Rahul Mehta Gandhinagar LsCandidate
खादी के वस्त्र पहनना भारतीयों के लिए अहितकर है, कैसे?
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हमें वैसे वस्त्र पहनने चाहिए जो शत प्रतिशत स्वदेशी (भारत में तथा भारतीयों के द्वारा) निर्मित हों। त्वचा की सुरक्षा की दृष्टि से हमें सूती वस्त्र पहनने चाहिए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि ये वस्त्र ऐसे मिल में बनाये गए हो जहा उन मशीनो का उपयोग होता हो जिनका निर्माण 100% भारत में तथा भारतीयों के द्वारा किया गया हो। लेकिन हमें खादी का उपयोग नही करना चाहिए। ऐसा क्यों?
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वर्तमान समय में हमारे समाज के लिए हथियारों का निर्माण सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय है। अपनी आज़ादी को कायम रखने तथा पाकिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन, चीन आदि से अपनी सुरक्षा के लिए हथियारों पर हमारी निर्भरता सर्वविदित है। अतः हमें इसपर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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हथियार निर्माण की क्षमता का सीधा सम्बन्ध अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) से है। अपने इंजीनियरिंग कौशल का जितना अधिक उपयोग हम विभिन्न क्षेत्रों में करेंगे, उतना अधिक इसे प्रोत्साहन मिलेगा और इस प्रकार से इंजीनियरों के बढे हुए आत्मबल एवं उत्साह का लाभ हमें हथियार निर्माण क्षेत्र में भी मिलेगा। 100% भारत में, भारतीयों के द्वारा बनाई गयी मशीनो का उपयोग करने वाली मिलो में बने वस्त्रों का उपयोग करके हम भारत को अत्याधुनिक मशीनो एवं हथियारों से लैश देश बनाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जो किसी भी मामले में किसी से कम नही रहेगा।
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इसके विपरीत खादी का उपयोग करने से स्वदेशी इंजीनियरिंग को कही से भी प्रोत्साहन नही मिलेगा और न ही इससे आगे चलकर हथियार निर्माण के कौशल को बढ़ावा मिलेगा।
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साथ ही खादी को सरकारी अनुदान मिलने से हम पर करों का बोझ बढ़ता है और भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है। आज के समय में खादी की वकालत करना और उच्च कर दरों एवं भ्रष्टाचार का समर्थन करना एक ही बात है।
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खादी एक प्रकार से गरीबो का परोक्ष अपमान भी है, क्योकि इन पर होने वाला व्यय गरीब आदमी के लिए संभव नही है। इनका उपयोग ही आदमी की आर्थिक सम्पन्नता का गुणगान कर देता है।
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अतः कृपया यथाशीघ्र और यथासंभव खादी का उपयोग कम करें। कृपया खादी तथा खादी के उपभोक्ताओं का बहिष्कार करें।
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कृपया अपने सांसद/ विधायक को एसएमएस भेजकर खादी को दिए जाने वाले सभी अनुदानों को रद्द करने तथा खादी विभाग को समाप्त करने हेतु अादेश दें। खादी अपने दम पर अपना अस्तित्व कायम रखे या समाप्त हो जाये, दोनों ही स्थितियों में हमें कोई लेना देना नही। कृपया मेरे अगले पोस्ट को पढ़े जिसमे मैंने एसएमएस द्वारा सांसद को आदेश देने के बारे में लिखा है।
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-- Rahul Chimanbhai Mehta , Right to Recall Group