Pawan Jury BhilwaraRj
संयुक्त सत्र में क़ानून पास करने के लिए वांछित संख्या -
545 + 243 = 788 ÷ 2 = 394 + 1 = 395
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NDA लोकसभा - 334
NDA राज्य सभा - 60
334 + 60 = 394
बहुमत में कमी 395 - 394 = 1
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किसी भी निर्दलीय सांसद/छोटे राजनेतिक दल को बिल के पक्ष में वोट करने के लिए पटाया जा सकता है/सीबीआई के द्वारा धमकाया जा सकता है/ ख़रीदा जा सकता है या अनुपस्थित रहने के लिए राजी किया जा सकता है ।
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बीजेपी का द्वारा यह सफ़ेद झूठ बोला जा रहा है, कि बांग्लादेशी घुसपेठियो को खदेड़ने, मोरिशस रूट समाप्त करने, गौ हत्या* को निषेध करने और धर्मांतरण को रोकने के लिए मोदी साहब इसिलए क़ानून पास नहीं कर पा रहे है, क्योंकि उनके पास राज्यसभा में बहुमत नही है ।
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* मैं गौ हत्या रोकने के लिए केन्द्रीय स्तर पे क़ानून बनाने का समर्थन नही करता, मेरा मानना है कि राज्य स्तर पर ही प्रभावी क़ानून बना कर गौ हत्या को रोका जा सकता है ।
** मेरा मानना है कि, धर्मान्तरण निरोधी क़ानून धर्मांतरण रोकने में असफल रहेगा । इसे रोकने के लिए हमें शिक्षा, चिकित्सा तथा गरीबी की समस्या दूर करने के लिए राईट टू रिकाल तथा DDMRCM कानूनों की ज़रूरत है ।
किन्तु में इन कानूनों पर सवाल इसीलिए खड़े कर रहा हूँ, क्योंकि बीजेपी इन कानूनों को पास करने में बहुमत नही होने का बहाना कर रही है ।
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केजरीवाल जी का कहना है कि, यदि उनके पास 272 सांसद हुए तो वे मोरिशस रूट को तुरंत ख़त्म कर देंगे , किन्तु उनके 4 सांसदों में से किसी ने भी अब तक इस सम्बन्ध में कोई प्राइवेट बिल पेश नही किया है ।
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ज्ञातव्य है, कि पोटा का क़ानून वाजपेयी सरकार ने सयुंक्त सत्र बुलाकर ही पास किया था ।
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यहाँ एक सामान्य व्यक्ति भी यह प्रश्न पूछ सकता है, कि राष्ट्रीय स्तर के नेता/पार्टियाँ दिन दहाड़े इतना बड़ा झूठ कैसे बोल देती है ?
इसका संभावित उत्तर यह है कि, भक्ति की ये तासीर है, कि भक्त सिर्फ अपने भगवन के मुखारविंद से निकले शब्दों को ही ब्रह्म सत्य समझता है, अत: नेता भक्त भी उसी तथ्य को सत्य मानते है, जो कि उनके नेताजी द्वारा प्रस्तुत किये गए हो ।
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भक्तो की रुचि 'क्या कहा गया' की जगह 'किस के द्वारा कहा गया' में होती है, अत: इनके भगवन के अतिरिक्त यदि कोई इन्हें कोई सूचना देने की कोशिश करता है, तो ये तुरंत भैंस की भूमिका में आकर सामने वाले को ढोल पीटने वाला समझ बैठते है ।
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मेरा बिन्दु यह है कि, यदि आप सामान्य नागरिक/कार्यकर्ता है और देश में अच्छे क़ानून पास कराना चाहते है, तो अपना समय बीजेपी/कोंग्रेस/आप, मोदी/सोनिया/केजरीवाल के समर्थन में अपना समय नष्ट न करे, बल्कि समस्याओ के समाधान के लिए अच्छे कानूनों के प्रचार पर ध्यान केन्द्रित करें ।
किन्तु यदि आप मोदी/केजरी भक्त है, तो आपको यह मानने से रोका नही जा सकता कि, संविधान के अनुसार संयुक्त अधिवेशन बुलाना असंवेधानिक है, तथा प्राइवेट बिल नाम की कोई वस्तु संसदीय प्रणाली में नही होती ।
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प्रजा अधीन राजा @