Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
Vinod Prajapat:
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काला धन तो चुनावी जुमला था - अमित शाह।
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थोड़े दिन और रुको .
धारा 370 तो जुमला था - राजनाथ सिंह।
पिंक रेवोलुशन भी जुमला था - नमो।
बांग्लादेशी मुदा भी चुनावी नारा था - अरुण जेटली।
स्वदेशी का तो नारा ही चुनाव के लिए होता है - बाबा रामदेव
राम मंदिर तो हमरा जुमला है - आरएसएस।
सामान नागरिक संहिता ??? यह क्या होता है - उमा भारती।
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सरकार भी जुमलों जुमलों में बन गयी न। कार्यकर्ता अब तो समझ जाये एक इंसान देश नहीं बदल सकता। स्थतिया बदलने के लिए हमे कानूनी प्रक्रियाओ की जरुरत है। देश को राइट टू रिकॉल , जूरी सिस्टम , टी सी पी , डी डी आर सी एम , आदि कानूनी की जरुरत है न की पेड मीडिया पर दिखने वाले सुपरमैन नेताओ की।
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प्रजा अधीन राजा/राईट टू रिकाल समूह (अपंजीकृत) के प्रस्ताव,श्री राजीव दीक्षित जी द्वारा समर्थित
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http://www.righttorecall.info/301.h.htm