Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Vinod Prajapat:
दिल्ली 2014 के चुनावो ने यह बता दिया है की बहुराष्ट्रीय कम्पनियो द्वारा पोषित मीडिया अब नमो, भाजपा, आरएसएस , विहिप और उनके कार्यकर्ताओ से कही अधिक शक्तिशाली है। और उसका कारन है कार्यकर्ताओ की अंधभक्ति।
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इसका समाधान यह है की कार्यकर्ता भाजपा /कांग्रेस /आप /आरएसएस / आदि संगठनो के पीछे समय बर्बाद न करे और कुछ जरुरी कानूनी प्रक्रियाओ का समर्थन करे जो Bharat की समस्याएं जैसे की FDI , आतंकवाद , धर्म परिवर्तन , भ्रस्टाचार , कमजोर उद्योग , कमजोर सेना , गो हत्या , धरा 370 , बांग्लादेशी मुद्दा आदि समस्याओं का समाधान हो सके।
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बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के मालिको ने दिसंबर 2013 में यह भी भी दिखा दिया था की कैसे पेड मीडिया का उपयोग करके वे कैसे 15 % या उसके अधिक वोट केजरीवाल की तरफ मोड़ सकते है। और नमो को कैसे प्रधानमंत्री बनाने से रोक सकते है। इसी कारन नमो को उनकी सारी मांगे जैसे की रेलवे , रक्षा आदि क्षेत्रो में FDI माननी पड़ी। यहाँ तक ज़ी एम फ़ूड की मांग भी स्वीकार कर ली।
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इसीलिए पेड मीडिया ने 1 feb से नमो राग गाना चालू कर दिया और एक बड़ी जीत मिली। अब feb 2015 में पेड मीडिया केजरीवाल की तरफ है और नमो और भाजपा परेशानी में दिख रहे है।
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राष्ट्रवादियो ने ऐसे किसी कानून की मांग नमो से नहीं करी बल्कि अंधभक्ति में लीं हो गए इसी कारन बहुराष्ट्रीय कम्पनियो को एक नकली हीरो अरविन्द केजरीवाल बिठाने का मौका मिल गया। नमो ने 9 महीनो में दूरदर्शन को एक सच्चे राष्ट्रीय चैनल नहीं बनाया।
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अब भाजपा भले ही जीत जाये लेकिन केजरीवाल को ३५ % से ज्यादा वोट मिलना तय है और आने वाले चुनावो में राज्यवार आम आदमी पार्टी पैर पसरेगी। और पेड मीडिया उनकी जीत को सुनिचित करेगा
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समाधान : - रहट्रवादी कार्यकर्ता कानूनी ड्राफ्ट जैसे राइट टू रिकॉल , टी सी पी , जूरी सिस्टम , आदि का प्रचार करे तथा पार्टियो और नेताओ की अंधभक्ति न करे .fb.com/notes/10151308223491922 में सरे प्रस्तावित ड्राफ्ट है।