल, सेक्रिन तथा कृत्रिम रंजको से युक्त एक मटमैले रंग का गर्म पेय पतले प्लास्टिक के पारदर्शी कपो में बेचा जा रहा था ।

25-50 पैसे की कीमत के इस रासायनिक गर्म पेय के 7 रूपये वसूले जा रहे थे ।

24 घंटे की यात्रा के दौरान कहीं भी चाय या कोफ़ी उपलब्ध नही थी ।
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5. रेलवे का मानना है कि फल खाना स्वास्थ्यकर है, अत: 18 बोगी की इस ट्रेन में पेंट्री उपलब्ध नही थी, सागर स्टेशन केंटिन ने भोजन उपलब्ध कराया, जैसा कि रेलवे केंटिन में पाया जाता हैं ।
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6. 24 घंटे की यात्रा ट्रेन ने 27 घंटे में पूरी की, विकलांगो, दृष्टिहीनो तथा भीख पर गुजारा करने वालो की रेलमपेल तथा अस्वच्छता, गन्दगी आदि उल्लेखनीय नहीं है ।
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समाधान : टी सी पी क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किये जाने पर करोड़ो नागरिको की सहमती से राईट टू रिकाल रेल मंत्री तथा स्टेशन प्रबंधक कानूनों को भारत में लागू किया जा सकेगा । राईट टू रिकाल क़ानून के अभाव में सभी सरकारी संस्थाओं का ढांचा चरमरा जाता है, तथा कुप्रबंधन को प्रोत्साहन मिलता है । यदि नागरिक किसी भी समस्या की शिकायत या समाधान के लिए कानूनी ड्राफ्ट सरकार के सम्मुख रखना चाहता है, ताकि करोड़ो नागरिक ऐसी शिकायत या प्रस्ताव पर अपनी अधिकृत राय रख सके, तो ऐसा टी सी पी क़ानून के लागू होने से किया जा सकेगा ।
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अपने क्षेत्र के सांसद को SMS द्वारा ऑर्डर भेजे कि टी सी पी क़ानून को गेजेट में प्रकाशित किया जाए ।
( sms का नमूना कमेन्ट बॉक्स में देखें )

टी सी पी - जनता की आवाज, का कानूनी ड्राफ्ट दिए गए लिंक पर देखें :
tinyurl .com/teenlinekanoon

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यदि आपने ट्रेन में सूटकेस को अपनी बर्थ से बाँध कर रखने के लिए, लॉक वाली चेन खरीदी है, तो आपका सूटकेस चोरी होने की संभावना बढ़ जाती है ।

ट्रेन में चेन बेचने वाले से जब आप लॉक चेन खरीद कर उसे यह इशारा दे देते है, कि आपके सूटकेस में छुपाने और सहजने योग्य कुछ कीमती सामान है ।
यह सूचना चेन विक्रेता अपने साथी को देता है, तथा वह चाबी भी देता है, जो कि उस ताले को खोल देती है, जो उसने आपको बेचा है ।

आप चेन से अपना सूटकेस बाँध कर थोड़ा सुरक्षित महसूस करेंगे, और आपका ध्यान सूटकेस की निरंतर हिफाजत से हट जाएगा ।

झाडू लगाकर पैसे इकट्ठे करने वाला बालक इसकी रेकी करने आएगा, तथा जब तक आप स्टेशन पर एक मिनिट के लिए भी उतरेंगे या रात में सोयेंगे, तब आपका सूटकेस चुराया जा सकता है ।
मै ऐसा अनुमान इसलिए व्यक्त करता हूँ कि, एक सहयात्री ने अपना सामान तब गवांया जब कि उसने 10 मिनिट पहले ही चेन खरीद कर ताला लगाया था ।

* सभी चेन, लॉक बेचने वालो को संदेह के दायरे में खड़ा करना मेरा हेतु नहीं है । यात्री सतर्कता बरते ।

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बिलासपुर स्टेशन देखकर एयरपोर्ट का धोका होता है ।

चमकते और साफ़ सुथरे फर्श, सुनियोजित स्टाल्स यहाँ तक कि जगह जगह लगे चार्जिंग सॉकेट । यहाँ आपको सभी कुछ साफ़ सुथरा एवं सुसंगत लगेगा । सब कुछ व्यवस्थित । पहली नजर में ही देखकर आभास हुआ कि यहाँ सबकुछ असामान्य है, यानी हर चीज पर पूरे से भी अधिक ध्यान दिया गया था ।

क्या यह स्टेशन भारतीय रेल मंत्रालय के अधीन नहीं आता ?

यह प्रश्न लेकर जब मैं स्टेशन पर प्रबंधक पी. के. बाली के पास पहुंचा, तो वे उनके कक्ष में उपस्थित नही थे ।

अभियंता अनुभाग से जानकारी मिली कि बिलासपुर एक मॉडल स्टेशन है, तथा हमेशा से ही इसी तरह से सुप्रबंधित रहा है । किन्तु यह प्रश्न अनुत्तरित ही रहा कि, बिलासपुर जैसे कितने जंक्शन और है, जो कि 'कागजो' में मॉडल जंक्शन में सूची बद्ध है ।

जहां तक व्यवहार की बात है, बिलासपुर स्टेशन के बराबर तो छोड़िये, इसके आसपास के स्तर का भी जंक्शन मेरी निगाह में देखने को नहीं आया है ।
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सवाल है कि, क्या भारत के सभी जंक्शन तथा स्टेशन इस स्तर के बनाए जा सकते है ?

समाधान स्तम्भ में पहले ही बताया जा चुका है, कि टी सी पी क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने से यह परिवर्तन सम्भव है ।

हालांकि यह जानकारी उपलब्ध नही है कि विलासपुर के सुप्रबंधन को देखते हुए रेल मंत्रालय ने इसे मॉडल स्टेशन का दर्जा दिया या वाकयी मॉडल स्टेशन की ऐसी कोई सूची मौजूद है ।

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प्रजा अधीन राजा @ pk