Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate

नोबेल प्राइज के प्रचार के लिए बिकाऊ मीडिया पर भारी रकम खर्च की गयी है। नोबेल प्राइज तो मात्र $ 1.2 million = लगभग 7 करोड़ रूपये का होता है। लेकिन इस पुरस्कार का प्रचार करने वाली लॉबियाँ इससे हजारों गुना अधिक रकम तो बिकाऊ मीडिया पर इसके लिए खर्च कर देती हैं ताकि वे नोबेल प्राइज का हौआ बनायें। सैंकड़ो पत्रकारों को इस भ्रम को सर्जित करने के लिए खरीदा जाता है कि नोबेल पुरस्कार किसी राजनीतिक उद्देश्य से अभिप्रेरित नही हैं, हजारों पत्रकारों को इस मुद्दे पर मात्र अपना मुंह बंद रखने की कीमत दी जाती है।
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विज्ञान के क्षेत्र में जो नोबेल प्राइज दिया जाता है वह वास्तविक काम के लिए दिया जाता है। लेकिन अर्थशास्त्र, साहित्य और शांति का नोबेल पुरस्कार बस ऐसे व्यक्तियों को आगे बढ़ने के लिए दिए जाते हैं जो पश्चिमी लॉबियों के हितो की तुष्टि कर सके। वस्तुतः ये पुरस्कार किसी पेशेवर शिकारी को चमकीला कवच पहना कर संत की तरह प्रस्तुत करने का साधन हैं।
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इसी प्रकार के कई अन्य पुरस्कारों जैसे रमन मैग्सेसे अवार्ड आदि के पीछे भी समान उद्देश्य है। लेकिन नोबेल पुरस्कार तो इन सब की जननी है। ये पुरस्कार वैसे व्यक्तियों को दिए जाते हैं जो पश्चिमी देशों की तरफ से उनके हितों के लिए कार्य कर अपने देशों के हितों का शिकार करते हैं। इन्हे एक सच्चे कार्यकर्ता और क्रन्तिकारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जबकि वे वास्तव में भेड़ की खाल में छिपे भेड़िये होते हैं।