Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
दवाओं की कीमतों पर से सरकारी नियंत्रण हटाने का नमो द्वारा लिया गया फैसला गलत है। समाधान? दवाओं की कीमते नियंत्रित करने वाले मंत्रालय अर्थात रसायन व उर्वरक मंत्री का रिकॉल (Right to recall minister in-charge of Chemical and Fertilizer)।
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25-sep-2014 के आस पास नमो ने रसायन व उर्वरक मंत्री अनंत कुमार को निर्देश दिया कि वे नेशनल फार्मा प्राइस अथॉरिटी (NPPA) को दवाओं पर से प्राइस कैप हटाने का आदेश दे। इससे संभव है (may may may may) कि दवाओं की कीमते दोगुनी या तिगुनी तक बढ़ जाएँ। कृपया मेरे द्वारा may शब्द के कई बार प्रयोग पर ध्यान दें। ऐसा मैंने इसलिए लिखा है क्योंकि मैं 100% दावे के साथ नही कह सकता कि क्या होने वाला है। किन्तु यदि कीमते बढ़ती हैं तो निश्चित रूप से मरीजों को इसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे। सर्वाधिक महँगी दवाएं अमेरिका, जापान, ब्रिटेन या स्वीडेन में बनी होती हैं, और यदि इनका उत्पादन भारत में हुआ होता हैं तो उनका पेटेंट होल्डर कोई विदेशी ही होता है जो अधिकांश लाभांश प्राप्त करता है। विदेशी को यह अधिकार है कि वह इस लाभांश को भारत से बाहर ले जा सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार कम होगा। अतः मूल्य नियंत्रण हटाने का सबसे ज्यादा फायदा विदेशी कंपनियों को होगा। इससे मरीज तो पीड़ित होंगे ही, साथ ही देश का विदेशी मुद्रा संकट भी बढ़ेगा।
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इस तस्वीर का इससे भी बुरा एक पहलू और है। गरीब और मध्य वर्ग जब दोगुनी तिगुनी बढ़ी हुई कीमत को चुकाकर दवा खरीदने में सक्षम नही होगा तो मजबूरी में उन्हें मिशनरियों के समक्ष हाथ फैलाना पड़ेगा। इस प्रकार मूल्य नियंत्रण हटाने का नमो का यह फैसला धर्म परिवर्तन को भी बढ़ावा दे सकता है।
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सोनिया, कांग्रेस और भाजपा के सभी नेताओं ने इस मूल्य वृद्धि की संभावना का स्वागत किया है। साथ ही आआपा तथा एके ने इसके प्रस्तावित समाधान अर्थात RTR Chemcial Minister का विरोध किया है, जो एक प्रकार से इस मूल्य वृद्धि को परोक्ष समर्थन देने के समान ही है। आआपा के 4 सांसदों में से किसी ने भी इस समस्या के समाधान हेतु कानून लाने के लिए कोई भी बिल (private member's bill) प्रस्तुत नही किया है। उनका घिसा पिटा बहाना है-- जब जनता हमें लोकसभा में 273 सीटों पर जिताएगी तब हम इस समस्या का समाधान करेंगे!!
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गरीब तो दोहरी मार झेल रहे हैं। CoBhAp = कांग्रेस, भाजपा, आआपा, सब एक से हैं। ये सभी किसानो द्वारा रासायनिक कीटनाशकों तथा फलों को पकाने के रसायनो के उपयोग कम करने के लिए आवश्यक कानून ड्राफ्ट लाने का हमेशा विरोध करते हैं। यही कारण है कि कैंसर, डाइबिटीज आदि बीमारिया महामारी की तरह फैलती जा रही हैं। मेनका गांधी, SoMoKe, CoBhAp आदि ने पागल कुत्तों को मारने के लिए कानून ड्राफ्ट लाने का भी विरोध किया है, जिससे कुत्ते के काटने के केस भी बढ़ रहे हैं। अब ये राजनेता रेबीज की दवाओं पर मूल्य नियंत्रण का भी विरोध कर रहे हैं। फलस्वरूप रेबीज की दवाएं भी महँगी होंगी!! दुसरे शब्दों में कहें तो गरीब हर तरफ से मारा जायेगा।
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मेरे द्वारा प्रस्तावित समाधान निम्नलिखित हैं-
1. अल्पकालीन समाधान यह है कि NPPA की भूमिका को पुनर्जीवित करके मूल्य नियंत्रण को फिर से लागू किया जाये। मतदाता अपने सांसद को url के साथ एसएमएस भेजकर आदेश दें कि वे Right to Recall minister के कानून ड्राफ्ट को लागू कराएं। url सम्बन्धी जानकारी के लिए देखें- tinyurl .com\RtrMinister. यदि आपको यह url अच्छा लगे तो इसे अपने सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश के तौर पर भेजें।
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2. दीर्घकालिक समाधान यह है कि भारतीय फार्मा कम्पनियो की प्रतियोगी क्षमता बढ़ाने हेतु गज़ट में कानून ड्राफ्ट प्रकाशित किये जाएँ। इनमे कुछ प्रमुख कानून ड्राफ्टों के नाम हैं- ज्यूरी सिस्टम, टीसीपी, डीडीएमआरसीएएम, राइट टू रिकॉल, संपत्ति कर, वैट हटाना, सेवा कर हटाना, केंद्रीय विक्रय कर हटाना, gst हटाना, उत्पाद कर हटाना, TDS/PF/ बीमा आदि को मालिको और कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनाना, आय कर को बढ़ाना, cross ownership की स्वतः समाप्ति आदि। मतदाताओं को चाहिए कि वे अपने सांसदों को एसएमएस द्वारा इन ड्राफ्टों को लागू करने के लिए url के साथ आदेश भेजें। url के लिए कृपया देखें- tinyurl. com/RahulMehtaSms
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3. कृपया "order to MP via sms containing url pointing necessary law-drafts" को फॉलो करें और नारेबाजी, मास्क पहनना, भाषण सुनना, परेड, प्रभातफेरियाँ, झाड़ू लगाना, टोपी पहनना, नेता भक्ति, नमो भक्ति, सोनिया भक्ति, एके भक्ति तथा इसी प्रकार की अन्य निरर्थक क्रियाएँ करना बंद कर दें।
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4. कृपया अधिकतम लोगों तक इस जानकारी को फैलाएं कि SoMoKe, CoBhAp ने RTR- minister तथा दवाओं की कीमते कम करने के लिए आवश्यक अन्य कानून ड्राफ्टों का विरोध किया है।
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Translation done by Hindi-RTR