Pawan Jury BhilwaraRj

इन तथ्यों के मद्देनज़र कि
अ. पाकिस्तान और चीन कश्मीर को आपस में बांटना चाहते है जबकि अमेरिका जम्मू कश्मीर को स्वतंत्र देश बनाना चाहता है ।
ब. अमेरिका चीन से लड़ने के लिए भारतीय जमीन और फ़ौज इस्तेमाल करना चाहता है ।
स. विभिन्न आतंकवादी संघठन भारत में जिहाद छेड़ना चाहते है।
द. अमेरिका भारत के खनिज तथा चीन पूर्वोत्तर हिस्सा हडपना चाहता है ।
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1. यदि अमेरिका भारत के खनिज संसाधनों को हड़पने के लिए भारत पर हमला करता है ?
2. यदि चीन पूर्वोत्तर इलाके को हड़पने के लिए भारत पर हमला करता है ?
3. यदि चीन या अमेरिका पाकिस्तान को भारत पर हमला करने के लिए आधुनिक हथियार देते है ?
4. यदि पाकिस्तान को चीन परमाणु हथियार और अपनी क्रूज़ मिसाइले देता है ?
5. यदि पाकिस्तान के परमाणु हथियारो तक ISIS अपनी पहुचँ बना लेता है और भारत पर हमला करता है ?
6. यदि भारत और पाकिस्तान में युद्ध होता है, और चीन के सहयोग से पाकिस्तान भारत पर परमाणु हमले करता है ?
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यदि उपरोक्त वर्णित चार बिन्दुओ (अ,ब,स,द) में से कोई एक भी सत्य है, तो पूरी संभावना ( लगभग निश्चितता) है कि कालान्तर में, दी गयी छ: (1,2,3,4,5,6) में से किसी भी एक या दो परिस्थितियों का घटित होना तय है ।
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छद्म (फर्ज़ी) समाधान :
1. सबसे आसान उपाय यह है कि हम यह मान लें कि ऐसा कुछ भी कभी होने वाला नही है, अत: हम निश्चिन्त हो सकते है ।
नतीजा - हम बहुत बड़ा जोखिम उठा रहे है ।
2. यदि ऐसा होता भी है तो भारत की सेना हर प्रकार से इन परिस्थितियों का मुकाबला करने में सक्षम है ।
नतीजा - एक महीने के अन्दर अन्दर भारतीय सेना रुपी दीवार टूट जायेगी, दुश्मन देश की सेना दिल्ली को रौंदती हुयी चेन्नई तक पहुँच जायेगी और भारत का इराकीकरण हो जाएगा ।
3. यदि इनमे से कोई भी परिस्थिति उत्पन्न होती है तो हम अमेरिका की फ़ौज से भारत को बचाने की प्रार्थना करे ताकि अमरीकी फ़ौज भारत पर अपने सैन्य अड्डे बना सके ।
नतीजा - भारत अमेरिका का ग़ुलाम बन जाएगा, जैसे कि सऊदी अरेबिया है ।
4. भारत फिरौती के रूप में FDI को अनुमति देता रहे, ताकि यथासंभव इन परिस्थितियों को टाला जा सके।
नतीजा - FDI से भारत की स्वदेशी इकाइयां नष्ट हो रही है और हम पर डॉलर का क़र्ज़ बढ़ता जा रहा है । विदेशी कम्पनियां हमारी पूरी अर्थव्यवस्था को अधिगृहित कर लेगी, हमारी विज्ञान एवं गणित की शिक्षा को तबाह कर देगी, हमारे उर्जा एवं खनिज संसाधन औने पौने दामो नीलाम होंगे, हमारी जमींन बहुराष्ट्रिय कम्पनियां खींच लेगी, देश में रोज़गार के नाम पर बाबू फ़ौज खड़ी हो जायेगी, हमारा निर्यात और भी गिरेगा, हम डॉलर के क़र्ज़ में डूबते जायेंगे और हम डॉलर के क़र्ज़ में कभी न उभरने के लिए डूबते चले जायेंगे ।
जब MNCs मोनोपोली स्थापित कर लेगी तो उनके CSR में भारी बढ़ोतरी होगी, जिस से बहुत बड़े पैमाने पर हिन्दुओ का ईसाइयत में धर्मान्तरण होगा । जब MNCs कमाए गए रुपये के बदले डॉलर की मांग करेगी, तो भारत के पास भुगतान करने के लिए डॉलर नही होंगे ( तब तक बचा खुचा सोना भी लूटा जा चुका होगा ), फलस्वरूप भारत के खनिज, राष्ट्रीय संपत्तियां और सार्वजनिक उपक्रम नीलाम हो जायेंगे, नतीजतन भारत साउथ कोरिया की तरह अमेरिका का उपनिवेश बन जाएगा ।
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वास्तविक समाधान :
एक मात्र वास्तविक और व्यावहारिक समाधान यह है कि करोड़ो नागरिक अपने क्षेत्र के सांसदों को SMS द्वारा राईट टू रिकाल, जूरी सिस्टम, वेल्थ टेक्स, WOIC, हथियार बंद नागरिक समाज आदि कानूनों को गेजेट में छापने का आदेश करे । इन कानूनों के ड्राफ्ट दिए गए लिंक से डाउनलोड करे :
rahulmehta. com /301 .h. htm
इन कानूनों की सहायता से हम अपनी देश की सेना को अमेरिका की सेना जितना मज़बूत बना सकेंगे जिस से हमारी आज़ादी सुरक्षित रहेगी ।
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प्रजा अधीन राजा @ pk